अब 'दंडवत' होने से क्या होता है नीतीश बाबू, आपने तो सहयोगियों को भी बेचैन कर दिया है!
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी 'ओछी' टिप्पणियों की वजह से विपक्ष के निशाने पर हैं। बीजेपी की अगुवाई वाला एनडीए उन्हें जमकर धो रहा है। लेकिन, अब उनके बयानों की वजह से इंडिया ब्लॉक में सहयोगी दलों के भी पैरों के नीचे से जमीन खिसकने का एहसास होना शुरू हो चुका है।
बिहार में नीतीश कुमार की सरकार की सहयोगी पार्टियां उनके बयानों से दूरी बनाने लगे हैं। यहां तक कि लिखकर भी उनके बयानों से असहमति जताई गई है। पहले उन्होंने कार्यस्थल पर महिलाओं की मौजूदगी में 'अश्लील टिप्पणियां' कीं और फिर एक महादलित पूर्व मुख्यमंत्री को भरे सदन में 'अपमानित' करने का काम किया।

चौतरफा दबाव में आ चुके हैं नीतीश कुमार!
इन सब वजहों से जेडीयू नेता कितने दबाव में हैं, उसका असर मंगलवार को पटना में एक कार्यक्रम के दौरान नजर आया। मीडिया वाले उनसे बात करना चाह रहे थे। लेकिन, वे 'दंडवत' करके निकल लिए। शायद उन्हें यह पता हो कि अभी उनके पास पत्रकारों के सवालों का पुख्ता जवाब नहीं हो!
शायद नीतीश को पहले अंदाजा नहीं था कि वह जो कुछ कह रहे हैं, वह उनकी सरकार में शामिल या समर्थन दे रही पार्टियों को भी खटक सकता है। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने उनके 'सेक्स ज्ञान' पर भले ही उन्हें बचाने की कोशिश की थी। लेकिन, उनकी मां और पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने भी उनके बयान का सीधा समर्थन नहीं किया। सिर्फ यह कहा कि शायद उनके मुंह से निकल गया होगा।
महादलित नेता पर 'अपमानजनक' टिप्पणी करके बुरी तरह घिर गए नीतीश
इसके बाद नीतीश ने एक और बड़ी गलती कर दी। उन्होंने महादलित मुसहर समुदाय से आने वाले पूर्व सीएम जीतन राम मांझी को भी नहीं छोड़ा। बिहार के सीएम को यह अंदाजा ही नहीं रहा कि वह उनसे अपने आवास पर नहीं, सदन में बात कर रहे हैं। यह दोनों मुद्दा अब बुरी तरह से उनके खिलाफ बैकफायर कर गया है।
बीजेपी से तो इन दोनों मुद्दों को सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी रैलियों में उठाया है। क्योंकि, उन्हें पता है कि इन मामलों में नीतीश का बचाव करना इंडिया ब्लॉक पर बहुत ही भारी भी पड़ सकता है। यही वजह है कि बीजेपी की अगुवाई वाला एनडीए बिहार में सत्ताधारी गठबंधन खासकर जेडीयू के खिलाफ बहुत ही आक्रामक हो चुका है।
कांग्रेस के अंदर भी तूफान मचे होने की आहट
जेडीयू के सहयोगियों को अंदाजा है कि महिला और दलित वोटरों के लिए यह मामला बिहार में ही नहीं, पूरे देश में कितना संवेदनशील है। फिलहाल इनकी कोशिश है कि नीतीश ने जो विवाद खड़ा किया है, उसका असर दूसरे राज्यों तक न पहुंचे। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस मामले में जिस तरह से भयंकर चुप्पी साधे हुए है, उससे पार्टी के भीतर मचे तूफान का अनुमान लगाया जा सकता है।
नेताओं को अपनी भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना होगा-बिहार कांग्रेस अध्यक्ष
क्योंकि, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने ईटी से बातचीत में बताया है, 'लोकतंत्र समाज की परंपरा और संस्कृति का मान-सम्मान करके काम करता है....इसलिए, चाहे मुख्यमंत्री हों या विपक्षी नेता, नेताओं को अपनी भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना होगा।'
सीएम को इस तरह की भाषा की इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था- सीपीआई (एमएल)
बिहार में जेडीयू की एक और सहयोगी है सीपीआई (एमएल)। इसके महासचिव दिपांकर भट्टाचार्य ने कहा है, 'जीतनराम मांझी बिहार के एक बहुत वरिष्ठ राजनेता हैं और मुख्यमंत्री को पूर्व सीएम (मांझी) के लिए इस तरह की भाषा की इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था।'
नीतीश के 'सेक्स ज्ञान' पर घोर आपत्ति जता चुकी है सीपीआई (एमएल)
इससे पहले पिछले हफ्ते ही सीपीआई (एमएल) की चार वरिष्ठ महिला नेताओं ने पार्टी की महिला यूनिट ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वीमेंस एसोसिएशन की ओर चिट्ठी लिखकर उनके 'सेक्स ज्ञान' वाली टिप्पणी पर घोर आपत्ति जताई थी।
'आपके बयान की भाषा अत्यंत ही आपत्तिजनक थी'
पार्टी की नेताओं भारती कुमार, मीना तिवारी, शशि यादव और सोहिला गुप्ता ने संयुक्त रूप से लिखा था, 'कल बिहार विधानसभा में पेश किए गए ऐतिहासिक सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के दौरान दिए गए आपके बयान की भाषा अत्यंत ही आपत्तिजनक थी....हालांकि बाद में आपने इसके लिए माफी भी मांग ली थी, लेकिन आपके बयान ने बहस की दिशा ही बदल दी....आपके बयान ने पूरे मामले की गंभीरता को ही खत्म कर दिया है......'
'कार्यस्थल पर उत्पीड़न का मामला था'
इतना ही नहीं वामपंथी पार्टी की इन महिला नेताओं ने आगे यहां तक लिखा कि 'आपके बयान से जहां सदन के अंदर महिला विधायकों के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई थी, वहीं कुछ पुरुष विधायक हंस रहे थे.....इससे पता चलता है कि हमारी संवैधानिक संस्थाएं आज भी किस तरह महिला विरोधी मानसिकता की गिरफ्त में हैं.....साथ ही यह महिला विधायकों के लिए कार्यस्थल पर उत्पीड़न भी था.....'
उधर जीतनराम मांझी इस मुद्दे पर नीतीश को अब चैन लेने देने के मूड में नहीं हैं। पटना में अंबेडकर प्रतिमा के सामने नीतीश कुमार की ओर से अपने 'अपमान' के खिलाफ मौन व्रत पर बैठने का उनका फैसला, 2024 के लोकसभा चुनाव और मौजूदा विधानसभा चुनावों में भी इंडिया ब्लॉक की चुनावी टीस को और बढ़ा सकता है।












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