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भीम और परशुराम की ‘आर्मी’ आज होगी सड़क पर

By Bbc Hindi

बुधवार, 18 अप्रैल का दिन रैलियों के नाम रहने वाला है. एक तरफ़ दलित संगठन 'भीम आर्मी' जहां दलितों के ख़िलाफ़ अत्याचार को लेकर दिल्ली में 'मौन' विरोध प्रदर्शन करने जा रहा है. वहीं, परशुराम जयंती के मौके पर देशभर में कई रैलियां होंगी.

दलितों को लेकर रैली और दूसरी ओर भगवान विष्णु के अवतार परशुराम की जयंती पर रैली. दोनों में काफ़ी अंतर है लेकिन यह वही स्थिति है जो अभी कुछ दिनों पहले बनी थी.

राम नवमी
Getty Images
राम नवमी

मार्च के आख़िर में राम नवमी पर कई शहरों में रैलियां निकाली गई थीं और उसके तकरीबन एक सप्ताह बाद दो अप्रैल को दलित समाज ने भारत बंद बुलाया था. यह बंद एसएसी-एसटी क़ानून को कथित तौर पर कमज़ोर करने के ख़िलाफ़ बुलाया गया था. इस बंद के दौरान काफ़ी हिंसा हुई थी.

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भीम आर्मी क्यों कर रही है विरोध?

भीम आर्मी का कहना है कि वह भारत बंद के दौरान दलितों के साथ हुई ज़्यादती के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करने जा रहा है.

संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि भारत बंद के दौरान जिन दलितों को गिरफ़्तार किया गया, वह उनकी रिहाई की मांग को लेकर यह प्रदर्शन कर रहे हैं.

भीम आर्मी
BBC
भीम आर्मी

भीम आर्मी के रक्षा समिति के संयोजक संजीव माथुर ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उनकी तीन मांगे हैं.

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उन्होंने कहा, "पहली मांग यह है कि भारत बंद के दौरान जिन पर झूठे मुकदमे हुए हैं, उन सारे केसों को वापस लिए जाए. दूसरी मांग यह है कि कठुआ समेत दूसरी जगह बलात्कार के जो मामले हुए हैं और उनमें जो सत्ताधारी नेता शामिल रहे हैं उन पर कार्रवाई हो. तीसरा मामला है कि भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर और अन्य दो साथियों को जो एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून) के तहत जेल में रखा गया है उन्हें जेल से रिहा करे."

ग़ौरतलब है कि भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद 'रावण' को सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) में हिंसा भड़काने के आरोप में पिछले साल जून में गिरफ़्तार किया गया था तब से वह जेल में हैं.

सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में दलितों के घर जलाए जाने के बाद सहारनपुर में दलितों के प्रदर्शन हुए थे और हिंसा में एक राजपूत युवक की मौत हुई थी. इसके बाद से चंद्रशेखर जेल में हैं.

इस पर माथुर कहते हैं कि सरकार चंद्रशेखर को हाईकोर्ट से ज़मानत मिल चुकी है लेकिन सरकार उनके ख़िलाफ़ सबूत पेश नहीं कर पाई है. उन्होंने कहा कि सरकार ने एनएसए लगाने में क़ानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया है.

अब परशुराम जयंती पर रैली

राम नवमी, हनुमान जयंती के बाद अब परशुराम जयंती पर रैली निकाली जाएगी. ऐसे पोस्टर दिल्ली समेत कई शहरों में लग चुके हैं.

परशुराम जयंती पर रैली निकालने का कारण पूछने पर अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ के अध्यक्ष गोविंद कुलकर्णी कहते हैं कि उनके आदर्श लोगों को पता चले इसलिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है.

भीम आर्मी
Getty Images
भीम आर्मी

वह कहते हैं, "महाराष्ट्र समेत पूरे देशभर में परशुराम की जयंती पर एक सप्ताह का कार्यक्रम कर रहा है. इस पर व्याख्यान, रैलियां और सभा हो रही हैं."

राम नवमी के दौरान हुई रैलियों में पश्चिम बंगाल और बिहार में काफ़ी हिंसा देखने को मिली. परशुराम जयंती पर भी ऐसी परिस्थितियां न बनें इसके लिए क्या एहतियात की गई है. इस पर कुलकर्णी कहते हैं कि कुछ घटनाएं होती हैं जो निंदनीय हैं.

वह कहते हैं, "कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया है कि उन्हें कैसे व्यवहार करना है. इसके अलावा पुलिस से पूरी अनुमति ली गई है. जिस-जिस शहर में आयोजन होंगे वहां प्रशासन की पूरी अनुमति ली गई है.

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कौन-कौन शामिल होगा?

भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह बीबीसी हिंदी से बात करते हुए कहते हैं कि कार्यक्रम के मंच पर हिंसा के दौरान जो दलित पीड़ित रहे हैं, वही रहेंगे.

वह कहते हैं कि जो भी इन शोषणों के ख़िलाफ़ हमारे साथ शामिल होना चाहता है, वह उनके साथ आए.

वहीं, कुलकर्णी कहते हैं कि परशुराम जयंती पर निकाली जा रही रैली सिर्फ़ ब्राह्मण के लिए नहीं बल्कि जो चाहे वह उसमें शामिल हो सकता है.

परशुराम जयंती और भीम आर्मी की रैली एक दिन पड़ने पर किसी असहज स्थिति से कैसे बचा जाएगा? इस सवाल पर राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन बताते हैं कि अगर कोई ग़लत स्थिति पैदा होती है तो वह राजनीतिक कारणों से होगी.

वह कहते हैं, "किसी का त्योहार है तो वह अपना त्योहार मनाए लेकिन हम शोषण के ख़िलाफ़ खड़े हो रहे हैं."

परशुराम जयंती पर रैली जहां देश के अधिकतर शहरों में होगी. वहीं, भीम आर्मी की रैली केवल दिल्ली के संसद मार्ग पर होने वाली है.

भीम आर्मी इस रैली से दलितों के कितने मुद्दे उठा पाएगी यह तो बुधवार को होने वाली रैली से ही पता चल पाएगा.

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English summary
Bhima and Parashurams Army will be on the road today

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