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नेपाल में अब भी 28 लाख क्यूसेक पानी जमा, कैसे बचाएंगे 4 लाख लोगों को बिहार के 'मांझी'?

bihar kosi flood
पटना। कोसी की कहानी ना जाने कितने बार लिखी गई पर शब्दों में हमेशा 'कोहराम' का ही प्रयोग करना पड़ा, जीवनदायिनी का नहीं। नेपाल में भूस्लखन के बाद कोसी और सीमांचल के सात जिलों पर मंडराये संकट के बादल अब भी बरकरार हैं।

  • सहरसा-सुपौल में तटबंध के अंदर लगभग ढाई लाख लोगों का आश‍ियाना है। अब तक 35 हजार लोगों को ही बाहर निकाला जा सका है। प्रशासन के सामने अब 4 लाख लोगों को बचाने की चुनौती है।
  • सुपौल, सहरसा, दरभंगा और समस्तीपुर में 308 गांव इस भंवर में हैं। इनमें से अब तक लगभग सौ गांव के लोगों को बाहर निकाला जा सका है। जो लोग अंदर फंसे उन्हें भी निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। मधेपुरा के आलमनगर और चौसा में भी अलर्ट जारी है।

    देखें- कोसी की भयावह तस्वीरें

  • मधेपुरा के सभी प्रखंडों में राहत शिविर बनाए गए हैं लेकिन लोग उसमें जाने को तैयार नहीं हैं। सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जिला प्रशासन की ओर से हाई अलर्ट बरकरार है।
  • मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने सुपौल के वीरपुर में कोसी निरीक्षण भवन में जल संसाधन विभाग के अभियंताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा की है। उन्होंने कहा कि अब तक अभी तक 35 हजार लोगों को बाहर निकाला जा सका है।
  • कोसी संकट के मसले पर बिहार सरकार के प्रति भारत सरकार का रुख भी सकारात्मक है। मुख्यमंत्री जीतन राम मांङी, वित्त मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने अधिकारियों के साथ बैठक की तथा संभावित बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए स्प्ष्ट दिशा निर्देश दिए।
  • एनडीआरएफ, मोटर बोट और सरकारी नावों की भी व्यवस्था की गयी है। जल संसाधन विभाग के दीपक कुमार सिंह, चीफ इंजीनियर राजेश कुमार, इंजीनियर धरणीधर प्रसाद, इन्द्रभूषण, फ्लड फाइटिंग के चेयरमैन सहजानंद सिंह आदि ने भी देर रात तक दौरा कर स्थ‍िति को परखा।
  • पानी का दवाब कम हो रहा है तथा नेपाल से पानी धीरे-धीरे आ रहा है। कोसी बराज स्थित कंट्रोल रूम की जानकारी के अनुसार बराह क्षेत्र में एक लाख 19 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज आंका गया है।
  • कोसी बराज की स्थापना 1964 में की गयी थी। जिसकी लंबाई 11.49 मीटर है। सहरसा में भी कोसी तटबंध के अंदर और बाहर चारों ओर अफरा-तफरी है। पूर्वी कोसी तटबंध से बाहर के गांवों के लोगों में इस बात की चिंता है कि जलप्रलय आया तो तटबंध टूटने की स्थिति में कहीं उनका गांव ही आफत की धार में आकर ना बह जाए।
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