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जब दल टूटता है तो जुड़ जाता है लेकिन...चिराग पासवान को लेकर चाचा पशुपति पारस ने भाजपा को बोली दो टूक

Pashupati Paras on Chirag Paswan: हाजीपुर सांसद और राष्‍ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) प्रमुख पशुपति पारस की उनके भतीजे के बीच की खटास कम होती नजर नहीं आ रही है। केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने मंगलवार को कहा जब दिल टूटता है तो फिर नहीं जुड़ता है...ये बयान देकर उन्‍होंने भतीजे चिराग पासवान को लेकर भाजपा से अपना रुख साफ कर दिया है।

Pashupati Kumar Paras

केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने कहा "भाजपा चाहे तो चिराग पासवान को एनडीए गठबंधन में शामिल कर सकती है, मैंने ये नहीं कहा कि उन्‍होंने (चिराग पासवान) सबके सामने यह कहा (हमारे खून में फर्क है)...हम कभी साथ नहीं आएंगे।"

दल टूटता है तो जुड़ जाता है लेकिन दिल टूटता है तो नहीं जुड़ता

इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री पारस ने कहा कि "जब दल टूटता है तो जुड़ जाता है लेकिन जब दिल टूटता है तो नहीं जुड़ता...।
उन्‍होंने कहा मैंने बीजेपी से कहा कि अगर आप चाहें तो चिराग पासवान को एनडीए गठबंधन में जोड़ सकते हैं लेकिन मैं चिराग पासवान से ना ही दल मिलाऊंगा और ना ही दिल मिलाऊंगा।"

एनडीए गठबंधन में चाचा-भतीजे दोनों हैं

बता दें लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर देश की 26 विपक्षी पार्टियों के इंडिया गठबंधन को टक्‍कर देने के लिए भाजपा के प्रतिनिधित्‍व वाला गठबंधन एनडीए चुनाव से पहले अधिक से अधिक संख्‍या में अपने पुराने और नाराज सहयोगियों को जोड़ने में जुट चुटी है। इन्‍हीं में चिराग पासवान का नाम भी शामिल है।

बैठक में चिराग ने चाचा पशुपति पारस के छुए थे पैर

एनडीए गठबंधन की जुलाई में हुई बैठक में चिराग पासवान भी शामिल हुए थे। याद रहे केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस जो चिराग पासवान के चाचा भी हैं इन दोनों के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहा है। हालांकि एनडीए की बैठक में चाचा पारस को देखते ही उनके पैर छुए थे जिसके बाद माना जा रहा था कि दोनों के बीच की दूरियां कम हो गई हैं, लेकिन पशुपति कुमार पारस के इस बयान से अब उनका रुख साफ हो चुका है।

रामविलास पासवान के बाद ही पार्टी के हो गए थे दो दुकड़े

दोनों के बीच ये विवाद अक्‍टूबर 2020 में पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन के बाद शुरू हुआ था। रामविलास के निधन के बाद चाचा-भतीजे की लड़ाई के कारण उनकी लोक जनशक्ति पार्टी (एनजेपी) दो धड़ों में बट गई। जिसमें रामविलास के बेटे चिराग की अगुवाई वाली पार्टी का नाम एलजेपी (रामविलास) हुआ, वहीं पशुपति पारस के नेतृत्व वाली पार्टी का नाम आरएलजेपी हुआ। ये दोनों ही नेतृत्व वाले दल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्‍सा है।

चाचा-भतीजे में एक ही सीट को लेकर आए आमने-सामने

गौरतलब है कि पशुपति पारस और चिराग पासवान के बीच इस हाजीपुर सीट को लेकर ही झगड़ा है, ये स्‍वर्गीय रामविलास पासवान की पारंपरिक सीट मानी जाती है। 1977 में कांग्रेस को हराकर ये हाजीपुर सीट रामविलास पासवान ने जीती थी तभी से पासवान वो इसी सीट पर चुनाव लड़ते रहे और जीतते आए। वहीं कुछ समय पहले इसी सीट से लोकसभा चुनाव 2024 लड़ने का पशुपति पारस ने दावा किया था वहीं इसके कुछ समय बाद चिराग पासवान ने भी हाजीपुर सीट से चुनाव लड़ने का दावा ठोंक दिया था।

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