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बिहार: मनोज बैठा की गिरफ़्तारी की बजाय सरेंडर क्यों?

By Bbc Hindi
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    बिहार पुलिस एक और ऐसे हाई-प्रोफाइल मामले में अभियुक्त को गिरफ़्तार करने में नाकाम रही है जिसमें अभियुक्त किसी दल के नेता हों.

    मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले के धर्मपुर में शनिवार को हुए सड़क हादसे के अभियुक्त और निलंबित भाजपा नेता मनोज बैठा ने बुधवार को आधी रात पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए पुलिस सुरक्षा में पटना भेज दिया गया है जहां सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा है.

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    नौ स्कूली बच्चे मारे गए

    शनिवार को धर्मपुर में बोलेरो गाड़ी के चपेट में आने से नौ बच्चों की मौत हो गई थी, इस गाड़ी को कथित तौर पर मनोज बैठा चला रहे थे. दुर्घटना में दस बच्चे घायल भी हुए.

    मनोज बैठा की आत्मसमर्पण की पुष्टि करते हुए इस मामले के जांच अधिकारी सोना प्रसाद सिंह ने बीबीसी से कहा, ''मनोज ने मंगलवार रात करीब डेढ़ बजे मुज़फ़्फ़रपुर के एसएसपी विवेक कुमार के समाने आत्मसमर्पण किया. उनके जबड़े, सीने और कमर में काफी चोट है. ये चोटें पुलिस की इस शुरुआती जांच की सही ठहराते हैं कि हादसे के वक्त मनोज बैठा खुद अपनी गाड़ी चला रहे थे.''

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    कौन हैं मनोज बैठा?

    जो बोलेरो गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हुई, उस पर लगे बोर्ड पर लिखा था, ''मनोज बैठा, प्रदेश महामंत्री, महादलित मंच, भाजपा.''

    घटना के बाद पहले भारतीय जनता पार्टी की ओर से इतना भर कहा गया कि दोषी कोई भी हो उसे बख्शा नहीं लायेगा. लेकिन धीरे-धीरे जब प्रदेश के कई बड़े नेताओं के साथ मनोज की तस्वीरें और उनके नाम के पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं तो भाजपा ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया.

    घटना के बाद विपक्ष के साथ-साथ मृतक बच्चों के परिजनों ने भी यह आरोप लगाया था कि मनोज शराब के नशे में गाड़ी चला रहे थे. मनोज बैठा पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है.

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    हादसे में नौ स्कूली बच्चों की मौत हो गई थी
    Manish Shandilya/BBC
    हादसे में नौ स्कूली बच्चों की मौत हो गई थी

    आत्मसमर्पण का अकेला मामला नहीं

    इसके पहले, महागठबंधन सरकार के दौरान भी सत्तारूढ़ गठबंधन के दो विधायकों पर जब संगीन आरोप लगे थे तब उन्होंने ओरोपित होने के कई दिनों बाद आत्मसमर्पण किया था. इनमें से एक मामला बलात्कार के अभियुक्त राजद विधायक राजबल्लभ यादव का तो दूसरा छेड़खानी के अभियुक्त जदयू विधायक सरफराज़ आलम का था.

    मध्य विद्यालय धरमपुर
    Manish Shandilya/BBC
    मध्य विद्यालय धरमपुर

    बाद में इन दोनों को इनकी पार्टियों ने निलंबित कर दिया. लेकिन दिलचस्प यह कि सरफराज़ आलम ने कुछ दिनों पहले विधायक पद से इस्तीफा देकर राजद का दामन थाम लिया है.

    साथ ही चर्चित गया रोडरेज मामले में दोषी करार दिए गए रॉकी यादव के मामले में भी ऐसा हुआ था. सुनवाई के दौरान उन्हें पटना हाईकोर्ट से ज़मानत मिल गई थी. जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया. ज़मानत रद्द किए जाने के बाद पुलिस उनको गिरफ़्तार नहीं कर पाई थी बल्कि उन्होंने गया सिविल कोर्ट में सरेंडर किया था.

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    घटना स्थल पर बिखरे सामान
    Manish Shandilya/BBC
    घटना स्थल पर बिखरे सामान

    विपक्ष का तीखा हमला

    वहीं धर्मपुर सड़क हादसे मामले में मनोज बैठा की गिरफ़्तारी में हो रही देरी से विपक्ष लगातार हमलावर रहा. सोमवार को जब विधानसभा का बजट सत्र शुरू हुआ तो विपक्ष ने पुलिस की इस नाकामी के लिए न केवल सदन में सरकार को घेरा बल्कि इस मुद्दे पर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने राजभवन तक मार्च भी किया.

    अब उनकी गिरफ़्तारी के बाद भी तेजस्वी सरकार पर निशाना साधने से नहीं चूके. उन्होंने गिरफ़्तारी के बाद कई ट्वीट कर हमले किए.

    https://twitter.com/yadavtejashwi/status/968042729119928320

    एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, ''नीतीश कुमार उसे (मनोज बैठा को) जानबूझ कर बचा रहे थे. अब उससे सरेंडर करवा दिया है क्योंकि अब जाँच में शराब पीने की पुष्टि नहीं होगी.''

    जबकि सत्तारूढ़ दल जदयू ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. जदयू प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार कहते हैं, ''अब तक विपक्ष जो अनर्गल आरोप लगा रहा था, वह आज ग़लत साबित हो गया. मुज़फ़्फ़रपुर सड़क हादसे के आरोपी को क़ानून की दबिश के कारण आत्मसमर्पण करना पड़ा. अब विपक्ष को यह बताना चाहिए कि आखिर शव पर राजनीति क्यों?''

    मुज़फ़्फ़रपुर में भाजपा नेता की गाड़ी ने नौ स्कूली छात्रों को रौंदा
    Manish Shandilya/BBC
    मुज़फ़्फ़रपुर में भाजपा नेता की गाड़ी ने नौ स्कूली छात्रों को रौंदा

    उन्होंने आगे कहा, ''क़ानून इस मामले में आगे भी अपना काम करेगी और सरकार इस मामले को न्यायिक प्रक्रिया पूरी कर अंजाम तक पहुंचाएगी. सरकार न किसी को फंसाती है न बचाती है, और न ही किसी अपराधी और गुंडे को राजनीतिक संरक्षण मिलता है.''

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    BBC Hindi
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    English summary
    Bihar Why surrender instead of Manoj Baitas arrest

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