Bihar News: मांझी पर 'मिसफायर' कर गए नीतीश कुमार, कैसे मंझधार में फंसा ली अपनी नाव?

बिहार की राजनीति में पिछले दो-तीन दिनों से जो कुछ भी हुआ है, वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सियासी सेहत के लिए सही नहीं कहा जा सकता। नीतीश कुमार ने जिस तरह से 26 विपक्षी दलों को मोदी सरकार के खिलाफ गोलबं करने में बड़ी भूमिका निभाई थी, उनका वह राजनीतिक कद चंद दिनों में ही रेत की तरह हाथ से निकलता महसूस हो रहा है।

पहले उन्होंने विधानसभा और विधान परिषद के भीतर महिला सदस्यों की मौजूदगी में 'सेक्स एक्सपर्ट' का जीवंत रोल अदा किया। दुनिया भर में जिसने भी नीतीश का वह अंदाज देखा, उसे पहली बार में समझ में ही नहीं आया कि वह ऐसा क्यों कर रहे हैं। उन्होंने अपनी गलती के लिए माफी तो मांग ली है, लेकिन उसी दिन एक महादलित समुदाय के पूर्व मुख्यमंत्री के साथ जिस तरह से 'तुम-तड़ाम' किया, उससे आशंका पैदा हुई कि कुछ न कुछ तो गड़बड़ जरूर है!

jitan ram manjhi nitish kumar

खुद से बुजुर्ग और वरिष्ठ नेता से तुम-तड़ाम करते हैं नीतीश!
जीतन राम मांझी भले ही नीतीश की कृपा से कुछ समय के लिए सीएम बने हों, लेकिन राजनीति और उम्र दोनों में ही वह उनसे काफी सीनियर हैं। नीतीश खुद को इंजीनियर बताते हैं, लेकिन अपने से बुजुर्ग और वरिष्ठ के लिए उन्होंने जिस भाषा का इस्तेमाल किया, उससे यह भी आशंका पैदा हुई कि दलितों के उत्थान की जो बात वे करते हैं, क्या वाकई वे उसके प्रति गंभीर भी हैं?

महादलित नहीं होते मांझी तो भी ऐसे ही बात कर पाते नीतीश?
नीतीश शायद यह भूल गए कि मुसहर-भुइंया जैसे दलित समाज के नेता के लिए वह विधानसभा के भीतर जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे उनकी सोच और उनका राजनीतिक चरित्र दुनिया के सामने बेनकाब हो रहा है। मांझी की पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (HAM) अभी एनडीए का हिस्सा है, जिसने सीएम नीतीश की राजनीतिक गलती को लपक लिया है।

मांझी ने तो सवाल ही पूछे थे, सीएम को मिर्ची क्यों लग गई?
सवाल ये है कि मांझी पर नीतीश को इतना गुस्सा क्यों आ गया? वह यही तो पूछना चाह रहे थे कि उनकी मुसहर-भुइंया जाति के 45-46% लोगों को बिहार सरकार की जातिगत जनगणना में अमीर कैसे बता दिया गया है। रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही उन्होंने सरकार को चुनौती दी थी कि अगर भुइयां-मुसहर समाज में 1% से ज्यादा लोग अमीर मिले तो वे राजनीति छोड़ देंगे। लेकिन, उनके मुताबिक न तो सदन में उन्हें पूरी बात रखने का मौका दिया गया और ऊपर से उनको 'अपमानित' किया गया।

नीतीश के गुस्से को संयम से जवाब दे रहे हैं 'भोले-भाले' मांझी
हालांकि, फिलहाल नीतीश के मुकाबले मांझी बहुत ही संयम भरे लहजे में अपनी बात रख रहे हैं। लेकिन, उनकी बातों से लग रहा है कि सीएम ने उन्हें बहुत बड़ा मौका दे दिया है। इसलिए वह नीतीश से नाराजगी जताने के बजाए उनकी स्थिति पर सहानुभूति ही जाहिर कर रहे हैं और पर्दे के पीछे किसी और की साजिश की ओर इशारा भी कर रहे हैं।

मांझी ने साजिश के तहत नीतीश को जहरीली चीज खिलाने का लगाया आरोप
मुख्यमंत्री की मौजूदा स्थिति को लेकर उन्होंने एक सनसनीखेज दावा ये किया है कि 'कोई जल्दी मुख्यमंत्री बनना चाहता है', इसलिए साजिश के तहत नीतीश को जहरीली चीज खिलाई जा रही है। सीएम की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने को लेकर वह तीन दावे कर रहे हैं।

नीतीश के 'असंतुलन' को लेकर मांझी के तीन दावे
उनके मुताबिक नीतीश ने पहले अपने मंत्री अशोक चौधरी के मृत पिता महावीर चौधरी की तस्वीर की जगह उन्हीं पर माल्यार्पण कर दिया। इसी तरह से महिलाओं की मौजूदगी में जो 'सेक्स ज्ञान' दिया उसपर आज देश ही नहीं बल्कि दूसरे देश भी 'थू-थू' कर रहे हैं। तीसरे में उन्होंने अपना जिक्र किया, जिनसे सदन में उन्होंने बहुत ही 'अभद्र' लहजे में उनसे बात की। मांझी सिर्फ नीतीश पर ही नहीं अपने साथ हुई घटना के लिए विधानसभा स्पीकर अवध बिहारी चौधरी को भी दोषी मान रहे हैं, जिन्होंने उनके मुताबिक नियमों का पालन नहीं किया।

नीतीश ने कैसे मंझधार में फंसा ली अपनी नाव?
भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाला एनडीए इस मामले पर राजनीतिक लड़ाई लड़ने का मन बना चुका है। वह सीएम को जहर देने की साजिश के आरोपों की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहा है। एनडीए ने महागठबंधन सरकार को महिला-विरोधी, दलित-विरोधी और अति-पिछड़ा-विरोधी होने का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। जल्द ही राज्यपाल और राष्ट्रपति से मिलने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

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