नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को इन खूबियों की वजह से चुना अपना वारिस

नई दिल्‍ली। सितंबर में नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड में शामिल होने के बाद अक्‍टूबर में प्रशांत किशोर को बड़ा प्रमोशन मिल गया। वह पार्टी के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष चुने गए, मतलब नीतीश कुमार के बाद आधिकारिक तौर पर नंबर टू नेता। नीतीश कुमार उन्‍हें पार्टी का 'भविष्‍य' बता रहे हैं। आखिर क्‍या है ऐसा प्रशांत किशोर में? क्‍यों नीतीश कुमार ने उन्‍हें बनाया है अपना वारिस। दरअसल, राजनीति में फेस वेल्‍यू यानी चेहरा बड़ा ही महत्‍वपूर्ण होता है। यहां चलन जरा हटके है, राजनीति में छोटे से छोटा कार्यकर्ता भी फेस वेल्‍यू का बड़ा ध्‍यान रखता है। आजादी के बाद से अब तक देश की राजनीति में एक परंपरा रही, पार्टी के बड़े चेहरे ही रणनीति का जिम्‍मा भी संभालते रहे हैं। या यूं कहें कि वे बड़े चेहरे इसलिए रहे, क्‍योंकि वे रणनीति बनाने में सक्षम रहे। 2014 लोकसभा चुनाव में भारतीय राजनीति में एक नया चलन देखने को मिला, एक ऐसा शख्‍स बड़े-बड़े रणनीतिकारों को पानी पिला गया, जिसे कोई जानता भी नहीं था। नाम है- प्रशांत किशोर।

बीजेपी से मिला दर्द प्रशांत किशोर को ले गया नीतीश के दरवाजे तक

बीजेपी से मिला दर्द प्रशांत किशोर को ले गया नीतीश के दरवाजे तक

ब्रैंड मोदी के क्रिएटर/रचनाकार प्रशांत किशोर यूं तो रणनीतिकार के तौर पर राजनीति में आए, लेकिन कमबख्‍त सियासत है ही कुछ ऐसी, प्रशांत किशोर भी फेस वेल्‍यू के फेर में पड़ गए। 2014 लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी देश की सियासत का सबसे बड़ा चेहरा बने, जिसका श्रेय उनके नायब अमित शाह को मिला और जो प्रशांत किशोर पर्दे के पीछे थे वह पर्दे के पीछे ही रह गए। एक रणनीतिकार ने राजनीति की इस अनिवार्यता को समझा- जो चेहरा नहीं बना वो कुछ नहीं बना। बस, यही चोट प्रशांत किशोर को नीतीश कुमार के दरवाजे तक ले गई। प्रशांत किशोर ने बिहार में महागठबंधन खड़ा किया, जिसके बाद वह देश के सबसे बड़े चुनावी रणनीतिकार के तौर पर मतलब बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह के समकक्ष खुद को खड़ा करने में कामयाब रहे।

नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले पहचानी प्रशांत किशोर की प्रतिभा और 2010 में कॉफी पर बुलाया

नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले पहचानी प्रशांत किशोर की प्रतिभा और 2010 में कॉफी पर बुलाया

साल 2010 में प्रशांत किशोर का राजनीति से दूर-दूर लेना-देना नहीं था। वह पब्लिक हेल्‍थ एक्टिविस्‍ट थे और पश्चिम अफ्रीकी देश चाड में संयुक्‍त राष्‍ट्र सहायता मिशन को हेड कर रहे थे। इस दौरान प्रशांत किशोर ने एक डॉक्‍यूमेंट तैयार किया, जिसका विषय था आर्थिक समृद्धि और कुपोषण। यह डॉक्‍यूमेंट तत्‍कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास भेजा गया। गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर में जब वह डॉक्‍यूमेंट आया तो वह बेहद प्रभावित हुए और प्रशांत किशोर को कॉफी का न्‍योता भेज दिया। यह मुलाकात खत्‍म होने के बाद प्रशांत किशोर मोदी की टीम में थे। प्रशांत किशोर को सीएम मोदी ने जो पहला प्रोजेक्‍ट दिया, वह गुजरात के लिए हेल्‍थ पॉलिसी तैयार करने का था। गुजरात विधानसभा चुनाव 2012 में उन्‍होंने मोदी के लिए रणनीतिकार की भूमिका निभाई, जिसका बीजेपी को काफी लाभ मिला।

