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सत्ता के लिए भाजपा मिलायेगी मायावती से हाथ?

बैंगलोर। लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। हर राजनीतिक दल अपने-अपने ढंग से वोटरों को लुभाने में लगा हुआ है। जोड़-तोड़ भी शुरू हो चुका है जिसमें सबसे आगे है बीजेपी।

कल तक ब्राह्मणों और ठाकुरों की पार्टी कही जाने वाली बीजेपी आज दलितों और पिछड़ी दलों की पार्टी बन गयी है। पिछले कुछ महीने में पार्टी में कुछ नामी-गिरामी पिछड़ी जातियों के शीर्ष नेताओं ने उपस्थिति दर्ज करा ली है।

बिहार, तमिलनाडु, कर्नाटक सब जगह बीजेपी ने गठजोड़ किया है लेकिन सबसे बड़े वोटिंग एरिया यानी उत्तर प्रदेश में अभी किसी भी दल के साथ भाजपा का गठजोड़ नहीं हुआ है।

Did You Know: बौद्ध धर्म अपनायेंगी मायावती

या यूं कह ले कि यूपी में भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। बीबीसी की मानें तो भाजपा को पता है कि सत्ता तक का रास्ता यूपी से होकर ही जाने वाला है इसलिए उसने अपनी स्ट्रेटजी में परिवर्तन किया है। उसे पता है कि पिछड़े दल का सपा से और दलितों का बसपा से मोहभंग कर पाना यूपी में बहुत मुश्किल है।

कुंडली तो कहती है कि सोनिया का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता

चूंकि मुलायम सिंह ने तीसरे मोर्चे का ऐलान करके जता दिया है कि वह यूपीए या एनडीए किसी के साथ नहीं जा सकते हैं लेकिन मायावती की जुबान अभी चुप है और उन्हें पता है कि जो हालात देश में है उसके मुताबिक उनके बिना देश को गैर यूपीए नया पीएम बनाने में उनका बड़ा रोल हो सकता है इसलिए वह भी अभी शांति से बैठी हुई हैं।

भाजपा ने अपनी सभी रैलियों में सपा औऱ कांग्रेस को कोसा है लेकिन बसपा पर उसके तरकश के तीर नहीं निकले हैं, यहां तक की बसपा सुप्रीमों काशीराम के लिए भारत रत्न की सिफारिश करना भी उसी स्ट्रेदजी का हिस्सा है।

जिसकी वजह से राजनैतिक पंडितों और समीक्षकों ने दबी जुबां में कहना शुरू कर दिया है कि हो सकता है कि चुनाव से ठीक पहले या फिर चुनाव नतीजों के ठीक बाद एक बार फिर से भाजपा और बसपा एक हो जायें उसी तरह जिस तरह से यूपीए 2 में मुलायम और कांग्रेस हुए थे।

मतलब कि यूपी में आमने-सामने और दिल्ली में साथ-साथ। खैर यह राजनीति है जिसकी बिसात कभी भी कहीं भी और किसी के भी लिए बदल सकती है। यह अंदाजा और कयास है जो कि देश की राजनीति की समझ रखने वालों ने लगाये हैं लेकिन अगर सच में ऐसा होता है तो भाजपा-बसपा दोनों की दोस्ती देश की राजनीति का नया चेहरा पेश कर सकती है।

इस बारे में आपका क्या कहना है? अपना जवाब नीचे लिखे कमेंट बॉक्स में दर्ज कीजिये।

Did You Know: मायावती ने 2006 में नागपुर में घोषणा की थी कि जब उनके समर्थक उन्हें देश की प्रधानमंत्री बनवायेंगे तब वो वह बौद्ध धर्म ग्रहण करेंगी।

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