जानिए बिहार संकट पर क्या बोले लालू यादव की बायोग्राफी के लेखक
पटना। बिहार में सत्ता के गलियारे में कबड्डी का खेल जारी है, एक तरफ नीतीश कुमार, अपने दोस्त लालू प्रसाद यादव का हाथ पकड़कर खड़े हैं, तो दूसरी ओर जीतन राम मांझी दंड बैठक लगा रहे हैं, ताकि भाजपा को उनकी ताकत का अंदाजा हो जाये। खैर बिहार की कमान किसके पास रहने वाली है, यह शाम तक पता चल जायेगा, लेकिन लालू यादव की बायोग्राफी के लेखक ने जो कहा है, वो वाकई में मजेदार है।

लालू यादव की बायोग्राफी लिखने वाले संकरशन ठाकुर से बिहार संकट पर हमने खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि इस वक्त जो कुछ भी चल रहा है वो सत्ता के लिये संघर्ष है। वैसे इसे आने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़ कर भी देख सकते हैं, क्योंकि नतीश और लालू अपना शक्ति प्रदर्शन कराना चाहते हैं, जिसका प्रभाव आने वाले चुनाव पर जरूर पड़ेगा।
विधायकों की खरीदफरोख्त
सिंगल मैन: दि लाइफ एंड टाइम्स ऑफ नीतीश कुमार ऑफ बिहार के लेखक संकरशन ने कहा कि भाजपा के इशारे पर जीतन राम मांझी ने ऐसी परिस्थितियां पैदा कर दी हैं, कि विधायकों की खरीदफरोख्त शुरू हो सके।
बिहार मे जो कुछ भी हो रहा है उसका असर आगे क्या पड़ेगा? यह पूछे जाने पर संकरशन ने कहा कि जिस वक्त मांझी को मुख्यमंत्री बनाया गया था, उसी वक्त यह साफ कर दिया गया था कि अगला चुनाव नीतीश की नेतृत्व में लड़ा जायेगा। नीतीश वैसे तो चुनावी तैयारियों में लगे थे, लेकिन जब उन्होंने देखा कि मांझी की सरकार खिसक रही है, तब उन्हें चिंता हुई। उसी वक्त मांझी के विवादास्पद बयानों ने आग में घी डालने का काम कर दिया। यही कारण है कि अब जदयू के सभी सदस्यों को लगता है कि नीतीश ज्यादा उपयुक्त व्यक्ति हैं।
क्या इससे भाजपा को कोई फायदा पहुंचेगा?
बिहार को करीब से देखने वाले संकरशन का कहना है कि इससे भाजपा को निश्चित तौर पर फायदा पहुंचेगा। इस संकट का भाजपा पूरा लाभ उठाना चाहेगी। साथ ही यह कोशिश करेगी की जेडीयू में और फूट डाली जा सके। माझी एक महादलित नेता हैं, ऐसे में भाजपा उनके महादलित होने का पूरा फायदा उठाना चाहती है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगा का इस परिणाम क्या होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा।
बिहार में अब आगे की क्या रणनीति होगी?
बिहार की राजनीति की चाभी इस समय यहां के राज्यपाल के हाथ में हैं। माझी की कोशिश होगी की इस प्रक्रिया को जितना हो सके विलंब कराया जाए। माझी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है और उन्होंने राज्यपाल से बहुमत सिद्ध करने का समय भी मांगा है। इन सारी प्रक्रियाओं में थोड़ा समय लग सकता है लेकिन देखने वाली बात होगी कि कितना लंबा समय लेता है ये सब।












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