कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी का बयान, नेजल वैक्सीन हो सकता है बूस्टर डोज का सही विकल्प
नई दिल्ली, 10 नवंबर: कोरोना वायरस पर पूरी तरह से काबू पाने के लिए दुनिया भर में वैक्सीनेशन बड़े स्तर पर किया जा रहा है। ऐसे में भारत में भी 108 करोड़ से ज्यादा वैक्सीनेशन का आंकड़ा पार हो चुका है, इस बीच कई देशों में कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज भी लगाई जा रही है। ऐसे में बूस्टर डोज लेने का सही वक्त क्या है, साथ ही नाक से देने वाले टीके (नेजल वैक्सीन) पर आगे क्या हो सकता है। इस मुद्दे पर भारत बायोटेक के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. कृष्णा एला ने बड़ी जानकारी साझा की।

बूस्टर डोज का बताया ये सही वक्त
भारत बायोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कृष्णा एला ने बुधवार को कहा कि कोविड-19 वैक्सीन के लिए बूस्टर खुराक का आदर्श समय दूसरी खुराक के छह महीने बाद है। इसी के साथ उन्होंने नेजल वैक्सीन (नाक के टीके) के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी कंपनी जीका वैक्सीन विकसित करने वाली दुनिया की पहली कंपनी है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से कोवैक्सीन का टीका लेना भारतीय विज्ञान में उनका विश्वास दिखाता है। एला ने कहा कि बूस्टर खुराक के लिए आदर्श समय दूसरी खुराक के छह महीने बाद है। उन्होंने आगे कहा कि भारत बायोटेक नाक के टीके को बूस्टर डोज के रूप में देख रहा है, क्योंकि कोवैक्सीन की तुलना में इसकी स्केलिंग क्षमता बहुत आसान है।
ट्रांसमिशन को रोकने का यही एकमात्र तरीका
नेजल वैक्सीन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया नेजल टीकों की ओर देख रही है। ट्रांसमिशन को रोकने का यही एकमात्र तरीका है। हर कोई इम्यूनोलॉजी का पता लगाने की कोशिश कर रहा है और किस्मत से भारत बायोटेक ने इसका पता लगा लिया है। डॉ. एला ने कहा कि हम नेजल वैक्सीन को लेकर आ रहे हैं। हम सोच रहे हैं कि कोवैक्सीन को पहले डोज के रूप में दिया जा सकता है, दूसरी खुराक को नाक से दिया जा सकता है। यह रणनीतिक और साइंटिफिक रूप से काफी अहम है। क्योंकि दूसरे डोज के रूप में यह वायरस के संचरण को रोकता है। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई संक्रमित है या किसी को एक खुराक से टीका लगाया गया है तो नाक का टीका अच्छा काम करता है।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोवैक्सीन का शॉट लेने के बारे में उन्होंने कहा कि एक वैज्ञानिक को क्या पसंद होगा? एक देश का मुखिया अपकी वैक्सीन ले रहा है। यह एक वैज्ञानिक को मिलने वाली सबसे अच्छी संतुष्टि है, यह भारतीय विज्ञान में विश्वास, आत्मविश्वास को दर्शाता है।
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