असम में कमल के फूल से बदलेगी पूर्वोत्तर राज्यों की राजनीति
नई दिल्ली। असम में जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया है उसे देखते हुए भाजपा के नेताओ में खुशी की लहर है। पहली बार असम में भाजपा सरकार बनाने की ओर लगभग बढ़ चुकी है। असम की 126 सीटों में भाजपा 65 सीटों पर आगे चल रही है।
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पूर्वोत्तर की राजनीति भारतीय जनता पार्टी नया इतिहास रचने जा रही है। सर्वदानंद सोनवाल की अगुवाई में भाजपा ने कांग्रेस की सांसे उड़ा कर रख दी है। असम में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है तो कांग्रेस दूसरे नंबर पर आ गयी है। असम में कांग्रेस के शर्मनाक प्रदर्शन ने काग्रेस के आला नेताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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दशकों बाद कांग्रेस का राज खात्मे की ओर
पिछली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पास 68 सीटें थी जबकि भाजपा के पास सिर्फ 6 सीटें थी। ऐसे में भाजपा 68 सीटों पर आगे हैं। इस लिहाज से भाजपा को 60 से अधिक सीटों की बढ़त हो रही है जबकि कांग्रेस को इस बार सिर्फ 26 सीटें मिलती दिख रही है। ऐसे में असम एक और ऐसा राज्य बन गया है जहां दशकों से कांग्रेस का राज था वह छिन रहा है।
पीएम मोदी का पूर्वोत्तर राज्यों की ओर रूझान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से पूर्वोत्तर राज्यों के लिए नयी योजनायें शुरु की और भारतीय रेल को पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचाया उसे एक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद असम में कई रैलियों को संबोधित किया और कांग्रेस विरोधी लहर को भाजपा की ओर मोड़ने प्रयास किया। इसके अलावा नक्सवाल के खिलाफ केंद्र सरकार का युद्ध स्तरीय अभियान ने भी भाजपा के पक्ष में वोटों का रूझान पलटा।
सर्वदानंद सोनवाल की बेदाग छवि
भाजपा अभी तक मुख्यमंत्री का चेहरा आगे किया बिना चुनाव लड़ने पर भरोसा रखती हैं, लेकिन असम में भाजपा ने सर्वदानंद सोनवाल को पहले ही मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दिया था, जिसका काफी फायदा पार्टी को हुआ। भाजपा की इस सफलता के लिए सर्वदानंद सोनवाल की साफ छवि को भी जाता है।












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