तेलंगाना चुनाव से पहले भाजपा के चुनाव पैनल पर आया संकट, जानें क्‍यों हुआ ऐसा

तेलंगाना विधानसभा चुनाव की उल्‍टी गिनती शुरू हो चुकी है लेकिन राज्‍य में भाजपा पूरी तरह संकट में नजर आ रही है। इसकी वजह है कि भाजपा ने जो चुनाव के लिए राज्‍य में समितियां गठित की थी उनमें से अधिकांश निष्क्रिय हो चुकी है। ये समितियां इसलिए भंग हो चुकी है क्‍योंकि उनके प्रमुख और उससे जुड़े लोग या तो भाजपा छोड़ चुके हैं या स्‍वयं को इसकी गतिविधियों से दूर रखे हुए हैं।

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बता दें कई महीने पहले तेलंगाना चुनाव की तैयारी और राज्‍य में भाजपा का नेतृत्‍व मजबूत करने के लिए चुनाव संबंधी 14 समितियों का गठन किया था। हालांकि उनमें से चुनाव आते-आते अधिकांश सक्रिय नहीं है।

भाजपा की इन 14 समितियों में पूर्व सांसद विवेक वेंकटस्वामी की अध्यक्षता वाली भाजपा घोषणापत्र समिति थी, जिन्‍होंने भाजपा छोड़ दी है और कांग्रेस पार्टी में शामिल हो चुके हैं। वहीं पैनल के संयोजक अल्लेटी महेश्वर रेड्डी और संयुक्त संयोजक कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी भी पार्टी के चुनाव घोषणापत्र को तैयार करने की प्रक्रिया में पूरी तरह से शामिल नहीं हैं।

महेश्वर रेड्डी, जिन्हें निर्मल विधानसभा क्षेत्र दिया गया था वो चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं और विश्वेश्वर रेड्डी जो पार्टी की गतिविधियों से संतुष्‍ट नहीं हैं, इस कारण बीते कुछ महीनों से पार्टी गतिविधियों से दूर हैं।भाजपा नेतृत्‍व इसलिए चितिंत क्‍योंकि जो विवेक भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं उन्‍हें भाजपा के घोषणापत्र के लिए महत्वपूर्ण इनपुट की जानकारी थी और इतने कम समय में उनकी जगह उनका विकल्‍प तलाशना भाजपा के लिए बड़ी मुश्किल बन चुका है।

याद रहे विवेक ने पिछली विधानसभा 2028 के चुना के लिए घोषणापत्र तैयार किया था, इसके साथ ही उन्‍हें तेलंगाना राज्‍य के मुद्दों के बारे में अच्‍छी जानकारी है।

पार्टी के सूत्रों के अनुसार भाजपा ने जो उम्‍मीदवारों को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतरा है, उन्‍हें बिना चुनावी घोषणा पत्र के लोगों से बातचीत करने में काफी समस्‍या हो रही है क्‍योंकि पार्टी के घोषणा पत्र के आधार पर वोटर अपने फैसले करते हैं और वोट के लिए पार्टी चुनते हैं।

वहीं पूर्व सांसद विजयशांति को आंदोलन समिति का अध्यक्ष बनाया गया था लेकिन वह पिछले कुछ महीनों से कार्रवाई से गायब हैं। इसकी वजह है कि पार्टी नेतृत्‍व ने उन्‍हें लंबे समय से दरकिनार कर दिया है और यहां तक ​​कि आगामी चुनावों के लिए उन्हें किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से नामांकित करने से भी इनकार कर दिया है।

वहीं पूर्व विधायक एन इंद्रसेन रेड्डी को त्रिपुरा का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद मुख्यालय समन्वय के अध्यक्ष का पद भी खाली हो गया है। ऐसे ही तेलंगाना में भापजा की चुनाव से जुड़ी जो कमेटियां बनी हैं, या तो उन्‍हें नेता छोड़ चुके हैं या फिर कमेटी से दूसरी बना रखे हैं।

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