ईद पर जुनैद के घर में मातम, मां ने नहीं पहनी नई चूड़ी, नहीं बनी सेवई और बिरयानी
नमाज पढ़ाने के बाद हुई दुआ में इमाम ने जुनैद को शहीद का दर्जा दिया। उन्होंने जुनेद को जन्नत में अव्वल मुकाम देने की खुदा से दुआ की।
बल्लभगढ़। पूरा देश आज ईद का जश्न मना रहा है। लोग सफेद कुर्ता-पायजामा पहनकर एक दूसरे से गले मिल रहे हैं। लेकिन एक गांव ऐसा है जहां खुशी के इस त्योहार के बीच मातम पसरा हुआ है। जी हां हम बात कर रहे हैं नफरती हिंसा का शिकार हुए जुनैद हाफिज के गांव बल्लभगढ़ की जहां लोगों आज बाजुओं पर काली पट्टी बांधकर नमाज अता की। जुनैद के परिवारवाले और गांव के लोग एक साथ होकर उसकी मौत का इंसाफ मांग रहे हैं।

क्या कहना है जुनैद के घरवालों को
''60 सालों में यह पहली ईद है जब मैंने नई चूडि़यां नहीं पहली, बिरयानी नहीं बनाया। हर बार मैं सुबह उठकर मिठाईयां बनाती थी लेकिन बार ऐसा नहीं कर सकी। मैं अपने दिमाग से इस बात को नहीं निकाल पा रही कि जुनैद अब हमारे साथ नहीं है।'' यह कहना है जुनैद की चाची का।
वहीं गांव के लोगों का कहना है कि ईद की नमाज पढ़ना जरूरी है, लेकिन उस वक्त इसके बाद की खुशी के कोई मायने नही रह जाते है, जब एक बच्चा और ऊपर से हाफिज की दर्दनाक हत्या कर दी जाती है। इस घटना से सभी लोग अभी सदमे में है।
नमाज में जुनैद को शहीद का दर्जा
नमाज पढ़ाने के बाद हुई दुआ में इमाम ने जुनैद को शहीद का दर्जा दिया। उन्होंने जुनेद को जन्नत में अव्वल मुकाम देने की खुदा से दुआ की। उन्होंने कहा कि जिस तरह हाफिज जुनैद की मजहब की पहचान पर हत्या हुए हैं, इससे उसने खुदा की नजरों में शहीद का दर्जा हासिल किया है।
क्या था मामला
जुनैद हाफिज गुरुवार की रात लोकल ट्रेन से दिल्ली से बल्लभगढ़ जा रहे थे। उनकी उम्र 16 साल थी। ट्रेन में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला. हुआ ऐसा कि जुनैद, उनके भाई हाशिम और शाकिर और पड़ोसी दोस्त मोहसिन दिल्ली के सदर बाज़ार से ईद की खरीदारी कर घर लौट रहे थे। जब वो ट्रेन में चढ़े तो ट्रेन पूरी तरह खाली थी, तो उन्हें बैठने के लिए सीट भी मिल गई। आगे चलकर ओखला में 20-25 लोग ट्रेन में चढ़े थे।
चढ़ने में धक्का मुक्की हुई। उसी में जुनैद को धक्का लगा तो वो नीचे गिर गए। इस पर जुनैद ने कहा कि धक्के क्यों मार रहे हो। उन्होंने उनके सर पर टोपी देख कर कहा कि तुम मुसलमान हो, देशद्रोही हो, तुम पाकिस्तानी हो, मांस-मीट खाते हो। उन लोगो ने सर से टोपी हटा दी और उनकी दाढ़ी पकड़ने की कोशिश की। जब उन्होंने रोकने की कोशिश की तो उन्होंने मार-पीट शुरू कर दी।
अगला स्टेशन तुगलकाबाद आने तक वो उन्हें मारते रहे। उन्हें लगा कि जुनैद मर गए हैं तो अगले स्टेशन असावटी में उन्हें फेंक दिया। फिर वहां मौजूद लोगों ने एंबुलेंस को फोन किया। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले जुनैद दम तोड़ चुके थे।












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