Bengal panchayat polls: कलकत्ता HC का आदेश न्यायिक शक्तियों का अतिक्रमण-SC से बोला WBSEC
पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने पंचायत चुनावों के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश देकर अपनी न्यायिक शक्तियों की हदें पार की हैं। उसके मुताबिक हाई कोर्ट ने उसे सुनवाई का भी मौका नहीं दिया।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा है, 'याचिकाकर्ता को बिना हलफनामे के द्वारा पर्याप्त मौका दिए हुए केंद्रीय बलों की नियुक्ति का निर्देश जारी कर दिया गया और ऐसा निर्देश हाई कोर्ट की शक्तियों का अतिक्रमण है।'

हाई कोर्ट को चुनाव प्रक्रिया में दखल का अधिकार नहीं- राज्य चुनाव आयोग
पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कलकत्ता हाई कोर्ट के 15 जून के आदेश को चुनौती दी है। इसमें बताया गया है कि हाई कोर्ट को चुनाव प्रक्रिया में दखल देने का अधिकार नहीं है। इसके लिए आयोग ने संविधान के आर्टिकल 243 'ओ', आर्टिकल 243 'के' और पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव कानून, 2003 का हवाला दिया है।
'केंद्रीय बलों की तैनाती स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की भावना पैदा करने की गारंटी नहीं'
राज्य चुनाव आयोग ने कहा है कि एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय होने के नाते पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव करवाने और उससे जुड़े फैसले लेने के लिए उसके पास अधिकार है। आयोग ने यह भी कहा है कि 'यह मान लिया गया कि राज्य प्रशासन द्वारा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए किया गया प्रबंध अपर्याप्त है और केंद्रीय बलों की तैनाती भी आम जनता में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की भावना पैदा करने की गारंटी नहीं है। इस बात पर भी ध्यान नहीं दिया गया है कि पहले आम जनता में विश्वास बनाने में केंद्रीय बल बुरी तरह से नाकाम रहे हैं...।'
'अखबारी रिपोर्ट के आधार पर दिए गए निर्देश'
आयोग के मुताबिक,'कुछ अखबारों की रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय बलों की तैनाती के निर्देश दिए गए और यह भी नहीं देखा गया कि क्या वास्तव में कोई शिकायत दर्ज हुई है,जिससे साक्ष्य के नियम का कानून नजरअंदाज हुआ है।'
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को होगी सुनवाई
बंगाल चुनाव आयोग की शिकायत है कि हाई कोर्ट ने जिस तरह से इस मामले में दखल दिया है, उसे चुनाव कराने के अपने अधिकारों का उपयोग करने में समस्या पैदा हुई है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुनवाई को मंजूरी दी है।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस एमएम सुंद्रेश की वैकेशन बेंच इसपर मंगलवार को सुनवाई के लिए तैयार हुई है। इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार और पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग पंचायत चुनावों में केंद्रीय बलों की तैनाती के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।
8 जुलाई के चुनाव से पहले हो रही हैं हिंसक घटनाएं
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में 8 जुलाई को होने वाले पंचायत चुनावों से पहले राज्य से इससे जुड़ी कई हिंसक घटनाएं सामने आई हैं। बीरभूम के अहमदपुर में तो बीडीओ के दफ्तर में ही कथित रूप से बम फोड़े गए। मालदा जिले में एक टीएमसी कार्यकर्ता को पीटकर हत्या कर दी गई।
एक चरण में चुनाव के बाद 11 जुलाई को वोटों की गिनती होनी है। बंगाल चुनावी हिंसा के लिए हमेशा से कुख्यात रहा है। देश में चुनाव सुधारों के बाद कई राज्यों में ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक लगाम लगे हैं। लेकिन, बंगाल में इसे दूर करने की कभी गंभीरता से कोशिश होती नहीं दिखी है। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले वहां मुख्य रूप से सत्ताधारी टीएमसी और विपक्षी बीजेपी के बीच जबर्दस्त मुकाबले की संभावना है।












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