Bharat Bandh 2024: भारत बंद के पीछे क्या है डिमांड और क्या है इसका समाधान?
Bharat Bandh News: आज आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति की ओर से राष्ट्रव्यापी भारत बंद का आह्वान किया गया है। इसे कुछ राजनीतिक दलों और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजातियों (SC-ST) से जुड़े संगठनों का भी समर्थन हासिल है। यह भारत बंद इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के खिलाफ बुलाई गई है और आयोजक उसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
1 अगस्त, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की उप-श्रेणियां बनाने की अनुमति दे दी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि इन वर्गों में जो सबसे ज्यादा जरूरतमंद हैं, उन्हें आरक्षण में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

भारत बंद के पीछे क्या है डिमांड?
रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को आयोजित भारत बंद के पीछे मूल मांग यही है कि आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जो ताजा फैसला दिया है उसे वापस लिया जाए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों का एक वर्ग काफी विरोध कर रहा है और उसको लेकर देशव्यापी बहस भी छिड़ी हुई है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसपर आधारित है कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों में जो 'क्रीमी लेयर' हैं, उसकी जगह कोटा में उनमें भी जो वंचित वर्ग हैं, उन्हें प्राथमिकता मिले। लेकिन, इसका जबर्दस्त विरोध हो रहा है और विरोध करने वाले सर्वोच्च अदालत के फैसले को अन्यायपूर्ण बता रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कहा है?
रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, 'जिन लोगों को वास्तव में इसकी आवश्यकता है, उन्हें रिजर्वेशन में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।' इसके साथ ही अदालत ने राज्यों को अनुमति दी है कि वह एससी-एसटी में उप-श्रेणियां बना सकते हैं, मतलब इनकी सामाजिक स्थिति के हिसाब से उनका वर्गीकरण किया जा सकता है।
कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने किया भारत बंद का समर्थन
भारत बंद को लेकर राजस्थान और पश्चिम उत्तर प्रदेश में ज्यादा चौकसी बरती जा रही है। देश के कुछ संवेदनशील इलाकों में पुलिस को चौकन्ना कर दिया गया है। कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के समर्थन की वजह से इस बंद की व्यापकता बढ़ने का अनुमान है। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने भी इस भारत बंद का समर्थन किया है।
एससी-एसटी की मांगों का क्या है समाधान?
2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट को लेकर बड़ा फैसला सुनाया था। इसमें इस कानून के तहत तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी और गिरफ्तारी के लिए डीएसपी स्तर के अधिकारी की मंजूरी जरूरी कर दी थी। इसको लेकर समाज के इस वर्ग के एक बड़े तबके में भारी विरोध था।
2, अप्रैल 2018 के दिन इसको लेकर विरोध-प्रदर्शन के दौरान राजस्थान, मध्य प्रदेश और यूपी में भारी बवाल हुआ था। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक खासकर पश्चिमी यूपी में प्रदर्शनकारियों में कुछ उपद्रवी तत्व भी घुस आए थे, जिनकी वजह से कुछ घंटों तक काफी अव्यवस्था की स्थिति बन गई थी। इस बवाल में कुछ की जानें भी चली गई थी।
बाद में केंद्र सरकार ने संसद के रास्ते सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का समाधान निकाला और मामला शांत हुआ। इसी तरह से इस मामले पर भी बातचीत से समाधान निकाला जा सकता है या फिर अदालत या संसद के माध्यम से ही कोई ऐसा रास्ता निकल सकता है, जो समाज के बड़े तबके के हक में हो।












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