Bihar election 2020: जानिए क्यों तीसरे चरण की 78 सीटें NDA और महागठबंधन के लिए हैं अहम

नई दिल्ली। बिहार चुनाव के तीसरे व अंतिम चरण की 78 सीटों पर चुनाव प्रचार का शोर गुरुवार की शाम छह बजे थम गया। तीसरे चरण का चुनाव 15 जिलों में होना है। चुनाव का अंतिम चरण बिहार के भविष्य का निर्णय करेगा। दोनों गठबंधनों के बीच अहम लड़ाई सीमांचल और मिथिलांचल के मैदान में ही होनी है। दूसरे चरण की अपेक्षा तीसरे चरण में सीटों की संख्या भले कम है, लेकिन दिग्गजों की तादाद सबसे अधिक है। एनडीए की ओर से बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा से लेकर बिहार बीजेपी प्रभारी भूपेंद्र यादव, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम योगी ने रैलियां कीं तो वहीं महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव, भपेश बघेल समेत कई नेताओं ने एक दर्जन के करीब जनसभाएं की।

इस चरण में कई सीटों पर बहुकोणीय मुकाबला

इस चरण में कई सीटों पर बहुकोणीय मुकाबला

पिछले दो चरणों में जहां चुनावी मुकाबला काफी हद तक सत्तारूढ़ एनडीए और प्रतिद्वंद्वी महागठबंधन के बीच था। वहीं कुछ सीटों पर लोजपा के चलते मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था। लेकिन इस चरण में कई सीटों पर बहुकोणीय मुकाबला होने की संभावना है। बिहार में इसके अलावा अन्य प्रमुख खिलाड़ियों में उपेन्द्र कुशवाहा की आरएलएसपी , असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम और मायावती की बीएसपी और पूर्व लोकसभा सांसद राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव की जन अधिक्कार पार्टी का ग्रैंड सेकुलर डेमोक्रेटिक फ्रंट हैं। महागठबंधन ने 2015 के बिहार चुनाव में 78 सीटों में से 58 सीटों पर जीत हासिल की थी। तब इसमें राजद के साथ नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू भी शामिल थी। लेकिन इस बार महागठबंधन में राजद के साथ कांग्रेस, वाम दल भी शामिल हैं।

2020 में बदले समीकरण

2020 में बदले समीकरण

दरअसल, नीतीश कुमार और राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बीच गठजोड़ की वजह से इसे महागठबंधन का नाम दिया गया था। लेकिन 2017 में नीतीश कुमार महागठबंधन से अलग हो गए थे। तब एनडीए में भाजपा, लोजपा, आरएलएसपी और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के हम शामिल थी। 2015 में एनडीए 24 सीटें जीत सकी थी, इनमें अकेले 19 बीजेपी ने जीती थीं। व्यक्तिगत रूप से, जेडीयू ने 28, राजद 20, भाजपा 19 और कांग्रेस 10 सीटें जीती थीं। इस बार, लोजपा ने बगावत कर दी, जो अन्य दलों की तुलना में जदयू को अधिक प्रभावित करेगी। लोजपा ने सभी 115 जदयू प्रतियोगियों के खिलाफ अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। लोजपा के विद्रोह के कारण बड़े पैमाने पर जदयू को नुकसान उठाना पड़ा है। तीसरे चरण में जाने तक जेडीयू को पार्टी विरोधी गतिविधियों चलते 30 से अधिक नेताओं को निष्कासित करना पड़ा है।

तीसरा चरण सीमांचल और मिथिलांचल में हो रहा है

तीसरा चरण सीमांचल और मिथिलांचल में हो रहा है

तीसरा चरण सीमांचल और मिथिलांचल में हो रहा है। सीमांचल क्षेत्र की 24 सीटें पर तीसरे चरण में मतदान होना है। वर्तमान में यहां महागठबंधन के 14 विधायक, एनडीए के नौ और AIMIM का एक विधायक है। सीमांचल राजद का एक पारंपरिक गढ़ रहा है। मुस्लिम-यादव वोट बैंक अहम माना जाता है। तीसरे चरण में सीमांचल में एनडीए को विद्रोह और दलबदल के चलते 2015 का प्रदर्शन दोहरान में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं ओवैसी और कुशवाह का गठबंधन राजद के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। तीसरे चरण में मिथिलांचल क्षेत्र की कुल 38 विधानसभा सीटें पर चुनाव होना है। इसमें दरभंगा (5), मधुबनी (6), समस्तीपुर (5), मधेपुरा (8), सहरसा (8) और सीतामढ़ी (6) शामिल है। इसके आलावा तीसरे चरण में मुजफ्फरपुर जिले की 6 सीटों पर भी चुनाव होना है। वहीं मिथिलांचल क्षेत्र भाजपा के लिए एक चुनौती है। उसने 2015 में मधुबनी, समस्तीपुर, मधेपुरा और सहरसा में केवल छह सीटें जीती थीं।

बीजेपी के आसान नहीं होंगी राहें

बीजेपी के आसान नहीं होंगी राहें

यही कारण है कि बीजेपी के शीर्ष नेताओं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा तक ने मिथिलांचल के विकास के बारे में बात की है। दरभंगा हवाई अड्डा 8 नवंबर से यात्री उड़ाने संचालित करने जा रहा है। 2015 में आरजेडी-जेडीयू-कांग्रेस गठबंधन द्वारा क्लीन स्वीप के बावजूद बीजेपी दोनों चंपारण में सीटें निकलाने में कामयाब रही थी। 7 नवंबर को चंपारण की 11 सीटों पर मतदान होगा। 2015 में यहां भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज की थी। बीजपी जहां अपनी सीटें बचाने के लिए उतेरगी , वहीं तेजस्वी अपने 10 लाख नौकरियों के वादे के साथ यहां की सीटें अपने पक्ष में लाने की कोशिश करेंगे।

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