प्रशांत किशोर के 'सुपर आइडिया' से चुनावी पिच पर मोदी ने की धुआंधार बल्‍लेबाजी

प्रशांत किशोर के 'सुपर आइडिया' से चुनावी पिच पर मोदी ने की धुआंधार बल्‍लेबाजी

2012 गुजरात विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद ही नरेंद्र मोदी बीजेपी के पीएम कैंडिडेट के तौर पर चुन लिए गए। 2012 गुजरात चुनाव के प्रयोगों के बाद प्रशांत किशोर ने 2014 लोकसभा चुनावों में मोदी के लिए नए-नए सफलता के मंत्र दिए। मोदी की लोकप्रिय 3डी रैलियां, चाय पे चर्चा, मोदी सेल्‍फी समेत कई ऐसी चीजें प्रशांत किशोर ने चुनावी कैंपेन में शामिल कीं, जिन्‍हें भारतीय राजनीति में पहले न किसी ने देखा और न सुना।
कई नए नारे भी प्रशांत की टीम ने गढ़े जो 2014 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान बच्‍चे-बच्‍चे की जुबां पर चढ़ गए। इतना सब करने के बाद भी प्रशांत किशोर को क्रेडिट नहीं मिला। गुजरात और 2014 लोकसभा चुनाव चेहरे पर लड़े गए थे। यहां जाति-धर्म नहीं था, केवल विकास की बात थी, ऐसा इसलिए किया गया, क्‍योंकि मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने से जाति के बंधन टूट गए, जो कि बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती थी। प्रशांत किशोर का प्रयोग कामयाब रहा, लेकिन जब उन्‍होंने नीतीश कुमार का थामन थामा तब उन्‍होंने इस रणनीति को नहीं अपनाया।

बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत ने दिखाया माइक्रो पोल मैनेजमेंट

बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत ने दिखाया माइक्रो पोल मैनेजमेंट

प्रशांत किशोर की सबसे बड़ी ताकत है, माइक्रो पोल मैनेजमेंट। वह मुद्दों की बेहतर समझ के साथ शानदार कैंपेन चलाने में माहिर हैं। बिहार के बक्‍सर में पैदा हुए प्रशांत किशोर जाति का गणित सबसे बेहतर समझते हैं। इसी गणित का कैल्‍कुलेशन कर प्रशांत किशोर ने कांग्रेस-जेडीयू-आरजेडी के महागठबंधन को विजयी रथ पर सवार नरेंद्र मोदी के सामने खड़ा कर दिया। नतीजा यह हुआ बीजेपी का अश्‍वमेघ रथ बिहार में रुक गया और अमित शाह को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा।

प्रशांत किशोर इस तरह करते हैं पोल मैनेजमेंट

प्रशांत किशोर इस तरह करते हैं पोल मैनेजमेंट

प्रशांत किशोर उन राजनीतिक रणनीतिकारों की तरह काम नहीं करते थे, जो हर विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र में जाति देखकर प्रत्‍याशी उतार देते हैं। प्रशांत किशोर बूथ लेवल कमेटियां बनाकर जमीनी सच के पास तक जाते हैं। वह जातिगत समीकरणों के आधार पर चुनावी कैंपेन और घोषणाओं पर बल देते हैं। चुनाव जिस नेता के नेतृत्‍व में लड़ा जाता है, उसकी निजी छवि पर आधुनिक तरीकों से काम करते हैं। छवि निर्माण में प्रशांत किशोर को महारत हासिल है। बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में महागठबंधन के पास मोदी को चुनौती देने के लिए कोई खास हथियार नहीं था, लेकिन प्रशांत किशोर ने बड़ी होशियारी से नरेंद्र मोदी और अमित शाह को बाहरी साबित कर दिया। बिहारी के नाम पर महागठबंधन के दलों को अपने-अपने जातिगत वोट बैंक का मत प्राप्‍त हुआ। अगर मोदी के नाम पर वोट पड़ता तो एकमुश्‍त पड़ता, जैसा कि अन्‍य राज्‍यों में हुआ भी, लेकिन बिहार में मोदी बाहरी साबित हुए और बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा।

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