Bihar News: बिहार में मातृ-शिशु स्वास्थ्य में क्रांतिकारी सुधार, टीकाकरण और संस्थागत प्रसव ने बनाए नए रिकॉर्ड
बिहार में स्वास्थ्य सेवा में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिसमें संस्थागत प्रसव दर 76.2% तक बढ़ गई है और टीकाकरण कवरेज 90% तक पहुंच गया है, जिससे माताओं और बच्चों के लिए सुरक्षित परिणाम सुनिश्चित होते हैं।
बिहार में स्वास्थ्य क्षेत्र की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। जहां एक समय मातृ और शिशु मृत्यु दर गंभीर चिंता का विषय था, वहीं अब राज्य संस्थागत प्रसव और सम्पूर्ण टीकाकरण जैसे क्षेत्रों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। यह बदलाव कोई एक दिन में नहीं हुआ, बल्कि यह पिछले दो दशकों में लगातार किए गए सुधारों, नीतियों और ज़मीनी कार्यों का परिणाम है।

संस्थागत प्रसव में क्रांतिकारी वृद्धि बिहार में साल 2005 तक राज्य में मात्र 19.9 फीसद महिलाएं संस्थागत प्रसव (अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव) का विकल्प चुनती थीं। इसका मतलब था कि अधिकांश महिलाएं अब भी घर पर प्रसव कराती थीं। इससे जच्चा-बच्चा दोनों की जान को खतरा बना रहता था। लेकिन सरकार की ओर जागरूकता अभियानों, जननी सुरक्षा योजना, एम्बुलेंस सेवा, मुफ्त दवाओं और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता जैसी पहलों ने बिहार की नई तस्वीर गढ़ी है। वर्ष 2019-20 तक यह आंकड़ा बढ़कर 76.2 फीसद तक पहुंच गया है। जो इस बात का प्रमाण है कि अब महिलाएं सुरक्षित प्रसव की ओर बढ़ रही हैं।
संपूर्ण टीकाकरण अभियान स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि रही है। साल 2002 में जहां केवल 18 फीसद बच्चों को सम्पूर्ण टीकाकरण मिला था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा 90 फीसद तक पहुंच गया है। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों बच्चों के जीवन की सुरक्षा का प्रमाण है। मिशन इंद्रधनुष, नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर, आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सक्रियता इस कामयाबी की रीढ़ बनी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यभार संभालने के बाद राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। चाहे बात नए अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के निर्माण की जाए या नर्सों और डॉक्टरों की नियुक्ति की। टेलीमेडिसिन और आधुनिक जांच सुविधा की जैसे हर स्तर पर बदलाव लाया गया। अब बिहार के हर गांवों तक स्वास्थ्य सेवा पहुंची है। जिसका नतीजा है आज गरीब से गरीब व्यक्ति इलाज के अधिकार का उपयोग कर पा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धियां
(ग्राफिक के लिए) संस्थागत प्रसव : 2005 : 19.9 फीसद 2019-20 : 76.2 फीसद सम्पूर्ण टीकाकरण: 2002 : 18 फीसद 2024 : 90 फीसद हेल्थ सब-सेंटर और PHC की संख्या में वृद्धि महिला स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या में इज़ाफा मातृत्व सहायता योजनाओं का लाभ लाखों को बच्चों और महिलाओं को मिला जीवन का अधिकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह बदलाव न केवल आंकड़ों की कहानी है, बल्कि यह हर उस मां और बच्चे की जीत है, जिनके जीवन में सुरक्षा और सम्मान अधिकार सुनिश्चित हुआ। बिहार आज सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ बचपन की दिशा में पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन चुका है।
पटना हवाईअड्डा पर एटीएफ की खपत भी 134 प्रतिशत बढ़ी - एटीएफ पर लगने वाली वैट की दर को 29 से घटाकर 4 प्रतिशत करने के फैसला का हुआ व्यापक असर पटना, 06 जुलाई। पटना में मौजूद जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नए कलेवर के साथ भव्य स्वरूप में तैयार हो गया है। जब यहां के एयरपोर्ट का पुराना टर्मिनल भवन था, तो रोजाना 80 के करीब हवाई जहाजों की आवाजाही दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी, लखनऊ समेत अन्य प्रमुख शहरों के लिए होती थी। अब नए टर्मिनल भवन तैयार होने के बाद रोजाना आने-जाने वाले हवाई जहाजों की संख्या 100 से अधिक हो गई है।
राज्य सरकार ने विमान परिचालन को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष जून में एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने इस फैसले पर अपनी मुहर लगाई थी। इसके तहत वायुयानों में भरे जाने वाले एटीएफ (एयर टर्बाइन फ्यूल) पर लगने वाले वैट (वैल्यू एडड टैक्स) की दर में ऐतिहासिक कटौती करते हुए 29 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर दी गई। इसका असर भी व्यापक स्तर पर दिखने लगा है। पिछले वर्ष की तुलना में यहां एटीएफ की बिक्री में 134 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
वाणिज्य कर विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार जब एटीएफ पर वैट की दर 29 प्रतिशत थी, तब मई 2024 में पटना एयरपोर्ट से विमानन कंपनियों ने 2318.20 किलोलीटर एटीएफ की खरीद की थी। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष मई में इसमें महज 44 फीसदी की सामान्य बढ़ोतरी दर्ज की गई और इसकी बिक्री का आंकड़ा 3337.98 किलो लीटर तक पहुंचा। वहीं, एटीएफ पर वैट की दर 4 प्रतिशत करने के बाद के आंकड़े देखें, तो पाएंगे कि जून 2024 में एटीएफ की बिक्री 2526.41 किलोलीटर हुई थी। नई दर लागू होते ही एटीएफ की बिक्री में 134 फीसदी की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह 5920.38 किलोलीटर पर पहुंच गया है। आने वाले समय में इसमें अधिक बढ़ोतरी होने की संभावना है।
गौरतलब है कि पटना का जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के नए अत्याधुनिक टर्मिनल भवन का उद्घाटन विगत 30 मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया। 1,200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह टर्मिनल 65,150 वर्ग मीटर में फैला है और सालाना एक करोड़ यात्रियों की क्षमता रखता हैं। इसके साथ ही हवाई जहाजों के परिचालन की संख्या में कई गुणा की बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके साथ ही हवाई जहाजों के परिचालन की संख्या में भी काफी इजाफा होगा। एटीएफ की दर में कटौती इसमें सबसे बड़ा प्रोत्साहन होगा。












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