बिहार सरकार ने केंद्र के फैसले पर उठाए सवाल, पूछा- गया में जब 1 मामला तो रेड जोन में कैसे?
नई दिल्ली। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जिलों को जोन में बांटने को लेकर कांग्रेस शासित राज्यों के बाद बिहार सरकार ने सवाल खड़े किए हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बुधवार को बताया कि, बिहार सरकार ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से पूछा है कि 'गया' जिलो को रेड ज़ोन के रूप में कैसे वर्गीकृत किया जा सकता है जबकि वहां कोरोना वायरस का केवल एक एक्टिव मामला सामने आया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बिहार के 38 जिलों को तीन जोन में बांटा है। राजधानी पटना सहित बिहार के 5 जिले रेड जोन में हैं। 20 जिले ऑरेंज और 13 जिलों को ग्रीन जोन में रखा गया है। मुंगेर, पटना, रोहतास, बक्सर और गया को रेड जोन में शामिल किया गया है। बिहार के 54 प्रतिशत मरीज रेड जोन में हैं। इसमें सबसे ज्यादा मरीज मुंगेर के हैं। लेकिन अब खुद बिहार सरकार ने केंद्र सरकार के फैसले पर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।
ऑरेंज जोन में नालंदा, कैमूर, सीवान, गोपालगंज, भोजपुर, बेगूसराय, औरंगाबाद, मधुबनी, पूर्वी चंपारण, भागलपुर, अरवल, सारण, नवादा, लखीसराय, बांका, वैशाली, दरभंगा, जहानाबाद, मधेपुरा और पूर्णिया ऑरेंज जोन में शामिल हैं। नालंदा में 35 केस सामने आए और इसमें 12 लोग स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। बिहार के 13 जिले ग्रीन जोन में शामिल किये गए हैं। इनमें शेखपुरा, अररिया, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, जमुई, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, मुजफ्फरपुर, सहरसा, समस्तीपुर, शिवहर, सुपौल शामिल हैं।
बिहार में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक अब कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या 537 हो गई है तो वहीं राज्य में अबतक 160 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं और चार मरीजों की इस वायरस से संक्रमित होने के बाद मौत हो चुकी है। बिहार में सोमवार को 11 कोरोना के नए मामले मिले थे, जिसमें पहली बार समस्तीपुर में भी कोरोना संक्रमित मरीज मिला है। इस तरह अबतक प्रदेश में 32 जिलों में कोरोना फैल चुका है।












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