Bengaluru Smart Lakes: सेंसर और ऐप टेक्नोलॉजी से लौटी झीलों की रौनक, 140 प्रजाति के पक्षियों की वापसी
Bengaluru Smart Lakes: बेंगलुरु को भारत का सिलिकॉन वैली कहते हैं। कुछ दशक पहले तक यह शहर अपने खूबसूरत पर्यावरण और सुंदर झीलों की वजह से भी चर्चा में रहता था। अब राज्य सरकार और बेंगलुरु म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ने झीलों को उनके पुराने स्वरूप में लौटाने के लिए मिशन मोड में काम शुरू किया है। शहर की झीलें अब सिर्फ प्राकृतिक जलाशय नहीं हैं, बल्कि टेक्नोलॉजी और नागरिक भागीदारी के दम पर 'स्मार्ट इकोसिस्टम' बनती जा रही हैं।
सेंसर निगरानी से झील संरक्षण का नया मॉडल पेश कर रहा है। इसकी मिसाल है कि झीलों में 140 तरह की जैव प्रजाति भी नजर आने लगी हैं। अब झीलों की सफाई केवल मैन्युअल प्रयासों तक सीमित नहीं है। शहर की कई प्रमुख झीलों में फ्लोटिंग सेंसर लगाए गए हैं, जो पानी की गुणवत्ता की भी जांच करते हैं। जैसे कि पीएच लेवल, डिसॉल्व्ड ऑक्सीजन (DO) और टर्बिडिटी-का रियल-टाइम डेटा हर मिनट क्लाउड पर भेजते हैं।

Bengaluru Smart Lakes: मोबाइल पर झीलों की स्थिति का अलर्ट अपडेट
- अगर पानी के ऑक्सीजन का स्तर 4 mg/l से नीचे गिरता है, तो सिस्टम तुरंत अधिकारियों और नागरिक समूहों को मोबाइल अलर्ट भेज देता है।
- यह 'फिश-किल अलर्ट' तंत्र मछलियों की मौत को रोकने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। स्थानीय स्टार्टअप्स जैसे फल्क्सजेन (FluxGen) और टीथरबॉक्स टेक्नोलॉजी (Tetherbox Technologies) ने किफायती सेंसर विकसित किए हैं, जो सीवेज लीकेज की तुरंत पहचान कर सकते हैं।
Bengaluru Lakes: झीलों के संरक्षण में आम नागरिकों की भागीदारी
झील संरक्षण में स्थानीय निवासियों की भूमिका भी बदली है। MIRA App और एक विशेष डैशबोर्ड के जरिए नागरिक अपनी नजदीकी झील का 'लाइव हेल्थ स्कोर' देख सकते हैं। 'फ्रेंड्स ऑफ लेक्स' (FBL) जैसे समूह डेटा के आधार पर सरकार से जवाबदेही मांग रहे हैं। ड्रोन मैपिंग और GPS डेटा का उपयोग कर बफर जोन में अतिक्रमण पर नजर रखी जा रही है। जक्कुर लेक (Jakkur Lake) और पुट्टनहल्ली लेक (Puttenahalli Lake) इसका सफल उदाहरण हैं। यहां नागरिक समूहों (जैसे जलपोषण) और BBMP के बीच साझेदारी ने संरक्षण को स्थायी मॉडल में बदला है।
बेंगलुरु के झीलों में जैव विविधता का असर
तकनीक का असर जैव विविधता पर भी दिख रहा है। हुलमावी जैसी झीलों में लगभग 140 प्रजातियों के पक्षियों की वापसी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जिन झीलों का पुनरुद्धार हुआ है, उनके 500 मीटर के दायरे में बोरवेल का जल स्तर भी सुधरा है, जिससे ग्राउंड वॉटर रीचार्ज में मदद मिली है। चुनौतियां बरकरार हैं। 2026 में बफर जोन नियमों में प्रस्तावित बदलाव-कुछ मामलों में 30 मीटर से कम करने की चर्चा-पर्यावरणविदों के लिए चिंता का विषय है।












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