बिहार चुनाव में इस बार नहीं था कोई मोदी फैक्टर: दीपांकर भट्टाचार्य
बिहार के महागठबंधन में वामपंथी दलों को 20 सीटें चुनाव लड़ने के लिए दी गईं थी और अभी तक ज्यादातर सीटों पर वाम दल बढ़त बनाए हुए हैं।
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव में फिलहाल मतगणना जारी है और देर रात तक फाइनल नतीजे आ सकते हैं। इस बार बिहार चुनाव में जहां भाजपा प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी बनती हुई नजर आ रही है, वहीं वामपंथी पार्टियां भी काफी मजबूत बनकर उभरी हैं। बिहार के महागठबंधन में वामपंथी दलों को 20 सीटें चुनाव लड़ने के लिए दी गईं थी और अभी तक ज्यादातर सीटों पर वाम दल बढ़त बनाए हुए हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस बिहार की 70 सीटों पर चुनाव लड़ी और फिलहाल 20 सीटों पर ही उसकी बढ़त है। ऐसे में सियासी जानकारों का मानना है कि महागठबंधन के पिछड़ने का एक बड़ा कारण कांग्रेस को ज्यादा सीटें देना रहा। इस बीच बिहार चुनाव को लेकर सीपीआई (एमएल) के नेता दीपांकर भट्टाचार्य का बड़ा बयान सामने आया है।

बिहार चुनाव के नतीजों के बीच दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा, 'इस बारे के चुनाव में एक बहुत ही प्रेरणा देने वाली सियासी लड़ाई थी। ऐसा लग रहा था कि यह चुनाव युवाओं और मजदूरों के वर्चस्व और बदलाव के लिए है। भले ही अभी फाइनल रिजल्ट ना आया हो, लेकिन मैं कह सकता हूं कि बिहार के लोगों ने चुनावी एजेंडे को एक शानदार आकार देकर एक महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। मेरा यह भी मानना है कि महागठबंधन में वामपंथी दलों को और ज्यादा बेहतर प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए था। लेकिन, फिलहाल हम ये समीक्षा चुनाव के बाद करेंगे।'
वहीं, बिहार चुनाव में मोदी फैक्टर को लेकर दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी के सांप्रदायिक एजेंडे के अलावा बिहार चुनाव में कोई मोदी फैक्टर नहीं था, जिसका कुछ असर दूसरे और तीसरे चरण के चुनाव में पड़ता हुआ नजर आया। एक बात काफी स्पष्ट है अगर बिहार के लोगों में नीतीश कुमार को लेकर नाराजगी थी और भाजपा भी इसके लिए बराबर की दोषी है। भाजपा और जेडीयू ना केवल बिहार में, बल्कि केंद्र में भी सहयोगी हैं। लॉकडाउन के दौरान दोनों ही सरकारों ने बिहार के लोगों की कोई मदद नहीं की और उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया।'












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