Bigg Boss: जब 'रिंकिया के पापा' की एक ऑमलेट के लिए हुई लड़ाई

नई दिल्ली- दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी अपने भोजपुरी गानों के लिए हमेशा से मशहूर रहे हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपने 'रिंकिया के पापा' वाले गाने की वजह से वे भोजपुरी के अलावा दूसरी भाषा के श्रोताओं के बीच भी भी काफी चर्चित हो चुके हैं। राजनीति में आने से पहले 'रिंकिया के पापा' वाले तिवारी बिग बॉस के सीजन 4 में भी अपना परफॉर्मेंस दिखा चुके हैं। बिग बॉस के सीजन 4 के एक एपिसोड में मनोज तिवारी की एक दूसरी कंटेस्टेंट डॉली बिंद्रा के साथ खूब लड़ाई भी हुई थी। दोनों के बीच ये लड़ाई हुई थी ऑमलेट को लेकर। 9वें हफ्ते में मनोज तिवारी घर से बाहर हो गए थे।

ऑमलेट के लिए लड़ पड़े थे 'रिंकिया के पापा'

ऑमलेट के लिए लड़ पड़े थे 'रिंकिया के पापा'

बिग बॉस सीजन 4 में मनोज तिवारी और डॉली बिंद्रा के बीच की तू-तू-मैं-मैं वाला एपिसोड खूब हिट रहा था। तब बिंद्रा बिग बॉस के घर में किचन की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। राशन कम न पड़े इसके लिए वह जो भी खाना बच जाता था, वह घर के सदस्यों को नाश्ते में परोस देती थीं। लेकिन, एक दफे मनोज तिवारी ने बचा हुआ खाना खाने से तो साफ इनकार कर ही दिया, ऊपर से बदले में ऑमलेट खाने की इच्छा भी जता दी। फिर क्या था, बवाल करने में माहिर बिंद्रा तिवारी पर जबर्दस्त तरीके से बिदक गईं। दोनों में खूब तू-तू-मैं-मैं हुई। हालांकि, आज भी यह बताना मुश्किल है कि उस बिग फाइट के लिए जिम्मेदार किसे माना जाना चाहिए।

मनोज-श्वेता तिवारी की वजह से भी हिट हुआ था शो

मनोज-श्वेता तिवारी की वजह से भी हिट हुआ था शो

बिग बॉस सीजन 4 किसी और वजह से भी खूब चर्चा में रहा था। उस सीजन में मनोज तिवारी के साथ एक और भोजपुरी-हिंदी स्टार श्वेता तिवारी भी थीं। दोनों में इस बात की समानता है कि एक समय उन्होंने भी भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में मनोज तिवारी की ही तरह काम किया है। मनोज तिवारी की दो भोजपुरी फिल्मों में वो लीड रोल भी निभा चुकी है- 'कब ऐबु अंगनवां हमार' और 'ए भौजी के सिस्टर'। तब तिवारी की पत्नी रानी जो कि खुद एक गायिका थीं, उन्हें शक था कि उनके पति और श्वेता तिवारी के बीच कोई अफेयर है। शायद बिग बॉस के घर में दोनों को साथ देखकर उनका शक और गहरा हो गया था और बात इतनी बिगड़ी कि वो मनोज तिवारी से डायवोर्स लेकर ही मानीं। हालांकि, बाद में श्वेता तिवारी ने अभिनव कोहली से शादी करके अफवाहों को शांत कर दिया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और फिर रानी कभी मनोज के पास नहीं लौटीं।

62 दिन में हुए थे बिग बॉस के घर से बाहर

62 दिन में हुए थे बिग बॉस के घर से बाहर

मनोज तिवारी ने बिग बॉस के घर में सिर्फ 9 हफ्ते बिताया था और 62 दिन में उनका घर से एविक्शन हो गया। तब शो के होस्ट सलमान खान के साथ 'आपका फरमान' कार्यक्रम में तिवारी ने स्वीकार किया कि वह अब घर के अंदर एक पल भी नहीं रहना चाहते। वैसे जब सलमान ने मनोज तिवारी को 5 मिनट में समान पैक करके घर से बाहर होने का परमान सुनाया तो घर के बाकी सदस्यों को उनके ऐलान पर विश्वास ही नहीं हो पा रहा था। लेकिन, जब तिवारी घर से बाहर होने के लिए सबसे विदा लेने लगे तो तीन सदस्यों को छोड़कर कोई भी अपनी सीट से नहीं हिला। सिर्फ डब्ल्यूडब्ल्यूई के सुपरस्टार द ग्रेट खली, श्वेता तिवारी और सीमा परिहार ही उन्हें छोड़ने के लिए बिग बॉस के घर के गेट तक आए।

भोजपुरी ने ही दिलाई राजनीति में जगह

भोजपुरी ने ही दिलाई राजनीति में जगह

बिग बॉस से मनोज तिवारी भले ही बाहर हो गए हों, लेकिन उनके भोजपुरी स्टारडम के करिश्मे को पहचान कर भाजपा ने उन्हें अपनी पार्टी में हाथों-हाथ लिया। पार्टी की नजर दिल्ली के 29 से 30 फीसदी पूर्वांचली वोटरों पर टिकी थी। पूर्वांचली मतलब उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के वोटर जिनमें से बड़ी तादाद भोजपुरी बोलने वालों की शामिल है। अगर संख्या में विवरण दें तो दिल्ली के 143 लाख वोटरों में 41,47,000 से 42,90,000 वोटर इन इलाकों के हैं, जो भोजपुरी, मैथली या मगही भाषा बोलते हैं और उन सबमें तिवारी का प्रभाव माना जाता है।

शीला दीक्षित को हराया, दिल्ली नहीं जिता सके

शीला दीक्षित को हराया, दिल्ली नहीं जिता सके

वैसे राजनीति में तिवारी ने 2009 में ही भाग्य आजमाया था और समाजवादी पार्टी के टिकट पर यूपी के मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ को चुनौती देने गोरखपुर पहुंच गए थे। लेकिन, वहां उनका भोजपुरी का जलवा भी काम नहीं आया। लेकिन, बीजेपी में आने के बाद उनकी सियासी किस्मत जरूर चमकी। 2014 में उन्होंने उत्तर-पूर्वी दिल्ली से आम आदमी पार्टी के बड़े नेता आनंद कुमार को हराया तो 2019 के लोकसभा चुनाव में तीन कार्यकाल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित को भी पराजित कर दिया। हालांकि, 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में बतौर प्रदेश अध्यक्ष भाजपा की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधे पर थी, बावजूद 23 साल बाद सत्ता में वापसी का उसका सपना चकनाचूर हो गया। वैसे तिवारी के लिए राहत इतनी भर है कि पार्टी की सीटें भी बढ़ी हैं और वोट प्रतिशत में भी काफी इजाफा हुआ है।

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