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एनसीपी के सहयोग से महाराष्ट्र में सरकार बना सकती है बीजेपी!

बेंगलुरू। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 में नतीजे आ चुके हैं। महाराष्ट्र की जनता ने एनडीए गठबंधन (बीजेपी-शिवसेना) को दोबारा सरकार बनाने के लिए 161 सीटें भी जितवा दी हैं, लेकिन अभी तक प्रदेश में सरकार बनने की कवायद शुरू नहीं हो सकी है।

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बीजेपी और शिवसेना दोनों दलों के बीच बड़े भाई और छोटे भाई का झगड़ा पिछले एक दशक से चल रह है, लेकिव वर्ष 2014 हुए विधानसभा चुनाव के बाद आए नतीजों में यह झगड़ा सतह पर आ गया था। 2014 विधानसभा चुनाव में दोनों दल बीजेपी और शिवसेना ने अलग-अलग चुनाव के मैदान में उतरी थीं, लेकिन नतीजों ने एक बार दोनों को गठबंधन की सरकार चलाने के लिए मजबूर कर दिया।

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गौरतलब है वर्ष 2014 में अंततः दोनों दलो की बीच गठबंधन हुआ और पांच वर्ष तक दोनों दलों के बीच हुआ गठबंधन बिना किसी बड़े उठापटक के चलता गया, लेकिन 2014 विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी से गठबंधन करने से पूर्व शिवसेना ने बड़े भाई और छोटे भाई का खेल खेलना शुरू किया था, वह अभी तक खत्म नहीं हुआ है।

इसकी एक झलक 2014 में भी दिखी थी जब एनसीपी लीडर शरद पवार ने शिवसेना को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान कर दिया था। कहते हैं इतिहास खुद को दोहराता है। 2019 विधानसभा चुनाव के परिणाम में एक बार फिर शरद पवार मौजू हो चले हैं और उन्होंने बीजेपी और शिवसेना की लड़ाई में कूद पड़े हैं।

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2019 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 105 सीटें मिली हैं और शिवसेना को 56 सीटें हासिल हुई हैं जबकि एनसीपी को 59 सीटों पर विजय हासिल हुई हैं। बीजेपी-शिवसेना आराम से 161 सीटों के साथ बहुमत वाली सरकार महाराष्ट्र में सरकार बना सकती है, लेकिन शिवसेना एक बार फिर महाराष्ट्र में बड़े भाई बनने का भूत सवार है, वह बीजेपी से रोटेशनल यानी 50-50 फार्मूले पर सरकार चलाने को लेकर अड़ी हुई है। शिवसेना चाहती है कि बीजेपी और शिवसेना के मुख्यमंत्री ढ़ाई-ढ़ाई वर्ष तक महाराष्ट्र में शासन करें, लेकिन 105 सीट जीतने वाली बीजेपी शिवसेना के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

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    शिवसेना को भी पता है कि बीजेपी उसका स्वाभाविक एलायंस है, लेकिन कैबिनेट के मलाईदार पोर्टफोलियो के लिए शिवसेना ने हर बार बीजेपी को हैरान-परेशान किया है। शिवसेना अब तक कुल तीन बार बीजेपी के साथ एलायंस करके महाराष्ट्र सरकार में रह चुकी है, लेकिन हर बार उसने मलाईदार पोर्टफोलियो के लिए धमकी और गठबंधन तोड़ने का हवाला देकर मनमाने शर्तो को गठबंधन पर लादने की कोशिश की है।

    इस बार भी शिवसेना स्पष्ट बहुमत के बावजूद बीजेपी को अपनी मनमाने शर्तों पर झुकाने के लिए एनसीपी को बीच में ले आई है। शिवसेना जानती है कि वह अकेले एसीपी के साथ गठबंधन करके महाराष्ट्र में सरकार नहीं बना सकती है और उसे कांग्रेस का साथ लेना पड़ेगा, लेकिन फिर भी वह बागी तेवर अपनााए हुए हैं।

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    लेकिन ऐसा लग रहा है कि इस बार बीजेपी भी शिव सेना को सबक सिखाने की मूड में है। शायद यही कारण है कि वह शिव सेना के 50-50 फार्मूले के प्रस्ताव को घास तक नहीं डाल रही है। बीजेपी के रवैये से आहत शिवसेना नेता लगातार ऊलजुलूल बयान दे रहे हैं, लेकिन बीजेपी झुकने को तैयार नहीं है।

    संभवतः बीजेपी एनसीपी के साथ गणित बैठाने की जुगत में जुटी हुई है। अगर ऐसा हुआ तो यह शिव सेना के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा। बीजेपी और एनसीपी दोनों आराम से बहुमत के करीब पहुंच रहे हैं। बीजेपी 105 सीट और एनसीपी 54 सीट को मिलाकर 159 सीटें हो रही हैं, जो 14 सीट ज्यादा है।

