अगर चिली चिकन के हैं शौकीन तो सावधान!

बेंगलुरु। यदि आप चिली चिकन के दीवाने हैं और अगली बार रेस्तरां में जाने के बाद यही ऑर्डर करने वाले हैं, तो एक बार सोच लें। क्योंकि चिली चिकन में इस्तेमाल किया जाने वाला चिकन कितना पुराना है, इसका आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते। एक दिन, एक सप्ताह, एक साल या फिर 40 साल पुराना! चौंक गये न! जी हां चीन से जो खबर आयी है, उसने भारत के कान खड़े कर दिये हैं और हम आपके कान खड़े करने जा रहे हैं।

असल में चीन की सरहद पर कस्टम डिपार्टमेंट ने एक गैंग को पकड़ा है, जो चीन से दूसरे देशों में फ्रोजेन मीट की स्मगलिंग करता था। सबसे बड़ा खुलासा यह है कि कस्टम विभाग ने करीब 1 लाख टन मीट सीज़ किया है, जिसमें 1970 व 1980 के दशक में पैक किये गये चिकन विंग्स, मटन चाप और पोर्क शामिल है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कहीं इस खतरनाक फ्रोजेन मीट की स्मगलिंग भारत में तो नहीं हुई है।

डेली ऑनलाइन में प्रकाश‍ित खबर के अनुसार चीन के कस्टम विभाग ने मंगलवार को सरहद पर पोर्क यानि सुअर का मांस, चिकन यानी मुर्गे और मटन यानी बकरे के फ्रोजेन मीट के हजारों पैकेट सीज़ किये हैं। यह स्मगलिंग वियेतनाम बॉर्डर पर होती थी, जिसमें करीब 20 से ज्यादा गैंग शामिल थे।

क्या करते थे ये लोग

  • रेस्तरां, मॉल या फ्रोजेन मीट की दुकानों पर जो मीट नहीं बिकता उसे बेहद सस्ते दाम में खरीद लेते।
  • उसकी री-पैकेजिंग करते और उसमें नई डेट के सथ मुहर लगा देते और दोबारा मार्केट में बेच देते।
  • दोबारा से पैक किये गये फ्रोजेन मीट को अवैध रूप से पूरे चीन में बेचा जा रहा था।
  • सिर्फ हुनान प्रांत में 800 टन मीट सीज़ किया गया, जिसकी कीमत 1 करोड़ यूआन है।
  • इस गैंग के करीब 22 लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है।
  • फ्रोजेन मीट में सबसे ज्यादा मुर्गे के पंजे और सुअर की टांगें पायी गईं।
  • जो मीट सड़ने लगता, या जिसमें बदबू आती, उसमें केमिकल डालकर फ्रीज कर देते।

भारत क्यों हो चिंतित और सतर्क पढ़ें कुछ महत्वपूर्ण बातें स्लाइडर में-

क्यों सतर्क रहे भारत

क्यों सतर्क रहे भारत

इस बात की पुष्ट‍ि नहीं हुई है कि इस गैंग ने भारत में सड़ा हुआ फ्रोजेन मीट स्मगल किया है, लेकिन फिर भी भारत को चिंतित व सतर्क होने की जरूरत है।

भारत में बढ़ा फ्रोजेन मीट का चलन

भारत में बढ़ा फ्रोजेन मीट का चलन

देश के बड़े शहरों में फ्रोजेन मीट का चलन बढ़ा है, यह चेक करने की जरूरत है कि जो मीट नहीं बिका वो कहां जाता है?

छोटे रेस्तरांओं में खतरा ज्यादा

छोटे रेस्तरांओं में खतरा ज्यादा

ऐसा संभव है कि ऐसा ही कोई गैंग भारत में भी फ्रोजेन मीट को री-पैक कर छोटे-मोटे रेस्तरांओं को बेच रहा हो।

सस्ते के चक्कर में क्राइम

सस्ते के चक्कर में क्राइम

ऐसा संभव है कि रेस्तरां कम पैसे में डिश तैयार करने के चक्कर में सस्ते में ऐसा मीट खरीद रहे हों।

हो सकती हैं ये बीमारियां

हो सकती हैं ये बीमारियां

सतर्क रहें, क्योंकि इससे बर्ड फ्लू, फुट और माउथ इनफेक्शन, पागलपन की बीमारी होने का खतरा रहता है।

आप नीचे वीडियो को देख सकते हैं

आप नीचे वीडियो को देख सकते हैं

यदि आप वीडियो देखना चाहते हैं, तो स्लाइडर बंद कर, नीचे देख सकते हैं।

अब आप उस वीडियो को देख सकते हैं, जो चीन में रेड डालते वक्त बनाया गया।


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