बंगाल पंचायत चुनाव में बीजेपी को एक मुद्दे पर मिला कांग्रेस का पूर्ण समर्थन, टीएमसी को बहुत भारी पड़ गया

West Bengal panchayat election 2023: पंचायत चुनावों के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के मुद्दे पर ममता बनर्जी सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को सुप्रीम कोर्ट में बड़ा झटका लगा है। लेकिन, इस मुद्दे का दिलचस्प पहलू ये है कि जब सुप्रीम कोर्ट में बहस चल रही थी, तो ममता सरकार के खिलाफ कांग्रेस, बीजेपी के साथ डटकर खड़ी थी।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ममता सरकार की ओर से और मीनाक्षी अरोड़ा राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से दलीलें दे रहे थे। उन्होंने सर्वोच्च अदालत को यह समझाने की पूरी कोशिश की 8 जुलाई के पंचायत चुनावों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती का कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश सरासर गलत है।

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सुप्रीम कोर्ट से लगा है ममता सरकार को झटका
लेकिन, सुप्रीम कोर्ट इन दलीलों से सहमत नहीं हो रहा था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह भी कहा कि बंगाल में पहले के चुनावों में भी हिंसा देखने को मिली हैं। कोर्ट ने कहा, 'तथ्य ये है कि हाई कोर्ट का आदेश आखिरकार यह सुनिश्चित करने के लिए है कि पूरे पश्चिम बंगाल राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोजित हो। क्योंकि, प्रदेश में एक ही दिन में स्थानीय निकायों के लिए चुनाव हो रहे हैं और बनाए जा रहे बूथों की संख्या को ध्यान में रखते हुए, हमें लगता है कि हाई कोर्ट के आदेश में किसी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।'

बीजेपी नेता की याचिका पर हाई कोर्ट ने दिया था आदेश
इस दौरान वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे बीजेपी नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी की ओर से अदालत में पेश हुए थे। उन्हीं की याचिका पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने पंचायत चुनावों के दौरान केंद्रीय दलों की तैनाती का आदेश दिया था, जिसे ममता सरकार और पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट में भी बीजेपी नेता ने ममता सरकार का विरोध किया
साल्वे ने अदालत से कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में केंद्रीय बलों की तैनाती रोकने के लिए एजेंडा चला रही है। उन्होंने अदालत को बताया कि राज्य में कई उम्मीदवारों को परेशान किया जा रहा है और यहां तक कि नामांकन दाखिल करने से भी रोका गया है।

कांग्रेस ने भी भाजपा नेता की दलीलों का समर्थन किया
इस दौरान कांग्रेस ने भी भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी का समर्थन किया और राज्य सरकार के विरोध में दलीलें रखीं। वरिष्ठ वकील और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा कांग्रेस के लोकसभा सांसद अधीर रंजन चौधरी की ओर से अदालत में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट से कहा कि उनके क्लाइेंट हाई कोर्ट के आदेश से काफी पहले से ही यानी अप्रैल से ही केंद्रीय बलों की तैनाती पर जोर दे रहे हैं।

भाजपा-कांग्रेस ने टीएमसी पर लगाया उम्मीदवारों को डराने का आरोप
आखिरकार अदालत में पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के वकील की दलीलें ही काम कर गईं और ममता सरकार को जोरदार झटका लगा। यही नहीं कांग्रेस और बीजेपी ने नामांकन वापसी के आखिर दिन टीएमसी के कथित दबाव की वजह से अपने-अपने उम्मीदवारों को झुंड में इकट्ठे रखने की मजबूरी का भी आरोप लगाया।

दोनों दलों ने उम्मीदवारों को पार्टी दफ्तर में 'छिपाकर' रखा
मंगलवार को नामांकन वापसी के अंतिम दिन मुर्शिदाबाद के बर्दवान में गुंडों ने कई उम्मीदवारों से नामांकन दस्तावेज भी छीन लिए। बीडीओ दफ्तर के बाहर हुई हिंसक झड़प में कांग्रेस के एक पूर्व एमएलए समेत पांच कार्यकर्ता भी जख्मी हो गए। कांग्रेस और बीजेपी ने कई उम्मीदवारों को पार्टी दफ्तरों में छिपाकर रखने का भी दावा किया है। उनके मुताबिक टीएमसी की ओर से उनपर नामांकन वापसी का दबाव डाला जा रहा था।

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