Bihar Politics: क्या फिर पाला बदलेंगे मुकेश सहनी, तेजस्वी या राहुल, परिवारवाद पर किसे दिखा रहे आईना?
Bihar News: खुद को 'सन ऑफ मल्लाह' बताने वाले विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने परिवारवाद के खिलाफ ऐसी बात कह दी है, जो इंडिया ब्लॉक या महागठबंधन में उनकी अगुवा सहयोगी पार्टियों के नेताओं को पसंद नहीं आएगी।
वीआईपी चीफ ने पार्टी के एक कार्यक्रम में कहा है कि 'मुझे भाई या भतीजा को विधायक-सांसद नहीं बनाना है।' उनका दावा है कि वीईआईपी का आधार वोटर भले ही निषाद समाज के लोग हों, लेकिन उन्हें सभी जातियों और वर्गों को समर्थन मिलता है और वह भी सभी जातियों को टिकट देते हैं।

परिवारवाद पर मुकेश सहनी किसे दिखा रहे आईना?
सहनी के इस बयान के बहुत बड़े सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। बिहार में आरजेडी महागठबंधन की अगुवा पार्टी है और इसके नेता तेजस्वी यादव के परिवार में विधायक-सांसद भरे पड़े हैं।
इसी तरह से राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस पार्टी इंडिया ब्लॉक की अगुवा है और उसके नेता राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी सांसद हैं और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को केरल की अपनी छोड़ी हुई वायनाड सीट से उम्मीदवार बनाने का ऐलान कर चुके हैं।
जाहिर है कि मुकेश सहनी ने जो कुछ कहा है, उसका अर्थ यही निकाला जा रहा है कि उन्होंने एक बयान से राहुल के साथ-साथ तेजस्वी पर भी निशाना साध दिया है।
वीआईपी के लिए अब किसकी बारी?
जहां तक मुकेश सहनी के लिए पाला बदलने की बात है तो वे अब इसमें माहिर हो चुके हैं। वह भाजपा के साथ भी तालमेल कर चुके हैं और फिर वापस लालू यादव के साथ भी राजनीति करने का हुनर सीख चुके हैं। पिछली बार वे बीजेपी से तब नाराज हो गए थे, जब उनकी पार्टी के सभी चार विधायकों ने 'कमल' पकड़ ली थी।
लेकिन, इस बार स्वतंत्रता दिवस से पहले सहनी ने जिस तरह से माइक्रो ब्लॉगिंग साइट एक्स (ट्विटर) पर अपनी प्रोफाइल में तिरंगा लगाया था, तभी से उनको लेकर राज्य के सियासी गलियारों में अटकलें लगने शुरू हो गईं। क्योंकि, ऐसा करने का आह्वान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद भरोसेमंद और मंत्री अशोक चौधरी ने अचानक सहनी से मुलाकात की थी, तब भी वे सुर्खियों में आ गए थे और राजनीतिक खिचड़ी पकने की अटकलें लग रही थीं।
मुजफ्फरपुर सीट का परिणाम मुकेश सहनी को दे गया टेंशन!
बिहार में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। मुकेश सहनी यह तो दावा करते हैं कि निषाद वोट ही उनकी पार्टी का आधार है। लेकिन, इस बार लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरपुर सीट पर जिस तरह से बीजेपी के डॉक्टर राजभूषण चौधरी निषाद ने कांग्रेस के अजय निषाद को करीब 2.35 लाख वोटों से हराया तो साफ हो गया कि मल्लाह मतदाताओं पर भाजपा की परंपरागत पकड़ खत्म नहीं हुई है।
पीएम मोदी ने डॉक्टर राजभूषण को अपनी सरकार में मंत्री भी बनाया है और मुजफ्फरपुर के इतिहास में ऐसा 28 साल बाद हुआ है। इससे पहले मल्लाह जाति के ही कैप्टन जय नारायण निषाद को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने का मौका मिला था। शायद निषाद जाति पर भाजपा के प्रभाव को देखने के बाद ही मुकेश सहनी की राजनीति की गाड़ी दाहिनी मुड़ती हुई दिखाई पड़ रही है।












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