बैंक ग्राहकों को सरकार ने दी बड़ी राहत, अब नहीं डूबेगा बैंक में जमा पैसा
नई दिल्ली। बैंकों में पैसा रखने वाले ग्राहकों के लिए सरकार ने बड़ी राहत दी है। दरअसल जिस तरह से हाल ही में सरकार ने फाइनेशियल रिजोल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योंरेंस बिल को लोकसभा में पास किया था, उसके बाद लगातार लोगों को इस बात का डर था कि उनका पैसा बैंक में सुरक्षित नहीं है। इस बिल में बेल आउट का प्रावधान था, जिसके तहत अगर बैंक की आर्थिक स्थिति खराब होती है तो वह ग्राहकों का पैसा इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन सरकार ने भारी विरोध के बीच इस बिल को वापस ले लिया है, जिसके बाद ग्राहकों में काफी राहत है।

अब नहीं डूबेगा पैसा
इस बिल के वापस लेने के बाद बैंकों में पहले की स्थिति को फिर से बहाल कर दिया गया है। अब ग्राहकों का सेविंग, फिक्स्ड, करेंट, रिकरिंग अकाउंट डिपोजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन के तहत सुरक्षित रहेगा। इसके तहत ग्राहकों का पैसा पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा, यानि अगर बैंक किसी भी कारणवश आर्थिक स्थिति से जूझता है तो उसे ग्राहकों का पैसा देना होगा। इसके तहत सभी कॉमर्शियल बैंक भी शामिल हैं, जिसमे विदेशी बैंकों की भारत में शाखाएं भी शामिल है।

कितना पैसा मिलता है
डीआईसीजीसी के तहत लोगों का अधिकतम एक लाख रुपए सुरक्षित रहता है और बैंक इस कानून के तहत इस पैसे का बीमा होता है। ऐसे में अगर बैंक का लाइसेंस किसी स्थिति में रद्द होता है तो ग्राहकों को इस नियम के बैंक एक लाख रुपए देने के लिए बाध्य होगा। ग्राहकों का पैसा अगर अलग-अलग ब्रांच में जमा है तो उसे एक साथ मिलाकर एक लाख रुपए तक की राशि और उसपर मिलने वाले ब्याज को लौटाने के लिए बैंक बाध्य होगा। उदाहरण के लिए अगर बैंक में 95000 रुपए जमा हैं और इसपर 4000 रुपए ब्याज बनता है, तो बैंक कुल 99000 रुपए वापस देने के लिए बाध्य होगा, लेकिन अगर मूलधन एक लाख रुपए से अधिक है तो बैंक इसपर ग्राहक को ब्याज नहीं देगा, यानि कुल 1 लाख रुपए तक ही अधिकतम ग्राहक को बैंक देने के लिए बाध्य है।
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क्या था एफआरडीआई बिल
फाइनेंशियल रेजोल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल (एफआरडीआई बिल) वित्तीय संस्थानों के दिवालिया होने की स्थिति से निपटने के लिए बनाया गया है। किसी भी बैंक या इंश्योरेंस कंपनी के दिवालिया होने की स्थिति में उसे इस संकट से निकालने के लिए यह कानून लाया जा रहा है।जब भी कोई बैंक अपना कारोबार करने में सक्षम नहीं होगा और वह अपने पास जमा आम लोगों के पैसे लौटा नहीं पाएगा, तो उस बैंक को इस संकट से उबारनें में एफआरडीआई बिल मदद करेगा।
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