बेंगलुरु महालक्ष्मी हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस, ओडिशा में लटका मिला आरोपी का शव, हुए कई खुलासे

बेंगलुरु में महालक्ष्मी और मुक्ति रंजन रॉय से जुड़ा एक खौफनाक हत्याकांड सामने आया है। छह महीने तक चले उनके रिश्ते में कई उतार-चढ़ाव आए, जिनमें से कुछ की शिकायत पुलिस में भी की गई। 3 सितंबर को शादी और बेवफाई के शक को लेकर हुए गरमागरम विवाद के बाद महालक्ष्मी की खौफनाक तरीके से हत्या कर दी गई।

श्रद्धा वाकर और महालक्ष्मी की हत्याओं के बीच स्पष्ट समानताएं पुलिस को यह संदेह करने पर मजबूर कर रही हैं कि मुख्य आरोपी, मुक्ति रंजन रॉय, सोशल मीडिया पर दिल्ली के इस खौफनाक अपराद से प्रेरित हो सकता है। 18 दिनों तक महालक्ष्मी का शरीर 59 टुकड़ों में काटकर एक फ्रिज में रखा गया था। यह भयानक अपराध करने के बाद, मुक्ति रंजन रॉय बेंगलुरु से फरार हो गया था।
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अपने पति से पिछले साल हुई थी अलग

महालक्ष्मी अपने पति हेमंत से अलग हो गई थी, क्योंकि उसके पति को महालक्ष्मी के अशरफ नाम के एक अन्य व्यक्ति के साथ संबंध होने का संदेह था। दोनों की एक बेटी भी है। हेमंत ने जांच में पत्नी से अलग होने की वजह 'अशरफ' को बताया था।

शादी का दबाव बनाने पर की हत्या

घटना वाली रात मुक्ति, महालक्ष्मी से मिलने उसके फ्लैट पर पहुंचा था जहां दोनों के बीच शादी को लेकर बहस हो गई। उसने मुक्ति रंजन रॉय पर उससे शादी करने का दबाव बनाया, लेकिन मुक्ति ने, जो महालक्ष्मी की पिछली शादी के बारे में जनता था, अविश्वास और आगे के संबंधों के संदेह के कारण मना कर दिया। उसे शक था कि महालक्ष्मी का किसी और से भी अफेयर है।

केस पर काम कर रहे एक अधिकारी ने कहा, "वे अक्सर इस मुद्दे पर बहस करते थे।" मुक्ति रंजन रॉय ने एक बार महालक्ष्मी के फोन पर अन्य पुरुषों की तस्वीरें देखी थीं और इससे वह नाराज था। अधिकारी ने बताया कि उसने महालक्ष्मी के आक्रामक व्यवहार और मोबाइल पर तस्वीरों के बारे में अपने छोटे भाई, स्मृति रंजन रॉय, जो बेंगलुरु में रहता था, से चर्चा की थी।

उस दिन हुई बहस और लड़ाई के बाद मुक्ति रंजन रॉय ने महालक्ष्मी की हत्या कर दी। कथित तौर पर उसने उसके शरीर को 59 टुकड़ों में काट दिया, और 18 दिनों तक उसे रेफ्रिजरेटर में रखा। घटना के कुछ समय बाद वो बेंगलुरु से भाग गया।

हत्या के बाद आरोपी ने अपने भाई को किया था कांटेक्ट

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, मुक्ति रंजन के छोटे भाई ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि हत्या के बाद मुक्ति ने उससे संपर्क किया था, और उसका विस्तृत बयान दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, महालक्ष्मी को "गुस्सैल स्वभाव" की महिला माना जाता था, और दोनों पक्षों के बीच शारीरिक हमले की शिकायतें स्थानीय पुलिस में दर्ज थीं।

महालक्ष्मी से अलग हुए उसके पति हेमंत द्वारा नेलमंगला पुलिस स्टेशन में भी इसी तरह का मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने शिकायत की थी कि बहस के दौरान उसने उन्हें काटा और पैसे की मांग की। जांच से यह भी पता चला कि हत्या 3 और 4 सितंबर के बीच हुई थी। उस रात को, बहुत ज्यादा बहस के बाद, मुक्ति रंजन रॉय कथित तौर पर अपना आपा खो बैठा और महालक्ष्मी पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

