बसपा, सपा, भाजपा और कांग्रेस में से किसका होगा बांदा?

बांदा। अगले महीने की 7 तारीख से लोकसभा चुनावों का मेला शुरू हो जायेगा। हर किसी की नजर यूपी और बिहार की सीटों पर हैं। क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि पीएम की कुर्सी और दिल्ली की सत्ता का रास्ता यूपी और बिहार से ही होकर जाता है। इसलिए बीजेपी ने अभी यूपी में अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

सबसे बड़े लोकसभा सीटों वाले प्रदेश यूपी की बांदा सीट भी चारों दलों यानी कि बसपा, सपा, भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का विषय बनी हुई है। इसलिए खासकर यहां की बांदा सीट पर तगड़ा मुकाबला होने के आसार है।

आपको बता दें कि जहां बसपा ने सपा के सांसद रहे आर.के. सिंह पटेल पर दांव लगाया है, वहीं सपा ने अपने मिजार्पुर सांसद बालकुमार पटेल को मैदान में उतारा है और कांग्रेस ने बांदा सदर के विधायक विवेक सिंह को टिकट थमाया तो भाजपा ने अभी अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया।

उत्तर प्रदेश की बांदा लोकसभा सीट कांग्रेस व भाजपा के लिए भले ही महत्वपूर्ण न हो, लेकिन बसपा व सत्तारूढ़ सपा के लिए जरूर अति महत्वपूर्ण बन गई है। एक तो बुंदेलखंड बसपा के उदयकाल से ही उसका मजबूत गढ़ रहा है और मायावती की हर सरकार में कम से कम चार कैबिनेट मंत्री और एक दर्जन से ज्यादा राज्यमंत्री के ओहदे वाले रहे हैं।

दूसरी बात यह कि पिछले चुनाव में सपा के टिकट पर सांसद चुने गए आर.के. सिंह पटेल को इस बार बसपा ने उम्मीदवार घोषित किया है। अपने सांसद को झटक लिए जाने से सपा खिसियाई हुई है और किसी भी दशा में वह पटेल को सबक सिखाना चाहती है। इसीलिए सपा ने मिर्जापुर से अपने सांसद बालकुमार पटेल (मृत दस्यु सरगना ददुआ के भाई) को यहां मैदान में उतारा है।

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कांग्रेस

कांग्रेस

कांग्रेस ने बांदा सदर से विधायक विवेक सिंह को टिकट दिया है और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने डॉ. रामचंद्र सरस (यादव) को टिकट दिया है।

भाजपा

भाजपा

भाजपा ने अभी अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है, कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा में पूर्व सांसद रमेशचंद्र द्विवेदी और एक बाहरी भाजपा नेता के बीच फैसला हो सकता है।

भाकपा

भाकपा

बात भाकपा की करें तो कभी बुंदेलखंड उसका गढ़ हुआ करता था, लेकिन बसपा के 'जय भीम' की चपेट में आकर 'लाल सलाम' की आवाज दब गई। दलित और कामगार वर्ग भाकपा के साथ जुड़ा था, लेकिन नब्बे के दशक में यह वर्ग बसपा से जुड़ गया।

सपा

सपा

बुजुर्ग राजनीतिक विश्लेषक रणवीर सिंह चौहान कहते हैं कि भाकपा का जनधार खिसका जरूर है, लेकिन उम्मीदवार यादव बिरादरी से हैं, इसलिए सपा के यादव मतों में बिखराव हो सकता है। हालांकि सपा के बबेरू विधायक विश्वंभर सिंह यादव कहते हैं कि आर.के. पटेल ने सपा को धोखा दिया है, इसलिए हर हाल में मतों के बिखराव को रोकने की रणनीति बनाई जा रही है।

बसपा

बसपा

वहीं, उत्तर प्रदेश बसपा विधायक दल के उपनेता और नरैनी से विधायक गयाचरण दिनकर (पूर्व मंत्री) का दावा है कि यह सीट बसपा के खाते में ही जाएगी। उनका तर्क है कि पटेल पुराने बसपाई हैं और सपा उम्मीदवार से उनकी छवि अच्छी है।

कांग्रेस

कांग्रेस

कांग्रेस के बांदा जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित कहते हैं कि कांग्रेस उम्मीदवार को सोनिया गांधी और राहुल गांधी की लोकप्रियता का फायदा मिलेगा। वह कहते हैं कि उम्मीदवार की छवि से प्रभावित होकर विधानसभा चुनाव की भांति अल्पसंख्यक वर्ग एकतरफा समर्थन करेगा।

भाजपा

भाजपा

भाजपा ने अभी अपना उम्मीदवार तो नहीं घोषित किया है, लेकिन बांदा जिलाध्यक्ष बालमुकंद शुक्ला कहते हैं, "पूरे देश में नरेंद्र मोदी की लहर है, ऐसे में बांदा सीट भाजपा की झोली में ही होगी।" कुल मिलाकर बांदा सीट पर बसपा, सपा, भाजपा और कांग्रेस के बीच चतुष्कोणीय मुकाबला के आसार बन रहे हैं, परिणाम क्या होगा? यह मतदाता तय करेंगे।

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