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    हालांकि एनसीपी और बीजेपी के बीच गठबंधन की संभावनाओं को देखते हुए शिव सेना की अकड़ थोड़ी ढ़ीली जरूर हुई है और उसने बीजेपी द्वारा सुझाए गए फार्मूले पर तैयार भी होती दिख रही है। बीजेपी ने शिवेसेना के 50-50 फार्मूले को तोड़ते हुए एक नया फार्मूला शिवसेना का भेजा है, जिसमें ढ़ाई साल बाद आदित्य ठाकरे को डिप्टी सीएम बनाने का प्रस्ताव दिया है।

    माना जा रहा है कि शिवसेना बीजेपी के प्रस्ताव पर तैयार भी है, लेकिन वह बीजेपी के नए फार्मूले वाले प्रस्ताव पर बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मुहर चाहता है। एक निगाह में बीजेपी और शिवसेना गठबंधन की सरकार महाराष्ट्र में बनने जा रही है, क्योंकि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को इसमे कोई परेशानी नही होगी।

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    वैसे, बीजेपी के लिए एनसीपी के साथ गठबंधन करने का रास्ता भी खुला हुआ है और एनसीपी भी बीजेपी के साथ गठबंधन में शामिल होने से गुरेज नहीं करेगी। इसके पीछे एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार और एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ प्रवर्तन निदेशायलय के केस है, जो उन्हें बीजेपी के साथ गठबंधन सरकार में शामिल होने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

    विधानसभा चुनाव से पूर्व ही ईडी ने शरद पवार के खिलाफ को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले से जुड़े केस में प्राथमिकी दर्ज की है। वहीं, ईडी एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल से कुख्यात गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के सहयोगी इकबाल मिर्ची के साथ कथित जमीन सौदे को लेकर लगातार पूछताछ कर रही है।

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    अगर एनसीपी बीजेपी के साथ सरकार में शामिल होती है तो एनसीपी चीफ शरद पवार और एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल दोनों को ईडी से फौरी राहत मिल सकती है। शिवसेना को सबक सिखाने के लिए एनसीपी के साथ गठबंधन सरकार चलाने में बीजेपी को भी ज्यादा तकलीफ नहीं होगी। यह अलग बात है कि चुनावी कैंपेन के दौरान दोनों दलों ने एकदूसरे के खिलाफ भला-बुरा कहकर वोट मांगे थे। हालांकि राजनीति में इसके लिए कोई जगह नहीं है, क्योंकि दोबारा चुनाव जनता और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए हितकारी नहीं होंगे।

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    बहरहाल, कयासों से बाहर निकलें तो महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना की सरकार ही बनेगी और अंततः शिवसेना बीजेपी के सुझाए फार्मूले के आधार पर सरकार में शामिल हो जाएगी। शिवसेना के पास इसके अलावा कोई विकल्प भी नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी जब शिवसेना एनसीपी के साथ गठबंधन के कवायद में जुटी हुई थी, तो शिवसेना को अपने कार्यकर्ताओं से विरोध का सामना करना पड़ा था, क्योंकि पूरे पांच वर्ष शिवसैनिक एनसीपी के खिलाफ कैंपेन करते हैं। निःसंदेह महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी दलों को गठबंधन स्वाभाविक नहीं है और इससे दोनों दलो की साख पर बट्टा लगना तय है।

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    इसीलिए माना जा रहा है कि एनसीपी एक बार बीजेपी के साथ गठबंधन करके सरकार में शामिल हो सकती है, लेकिन शिवसेना के साथ गठबंधन करके महाराष्ट्र मे सरकार में जाने से पहले हजार बार सोचेगी। इसके पीछे वजह साफ है कि दोनों दल महाराष्ट्र में पूरब और पश्चिम की तरह हैं और दोनों दल महाराष्ट्र के वोटर्स से एकदूसरे के खिलाफ जाकर वोट मांगते हैं और दोनों दल एक साथ हो गए तो दोनों दल किसके खिलाफ वोट मांगेंगे। यह ठीक वैसे ही है, जैसे बीजेपी शिवसेना के खिलाफ बोलकर महाराष्ट्र के वोटर्स से अपने लिए वोट मागे और एनसीपी कांग्रेस के खिलाफ महाराष्ट्र के वोटर्स से अपने लिए वोट मांगे।

    यह भी पढ़ें- शिवसेना नेता संजय राउत का तंज- महाराष्ट्र में कोई दुष्यंत नहीं जिनके पिता जेल में हों

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