बेंगलुरु: दूसरों की कब्र खोदने जीने वालों को मिली राहत,सरकार ने दिया नौकरी का भरोसा

बेंगलुरु। दूसरों के लिए कब्र खोदकर जीवन यापन करने वालों के लिए राहत की खबर आई है। बेंगलुरु के कब्रिस्तानों में कब्र खोदकर अपने लिए रोटी जुटाने वाले दलित समुदाय के लोगों को लंबे संघर्ष के बाद बृह्त बेंगलुरु महानगर पालिका ने खुशखबरी दी है। बीबीएमपी ने कब्र खोदने वाले हर परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने का वादा किया है। उन्हें हर महीने 17000 रुपए की सैलरी दी जाएगी।

 Bengaluru’s grave-diggers can now rest in peace

बीबीएमपी के इस ऐलान से खुश कब्र खोदने वाले शौरी राज का कहना है कि मैं 42 सालों से ये काम कर रहा हूं। आज तक मैंने कब्रिस्तान के बाहर की दुनिया नहीं देखी। सरकार ने हमेशा ने हमारे काम को नकारा। हमें अपने जीवन यापन के लिए मृतकों के परिजनों द्वारा दिए जाने वाले दान पर निर्भर रहना पड़ता हैं। हमारा संघर्ष काफी पीड़ा दायक है। जब सरकार ने हमारी नहीं सुनी तो हमने एकजुट होने का फैसला किया।

आपको बता दें कि फरवरी 2017 में बेंगलुरु के इन कब्र खोदने वाले समुदाय के लोगों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन शुरू किया। इन लोगों ने विरोध प्रदर्शन का अनोखा तरीका खोजा और खुद अपनी कब्र खोदकर अपने आपको उसमें गाड़ दिया। इनके प्रदर्शन के बाद बीबीएमपी का आंखें खुली और नगर निगम पालिका ने उनकी मांगों को मानते हुए उन्हें पहचान दी और हर परिवार से किसी एक सदस्य को नौकरी और सैलरी देने का भरोसा दिया। इसके अलावा कब्रिस्तान में रहने वाले इन दलितों को घर बनाने के लिए 4 लाख तक का लोन देने की घोषणा की गई। वहीं दलितों के संगठन अंबेडकर दलित संघर्ष समिति का कहना है कि अभी उन्होंने आधी सफलता हासिल की है।

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