अब सांसद और विधायक नहीं कर पाएंगे वकालत? बार काउंसिल ने जारी किया नोटिस

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नई दिल्ली। अक्सर हम सुनते हैं कि कई मंत्री, नामी सांसद, विधायक और अन्य नेता वकील हैं। वो उस वक्त भी वकालत करते हैं जब किसी संसद, विधानसभा या विधानपरिषद के सदस्य होते हैं। अब इस पर रोक लग सकती है। बार काउंसिल ने उन सभी सांसदों, विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों (विधायक) को नोटिस भेजा है जो बतौर वकील प्रैक्टिस करते हैं, उन्हें प्रैक्टिस करने से रोका जा सकता है अगर वो किसी अन्य संवैधानिक पद पर हैं। 

एक सप्ताह के भीतर देना है जवाब

एक सप्ताह के भीतर देना है जवाब

सभी सांसदों, विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों (विधायक) को नोटिस का जवाब एक सप्ताह के भीतर देना है। एक तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति इस मामले पर फैसला करेगी। बता दें कि 500 से ज्यादा वकील, जो सांसद, विधायक और एमएलसी हैं, को नोटिस जारी किए हैं। नोटिस इसलिए जारी किए गए ताकि अगर निर्णय लिया जाए जो उनके पक्ष में ना हो, तो वो यह दावा नहीं कर सकते हैं कि किसी तरह का उल्लंघन किया गया है।

भाजपा के नेता ने किया था अनुरोध

भाजपा के नेता ने किया था अनुरोध

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष को लिखित रूप में विधायकों और सांसदों को बतौर वकील बहस करने से रोकने का अनुरोध किया था।

अश्वनी उपाध्याय ने कहा था...

अश्वनी उपाध्याय ने कहा था...

संदर्भ के रूप में एक पहले के फैसले का हवाला देते हुए, उन्होंने ट्वीट किया था: "सुप्रीम कोर्ट फैसले के अनुसार 8.4.1996 और बीसीआई नियम 49, किसी भी व्यक्ति, फर्म, निगम या सरकार के पूर्णकालिक वेतनभोगी कर्मचारी किसी भी पहले एक वकील के रूप में अभ्यास नहीं कर सकते। अदालत में विधायकों और सांसदों को वकील के रूप में अभ्यास करने से रोकने के लिए सीजेआई और बीसीआई अध्यक्ष को अपना प्रतिनिधित्व प्रस्तुत किया।

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English summary
Bar Council issues notice to all MLA/MLC/MPs who are practicing as lawyers
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