बेनामी संपत्तिः तेजस्वी का मूंछ ना आने वाला तर्क काम नहीं आएगा
बेनामी संपत्ति लेनदेन (निषेध) कानून 1988 और 2016 में हुए संशोधनों में बेनामीदार की उम्र को कोई महत्व नहीं दिया गया है।
नई दिल्ली। बेनामी संपत्ति के मामले में बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव की नाबालिग होने की दलील टिक नहीं पाएगी। बेनामी कानून 1988 ऐक्ट और उसके बाद संशोधनों में ये साफ किया गया है कि बेनामी संपत्ति को केंद्र सरकार जब्त कर सकती है। बेनामी कानून में उम्र का कोई जिक्र नहीं है।

बेनामी संपत्ति कानून में उम्र का महत्व नहीं
बेनामी संपत्ति लेनदेन (निषेध) कानून 1988 और 2016 में हुए संशोधनों में बेनामीदार की उम्र को कोई महत्व नहीं दिया गया है। इस वजह से तेजस्वी यादव की दलील बेनामी संपत्ति मामले में सुनवाई के दौरान नहीं टिक पाएगी। इसका सीधा मतलब ये हुआ कि तेजस्वी और उनकी बहन मीसा भारती की उम्र बेनामी संपत्ति के अधिग्रहण के समय कुछ भी रही हो, केंद्रीय एजेंसियां इन्हें जब्त कर सकती हैं।

केंद्र बेनामी संपत्ति को जब्त कर सकता है
1988 के कानून और 2016 के संशोधन बेनामी संपत्ति के जब्ती को लेकर क्लियर है। संशोधन बेनामी संपत्ति की खरीद-बिक्री करने वालों के खिलाफ सजा का प्रावधान जोड़ता है। 2016 से पहले बेनामी संपत्ति के अधिग्रहण पर संशोधन का प्रावधान लागू होगा या नहीं, यह कोर्ट के ऊपर निर्भर करता है।

तेजस्वी ने नाबालिग होने का हवाला दिया है
आपको बता दे कि बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ बेनामी संपत्ति का केस दर्ज हुआ है। जिसके बाद से उन पर अपने पद से इस्तीफे का दबाव है। मामला दर्ज होने के बाद बेनामी संपत्ति के मामले में तेजस्वी ने खुद के नाबालिग होने की बात कही थी। तेजस्वी ने बताया था कि जब बेनामी संपत्तियों का कथित तौर पर अधिग्रहण किया गया, तब उनकी उम्र 14-15 साल रही होगी। तेजस्वी यादव ने कहा था कि कोई नाबालिग कैसे गड़बड़ी कर सकता है।












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