कथित तौर पर, गुस्से में मुक्ति रंजन रात भर शव के साथ बैठा रहा और उसे ठिकाने लगाने के तरीके सोचता रहा। पुलिस को संदेह है कि इसी दौरान उसने शरीर को ठिकाने लगाने के वीडियो देखे।

महालक्ष्मी के शरीर को काटने के लिए खरीदा चाकू

अगली सुबह, 4 सितंबर को सुबह 11 बजे, सीसीटीवी फुटेज से पुष्टि होती है कि मुक्ति रंजन रॉय मल्लेश्वरम में एक बर्तन की दुकान पर गए और एक बड़ा चाकू खरीदा। पुलिस ने बताया कि उनके पास आरोपी के दुकान में प्रवेश करने का फुटेज है, और बाद में सबूत मिले कि आरोपी ने एक वस्तु फेंकी थी, जो बाद में चाकू का कवर पाया गया।

महालक्ष्मी की हत्या के बाद मुक्ति रंजन ने अपना फोन बंद कर दिया और छुप गया। उसका छोटा भाई, स्मृति रंजन, जो इलेक्ट्रॉनिक सिटी के पास हेब्बागोडी में रहता है, ने उससे संपर्क करने की कोशिश की लेकिन पाया कि उनका नंबर बंद था। कुछ दिनों बाद, जब मुक्ति रंजन रॉय ने अपना फोन फिर से चालू किया, तो स्मृति रंजन ने उनसे पूछा कि उन्होंने अचानक फोन क्यों बंद कर लिया था।

जिसके बाद मुक्ति ने सारी बात अपने भाई को बताई। मुक्ति रंजन ने अपने भाई को इलाके से भागने के लिए कहा, उसे चेतावनी दी कि पुलिस उसके पीछे भी आएगी। छोटे भाई, स्मृति रंजन ने पुलिस को बताया कि मुक्ति रंजन ने हत्या की बात कबूल करने के बाद उससे पैसे भी उधार लिए थे और उसे बताया था कि वह पुलिस से बचने के लिए ओडिशा में अपने गृहनगर जा रहा है।

पुलिस ने मुक्ति रंजन के मोबाइल को पश्चिम बंगाल में ट्रेस किया। हालांकि, वह बंद था। अधिक तकनीकी विश्लेषण के बाद, यह पाया गया कि मुक्ति रंजन का नंबर ओडिशा में सक्रिय था, और बेंगलुरु पुलिस ने उसे ट्रैक करने और पकड़ने के लिए तीन टीमों को भेजा।

मुक्ति रंजन की आत्महत्या

25 सितंबर को, मुक्ति रंजन रॉय ओडिशा के भद्रक में अपने गृहनगर के पास एक पेड़ से लटका पाया गया। यह पता चला है कि उन्होंने बालासोर में एक दोस्त से दोपहिया वाहन के लिए मदद मांगी थी, यह वादा करते हुए कि वह उसी दिन वाहन लौटा देगा। अपने हस्तलिखित सुसाइड नोट में, मुक्ति रंजन ने महालक्ष्मी की हत्या करने की बात कबूल की।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, नोट में लिखा था, "मैंने किया। मैंने उसे मार डाला। मैं उससे तंग आ गया था। उसके लगातार झगड़े और पैसों की मांगें बहुत परेशान करने वाली थीं।"

पुलिस को शक है कि मुक्ति रंजन रॉय ने भागने की कोशिश में दोपहिया वाहन से ओडिशा की यात्रा की हो सकती है। वे यह पता लगाने की कोशिश में हैं कि उसे वाहन किसने उपलब्ध कराया और उसने कौन सा रास्ता लिया। ओडिशा और कर्नाटक दोनों राज्यों की पुलिस टीमें इस जघन्य हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए एक-दूसरे के साथ समन्वय कर रही हैं, जिसने देश को हिला कर रख दिया है।
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