Bihar election 2020: महागठबंधन में लगभग सेट हो चुका है सीटों का फॉर्मूला

नई दिल्ली- बिहार में सत्ताधारी एनडीए गठबंधन में अभी भी लोजपा नेता चिराग पासवान के तेवरों के चलते मामला उलझा हुआ लग रहा है। लेकिन, विपक्षी महागठबंध में मामला लगभग फिट हो चुका है। सिर्फ एक पार्टी को महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ाने की कोशिशें अभी भी चल रही हैं और हो सकता है कि उसमें भी जल्दी कोई बात बन जाए, क्योंकि एनडीए विरोधी विपक्ष का यह मजबूत खेमा एकजुट होकर चुनाव लड़ने का मूड बना चुका है। महागठबंधन में पहले से शामिल दलों में सीटों के तालमेल पर बातचीच लगभग फाइनल हो चुकी है और नए सहयोगियों को सीटों पर संतुष्ट करने के साथ ही इस बारे में जल्द ही कोई औपचारिक ऐलान किया जा सकता है।

महागठबंधन में लगभग सेट है फॉर्मूला

महागठबंधन में लगभग सेट है फॉर्मूला

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन के भीतर सीटों का फॉर्मूला लगभग सेट कर लिया गया है। जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक मोटे तौर पर विधानसभा की 243 सीटों में से तालमेल को लेकर राजद और कांग्रेस के बीच पहले ही आपसी सहमति बन चुकी है। अब इन सीटों में से अगर जरूरत पड़ी तो दोनों दल अपने-अपने नजदीकी सहयोगियों को कुछ और सीटों पर चुनाव लड़ने का ऑफर देंगे। महागठबंधन में इसबार राजद, कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा),विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के अलावा सीपीआई,सीपीएम और झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ ही सीपीआईएमएल के भी साथ चुनाव लड़ने को लेकर बातचीत हो रही है। इन दलों में चुनाव लड़ने के लिए सीटों का जो फॉर्मूला निकल रहा है, उसपर बात करने से पहले यह देख लिया जाए कि 2015 के विधानसभा चुनावों में ये तमाम पार्टियां कितने पानी में थीं, अलबत्ता बीते 5 साल में काफी चीजें बदल चुकी हैं।

2015 के चुनाव में इन दलों का प्रदर्शन

2015 के चुनाव में इन दलों का प्रदर्शन

2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में सिर्फ 3 पार्टियां ही शामिल थीं। राजद, जदयू और कांग्रेस। इनमें से जदयू फिर से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन की हिस्सा बन चुकी है। पिछले चुनाव में जदयू और राजद 101-101 सीटों पर लड़ी थी। इसमें राष्ट्रीय जनता दल का स्ट्राइक रेट सबसे अच्छा था और उसने राज्य में पड़े कुल वैद्य मतों में से 18.35% लेकर सबसे ज्यादा 80 सीटें जीता था। जबकि, कांग्रेस ने भी अपनी पार्टी की उम्मीदों से भी कहीं ज्यादा यानी 41 सीटों पर लड़कर 27 सीटों पर कब्जा किया था। पार्टी को राज्य में पड़े कुल वैलिड वोट में से 6.66% मत प्राप्त हुए थे। जबकि, सीपीआई, सीपीएम, जेएमएम जैसी पार्टियां अलग लड़ी थीं और किसी का खाता भी नहीं खुला था। सीपीआई 98 सीटों पर लड़ी और 96 पर जमानत गंवा बैठी, सीपीएम 43 में से 42 सीटों पर जमानत नहीं बचा पाई और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जेएमएम की तो 32 में से 32 सीटों पर जमानत जब्त हो गई थी। अलबत्ता, अकेले लड़कर भी सीपीआई (एमएल) (एल) का प्रदर्शन फिर भी संतोषजनक रहा था। उसने 98 सीटों में से 3 सीटें जीती थी और उसे राज्य में कुल पड़े वैलिड वोट में से 1.54% मत हासिल हुए थे। हालांकि, 93 सीट पर उसकी भी जमानतें जब्त हो गईं।

150-155 सीटों पर लड़ सकती है आरजेडी

150-155 सीटों पर लड़ सकती है आरजेडी

जानकारी के मुताबिक बिहार विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और राजद के बीच में सीटों के बंटवारे को लेकर अबतक जो कई दौर की बातचीत हुई है, उससे मोटे तौर पर आंकलन यह निकल कर आ रहा है कि लालू यादव की आरजेडी राज्य में इसबार 150 से 155 सीटों पर लड़ सकती है, जबकि कांग्रेस को 60 से 65 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का मौका मिल सकता है। बाकी जो 30 से 40 सीटें बचेंगी, वह दूसरे छोटे सहयोगी दलों की दी जा सकती हैं। एक दिलचस्प बात यह भी सामने आ रही है कि इसबार महागठबंधन के दोनों बड़े दलों ने अपने बीच में सहयोगियों का भी एक तरह से बंटवारा कर लिया है।

सीपीआई (एमएल) के साथ सीटों पर बात

सीपीआई (एमएल) के साथ सीटों पर बात

सीपीआई और सीपीएम राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने को तैयार हैं, लेकिन अभी पेंच सीपीआई (एमएल) को लेकर फंसी हुई है। जानकारी के मुताबिक पार्टी को सम्मानजनक सीटों पर चुनाव लड़ने का ऑफर मिलेगा तभी वह महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ने को तैयार होगी। पिछले चुनाव में पार्टी, सिवान की दरौली, भोजपुर की तरारी और कठिहार की बलरामपुर सीट जीती थी। उसको लगता है कि करीब 15 से ज्यादा दूसरी सीटों पर भी उसने संतोषजनक प्रदर्शन किया था। वह इस बात के इंतजार में बैठी है कि लालू की पार्टी की ओर से उसे आखिर ऑफर क्या मिलता है।

एकजुट चुनाव लड़ने को दी जा रही है प्राथमिकता

एकजुट चुनाव लड़ने को दी जा रही है प्राथमिकता

सूत्रों के हवाले से एक जानकारी यह भी मिल रही है कि एनडीए के खिलाफ विपक्ष का एकजुट उम्मीदवार उतारने के लिए आरएलएसपी,सीपीआई और सीपीएम को साथ रखने के लिए इन्हें सहयोगियों के लिए पहले से तय कोटे के अलावा कांग्रेस के कोटे से एडजस्ट किया जाएगा। जबकि, सीपीआई (एमएल), वीआईपी और जेएमएम को साथ रखने के लिए जरूरत पड़ी तो राजद अपनी सीटों में से कुछ सीटें उन्हें चुनाव लड़ने के लिए ऑफर कर सकता है। खबरों के मुताबिक आरजेडी ने तो उम्मीदवारों को चुनने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

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