Bihar News: मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना से 3 वर्षों में 10 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ
बिहार मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना ने 2022-23 से 10 लाख से अधिक बेटियों को लाभान्वित किया है, जन्म के समय और जन्म के बाद पंजीकरण पर डीबीटी नकद हस्तांतरण के माध्यम से। 2025-26 की शुरुआत में पंजीकरण बढ़कर 1.10 लाख हो गया, जो बेटियों के जन्म पंजीकरण, शिक्षा और वित्तीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के चल रहे प्रयासों को दर्शाता है।
बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना (एमकेयूवाई) के तहत पिछले तीन वर्षों में 10 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभान्वित किया गया है। योजना के माध्यम से बालिकाओं के जन्म, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान कुल 12 लाख 53 हजार 831 बालिकाओं का पंजीकरण हुआ, जिनमें से 10 लाख 35 हजार 770 लाभार्थियों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में तकनीकी कारणों से पंजीकरण प्रक्रिया जनवरी के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई। अब तक 1 लाख 10 हजार 367 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, पंजीकरण प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और जल्द ही अधिक बालिकाओं को लाभ प्रदान किया जाएगा।
वर्षवार लाभार्थियों का आंकड़ा
समाज कल्याण विभाग के अनुसार,*वर्ष 2022-23 में 3 लाख 46 हजार 658 बालिकाओं को लाभ मिला*वर्ष 2023-24 में 3 लाख 52 हजार 413 लाभार्थी लाभान्वित हुए*वर्ष 2024-25 में 3 लाख 36 हजार 699 बालिकाओं को योजना का लाभ दिया गया
जन्म से ही मिलती है आर्थिक सहायता
योजना के तहत नवजात कन्या के जन्म के पहले वर्ष में 2 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती है। वहीं, एक वर्ष पूरा होने पर जन्म पंजीकरण और आधार पंजीकरण के बाद 1 हजार रुपये अतिरिक्त दिए जाते हैं। यह राशि सीधे माता-पिता या अभिभावकों के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जाती है।
बेटियों के भविष्य को मिल रही मजबूती
3 अगस्त 2018 को शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना, जन्म पंजीकरण को बढ़ावा देना और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त करना है। मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना बालिकाओं के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा और आत्मनिर्भरता तक आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है। यह पहल समाज में सकारात्मक संदेश भी दे रही है कि बेटियां परिवार और समाज की शक्ति हैं। बिहार सरकार की यह योजना राज्य में लिंग अनुपात सुधारने, बालिकाओं की शिक्षा दर बढ़ाने और सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।












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