Bitcoin पर्यावरण के लिए खतरनाक, करेंसी की माइनिंग में एक देश के बराबर कॉर्बन उत्सर्जन
नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे तेजी चर्चित क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन लगातार डिजिटल मार्केट में ऊपर की ओर जा रही है। लेकिन एक तरफ जहां ये डिजिटल टोकल लगातार ऊंचाई छू रहा है और एलन मस्क जैसे बड़े निवेशक इसकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं, इस करेंसी को लेकर गंभीर सवाल भी उठ रहे है। इसे लेकर सबसे बड़ी चिंता पर्यावरण को लेकर है।

ट्रांजेक्शन में खर्च होती है भारी ऊर्जा
सबसे बड़ा सवाल इस करेंसी के माइनिंग और ट्रांजेक्शन में खर्च होने वाली ऊर्जा है। दुनिया के टॉप-5 अमीरों में शामिल और बिटकॉइन के सबसे मुखर आलोचकों में से एक बिल गेट्स बताते हैं कि बिटकॉइन के ट्रांजेक्शन में अब तक जानकारी में शामिल किसी भी करेंसी के मुकाबले में सबसे ज्यादा बिजली की खपत होती है। ऊर्जा की खपत को देखते हुए यह पर्यावरण के लिए अच्छी नहीं है।
ऐसे समय में जब कंपनियां और निवेशक तेजी दुनिया में इस बात का ढोल पीट रहे हैं कि जलवायु और स्थिरता उनके लिए प्रमुख है। उसी समय बिटकॉइन की लगभग एक ट्रिलियन डॉलर कीमत उनमें से कुछ की प्राथमिकता की पोल खोल रहे हैं।

न्यूजीलैण्ड के बराबर होता है कॉर्बन उत्सर्जन
टेस्ला जैसी बड़ी कंपनियों और बड़े निवेशकों के इस डिजिटल टोकन की तरफ जाने के बाद अब इस क्रिप्टोकरेंसी को बाजार से दूर रख पाना बहुत ही मुश्किल होगा लेकिन इसके साथ ही जलवायु को लेकर चिंताएं भी बढ़नी शुरू हो गई हैं।
एक अध्ययन के मुताबिक साल भर में बिटकॉइन की माइनिंग में जितनी बिजली खर्च होती है उस बिजली को तैयार करने में जितना कॉर्बन उत्सर्जन होता है उसकी मात्रा न्यूजीलैण्ड या अर्जेण्टीना जैसे देश के बराबर है। माइनिंग वह तरीका है जिसके जरिए क्रिप्टोकरेंसी को ट्रांजेक्शन के लायक बनाया जाता है।

जानिए कितनी ऊर्जा की होती है खर्च
इसे थोड़ा और आसान करते हैं। एक बिटकॉइन के ट्रांजेक्शन में 735,121 वीजा ट्रांजेक्शन के बराबर या फिर 55,280 घण्टे यू ट्यूब देखने के बराबर कार्बन फुटप्रिंट निकलता है। बिटकॉइन के ऊर्जा खपत की जानकारी देने वाली डायग्नोमिस्ट ने ये जानकारी दी है।
बिटकॉइन के आलोचकों के मुताबिक बिटकॉइन के ट्रांजेक्शन में 16000 डॉलर खर्च होते हैं जबकि औसत वीजा ट्रांजेक्शन में 46.37 डॉलर के बराबर खर्च होते हैं।












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