बूस्टर डोज के ट्रायल के लिए भारत बायोटेक ने DCGI को भेजा आवेदन
नई दिल्ली, 20 दिसंबर: पूरे देश में कोरोना महामारी के खिलाफ राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान जारी है, लेकिन वायरस के नए-नए वेरिएंट लगातार सामने आ रहे। जिस वजह से कई विशेषज्ञों ने बूस्टर डोज लगाने की सलाह दी थी। अब भारत बायोटेक ने अपने इंट्रानैसल कोविड वैक्सीन की बूस्टर डोज के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) के पास फेस 3 क्लीनिकल ट्रायल का आवेदन किया है, जो कोवैक्सीन और कोविशील्ड की डोज लगवाने वाले लोगों को दिया सकता है।

सूत्रों के मुताबिक नए वेरिएंट के खतरे को देखते हुए भारत बायोटेक तीसरे चरण का ट्रायल करना चाहता है, जो बूस्टर डोज पर आधारित होगा। इसके लिए आवेदन DCGI के पास भेजा गया है। वहां पर कंपनी की ओर से पेश दस्तावेजों की जांच के बाद इस पर फैसला होगा। कंपनी ने आवेदन में बताया कि बूस्टर डोज कोवैक्सीन के अलावा कोविशील्ड लेने वाले लोगों को भी दी जा सकेगी।
नाक से दी जाएगी बूस्टर डोज
आपको बता दें कि भारत बायोटेक नेजल वैक्सीन पर तेजी से काम कर रही है। यही कोरोना के खिलाफ बूस्टर डोज होगी। भारत बायोटेक के मुताबिक कोवैक्सीन को सिरिंज के जरिए लोगों को दिया जा रहा है, जबकि नेजल वैक्सीन में ड्रॉप को नाक में डाला जाएगा। ये अन्य वैक्सीन की तुलना में आसानी और तेजी से दी जा सकेगी।
वैक्सीन की बर्बादी पर कही ये बात
भारत बायोटेक ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों को शीशी खोलने और उसकी बर्बादी की चिंता करने की जरूरत नहीं है। अगर मरीज उपलब्ध नहीं हैं, तो वे खुली हुई शीशी को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर स्टोर करें और फिर उसका इस्तेमाल दूसरे दिन हो सकता है। वैक्सीन की शीशी खोलने के बाद उसे 28 दिन तक स्टोर कर रखा जा सकता है। इसके बाद ही वो पूरी तरह से खराब होगी।












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