Bengaluru Lake Restoration: बेंगलुरु फिर बनेगा 'सिटी ऑफ लेक', 24 झीलों के लिए 210 करोड़ का मेगा प्लान
Bengaluru Lake Restoration: बेंगलुरु की पहचान कभी झीलों और हरियाली के लिए थी। आईटी हब बनने के बाद शहर का तेजी से विस्तार हुआ जिसका असर हरियाली के साथ ही झीलों के सूखने के तौर पर नजर आने लगा। अब राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर शहर की पुरानी और ऐतिहासिक महत्व वाली झीलों के जीर्णोद्धार के लिए कदम उठाया है। कर्नाटक सरकार और बीबीएमपी (BBMP) ने शहर की झीलों के कायाकल्प के लिए 210 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
इसके बाद से शहर को उम्मीद जगी है कि बेंगलुरु अपनी खोई हुई प्राकृतिक विरासत फिर से हासिल करेगा। झीलों के रख-रखाव के साथ ही इसमें जमा कूड़ा निकालने के लिए भी बड़े पैमाने पर काम किया जाएगा। इसके अलावा, इनके सौंदर्यीकरण पर भी यह राशि खर्च की जाएगी।

Bengaluru Lake Restoration: प्रमुख झीलों की साफ-सफाई का काम शुरू
सबसे बड़ी पहल 108 एकड़ में फैली ऐतिहासिक उलसूर लेक (Ulsoor Lake) में देखने को मिल रही है। लगभग 24 साल बाद यहां व्यापक स्तर पर गाद निकालने (desilting) का काम शुरू हुआ है। झील को अस्थायी रूप से खाली कर ₹4 करोड़ की लागत से सफाई की जा रही है। यह कदम जल गुणवत्ता सुधारने और जैव विविधता बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
Bengaluru News: शहर की सबसे बड़ी झील का होगा इसी साल काया-कल्प
शहर की सबसे बड़ी और चर्चित झीलों में शामिल बेलांदूर झील और वर्थुर झील में भी गाद निकालने और वेटलैंड विकसित करने का कार्य जारी है। बेलंदूर झील का काम मई 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। वहीं वरथुर झील में हाल ही में फ्लेमिंगो (राजहंस) भी दिखा था। इसे पर्यावरण की दृष्टि से सुधार का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
Bengaluru Lake News: झीलों के रख-रखाव के लिए 210 करोड़ का खर्च
- उत्तर बेंगलुरु की कचरकन्नाहल्ली झील को 30 साल बाद पुनर्जीवित किया गया है और इसमें फिर से पानी भरने लगा है।
- इसके अलावा ₹50 करोड़ के मेगा प्रोजेक्ट के तहत 24 झीलों का पुनरुद्धार किया जा रहा है, जिसमें कलकेरे झील को ₹10 करोड़ की सबसे बड़ी राशि मिली है।
- झील संरक्षण के लिए कुल ₹210 करोड़ का बजट बाउंड्री मजबूत करने, बाढ़ नियंत्रण और सुरक्षा उपायों पर भी खर्च होगा।
- बच्चों और नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने के लिए झीलों पर 'बर्ड रिपॉजिटरी' यानी पक्षी सूचना केंद्र स्थापित करने की योजना है।
हालांकि जुलाई 2025 में कर्नाटक सरकार ने झीलों के आसपास 'बफर ज़ोन' नियमों में संशोधन कर निर्माण की अनुमति 3 से 30 मीटर तक देने के फैसले पर पर्यावरणविद चिंता जता रहे हैं। दूसरी ओर Jakkur Lake जैसी झीलों में आधुनिक सेकेंडरी ट्रीटमेंट प्लांट और वेटलैंड तकनीक से नाइट्रोजन व फास्फोरस हटाने की पहल सकारात्मक बदलाव का उदाहरण है।












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