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BJP अध्यक्ष बनेंगे या उपराष्ट्रपति? अब मनोहर लाल खट्टर ने खुद कर दिया बड़ा खुलासा, जवाब हैरान कर देगा

Manohar Lal Khattar: देश की सियासत में इन दिनों दो बड़े पदों को लेकर जबरदस्त चर्चाएं गर्म हैं-पहला, उपराष्ट्रपति पद, जो जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे के बाद खाली हुआ है, और दूसरा, भारतीय जनता पार्टी (BJP) का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष, जिसकी तलाश पार्टी नेतृत्व में नई ऊर्जा लाने के मकसद से की जा रही है।

सूत्रों की मानें तो इस बार उपराष्ट्रपति पद के लिए खुद बीजेपी के भीतर से किसी बड़े नेता का नाम सामने आ सकता है। इसी तरह पार्टी अध्यक्ष पद के लिए भी कई दिग्गज नेताओं के नामों पर विचार हो रहा है। इन दोनों अहम जिम्मेदारियों के लिए एक नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है-केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता मनोहर लाल खट्टर। उनकी संघ पृष्ठभूमि, संगठन पर पकड़ और प्रशासनिक अनुभव उन्हें इन दोनों पदों के लिए एक मजबूत दावेदार बनाता है। अब मनोहर लाल खट्टर ने खुद इस सवाल का जवाब दिया है।

Manohar Lal Khattar

भाजपा अध्यक्ष बनेंगे या उपराष्ट्रपति? मनोहर लाल खट्टर ने बताया?

मनोहर लाल खट्टर से जब पूछा गया कि अगर उन्हें उपराष्ट्रपति और बीजेपी अध्यक्ष में से किसी एक पद को चुनना हो, तो वे क्या चुनेंगे? तो खट्टर ने एकदम कूटनीतिक अंदाज में जवाब दिया - "मैं कोई चुनाव नहीं करता... जो जिम्मेदारी दी जाती है, उसे निभाता हूं।" मनोहर लाल खट्टर ने ये बातें NDTV के एक कार्यक्रम में कही है।

मनोहर लाल खट्टर ने अपने शुरूआती दिनों की एक दिलचस्प कहानी सुनाई, जिससे उन्होंने यह समझाने की कोशिश की कि पद उनके लिए मायने नहीं रखता, बल्कि काम मायने रखता है। उन्होंने बताया, "1980 में मुझे पहली जिम्मेदारी मिली थी बतौर प्रचारक। 1981 में फरीदाबाद में मेरी पोस्टिंग थी। एक दिन जिला प्रचारक मुझे बस स्टैंड छोड़ने के लिए बोले। बस पर चढ़ते वक्त उन्होंने अचानक कहा, 'अरे, आपको रोहतक ट्रांसफर कर दिया गया है।' मैंने बिना सवाल किए जवाब दिया -ठीक है।"

खट्टर ने कहा, "न मैंने पूछा क्यों रोहतक, न मैंने मना किया। मुझे जो भी काम सौंपा जाता है, मैं उसे पूरी निष्ठा से करता हूं। न कोई काम छोटा होता है, न बड़ा। अगर मुझे वीपी या बीजेपी अध्यक्ष नहीं भी बनाया गया, तो भी मेरे पास करने के लिए बहुत काम रहेगा।"

उपराष्ट्रपति का पद क्यों खाली हुआ?

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। हालांकि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया, लेकिन सूत्रों ने बताया कि धनखड़ ने विपक्ष के प्रस्ताव पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था, जिससे पार्टी असहज हो गई थी।

भाजपा नेतृत्व पहले से ही इस प्रस्ताव पर अपनी रणनीति तैयार कर रहा था, लेकिन विपक्ष को श्रेय मिल गया। इस कदम से धनखड़ पार्टी की रणनीति के खिलाफ जाते नजर आए। खट्टर ने भी इसपर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाते हुए कहा, "बिना सरकार पर भरोसा किए उन्होंने विपक्ष का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, ये सरकार की रणनीति थी।"

बीजेपी अध्यक्ष पद को लेकर क्या चल रहा है मंथन?

जेपी नड्डा को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बनाए जाने के बाद पार्टी नए अध्यक्ष की तलाश में है। यह एक आसान काम नहीं है, क्योंकि जातीय समीकरण, उत्तर-दक्षिण भारत का राजनीतिक संतुलन और 2026 की जनगणना और परिसीमन जैसे मुद्दे भी पार्टी को संतुलित करना होगा।

तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में जहां बीजेपी की पकड़ कमजोर है, वहां भी ध्यान देना जरूरी है। हालांकि खट्टर उत्तर भारत से हैं, पर उनकी RSS पृष्ठभूमि और संगठनात्मक समझ उन्हें एक मजबूत दावेदार बना सकती है।

पिछले साल हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले खट्टर को अचानक मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था, ताकि एंटी-इंकम्बेंसी का असर न पड़े। इसके बाद उन्हें केंद्र में मंत्री बनाकर नई जिम्मेदारी दी गई।

मनोहर लाल खट्टर का यह बयान न सिर्फ राजनीतिक समझदारी को दिखाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वो पद के पीछे नहीं, जिम्मेदारी के पीछे भागते हैं। आने वाले दिनों में उन्हें कौन सी नई भूमिका मिलती है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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