Bengaluru Electricity Bill: बेंगलुरू में 1 मई से बढ़ जाएगा बिजली का बिल, क्यों और कितना अधिक भुगतान करना होगा?
Bengaluru Electricity Bill: बेंगलुरु में पड़ रही भीषण गर्मी में अब लोगों की परेशानी और बढ़ने वाली है।बेंगलुरू से लोगों को 1 मई से बढ़े हुए बिलों का सामना करना पड़ेगा। कर्नाटक इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (KERC) ने बेंगलुरु इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी लिमिटेड (BESCOM) को वित्तीय वर्ष 2024-25 में हुए ₹2,068 करोड़ के राजस्व घाटे की भरपाई बिजली उपभोक्ताओं से करने की अनुमति दी है।
कितना अधिक भुगतान करना होगा?
इस आदेश के तहत, उपभोक्ताओं को 2024-25 में खपत की गई प्रति यूनिट बिजली पर अतिरिक्त 56 पैसे का भुगतान करना होगा। आयोग ने कहा, "BESCOM वित्तीय वर्ष 2024-25 के प्रत्येक सक्रिय उपभोक्ता के लिए उनकी वास्तविक ऊर्जा खपत के आधार पर वसूल की जाने वाली राशि की गणना करेगा।"

घाटे की भरपाई कब तक उपभाेक्ताओं से की जाएगी?
आयोग ने बताया, "यह राशि 'FY25 True up Charges' के रूप में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान समान मासिक किश्तों में वसूल की जाएगी। वसूली 1 मई 2026 या उसके बाद की पहली मीटर रीडिंग तिथि से शुरू होकर 30 अप्रैल 2027 को समाप्त होगी।"
CESC भी बिजली उपभाक्ताओं से करेगा घाटे की वसूली
घाटे की पूरी वसूली सुनिश्चित करने के लिए BESCOM को एक अलग खाता प्रमुख बनाए रखने का भी निर्देश है। इसी तर्ज पर, चामुंडेश्वरी इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CESCS) ने भी ₹121.71 करोड़ का राजस्व घाटा बताया है, जिसे वह 2024-25 की खपत पर प्रति यूनिट 15 पैसे अतिरिक्त वसूल कर पूरा करेगा।
कांग्रेस दे रही 200 यूनिट दे रही फ्री बिजली, अब घाटे की वसूली कस्टमर्स से
कर्नाटक की काग्रेंस सरकार ने वर्ष 2023 में "गृह ज्योति योजना" लागू की, जिसके माध्यम से राज्य के पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति माह 200 यूनिट तक बिजली निःशुल्क प्रदान की जाती है। इस पहल का उद्देश्य विशेष रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को बिजली खर्च से राहत देना है। योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक का कर्नाटक का निवासी होना और उसके नाम पर घरेलू बिजली कनेक्शन होना आवश्यक है। यदि किसी परिवार की मासिक बिजली खपत 200 यूनिट के भीतर रहती है, तो उन्हें कोई बिल नहीं देना पड़ता, जबकि इससे अधिक खपत होने पर केवल अतिरिक्त यूनिट का ही शुल्क लिया जाता है।
1 अगस्त 2023 से शुरू हुई यह योजना राज्य के लाखों परिवारों के लिए आर्थिक सहायता का महत्वपूर्ण साधन बन चुकी है। वहीं अब जब इस फ्री स्कीम से राजस्व घाटा हो रहा है तब सरकार कस्टर्स से ही इस घाटे की वसूली कर रही है।













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