Electronic Interlocking: रेलवे में क्या होता है इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग? जिसकी वजह से हुआ बालासोर रेल हादसा

Balasore Train Accident: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि ओडिशा के बालासोर में दुखद ट्रेन दुर्घटना "इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव" के कारण हुई है। जिसमें अब तक 275 लोगों की मौत हुई है।

Electronic Interlocking

What is Electronic Interlocking In Railways: ओडिशा बालासोर रेल हादसे की प्रमुख वजह का पता चल गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार (04 जून) को कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम में बदलाव के कारण बालासोर रेल दुर्घटना हुई है।

अश्विनी वैष्णव ने कहा, 'यह हादसा एक अलग मुद्दा है। यह पॉइंट मशीन, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के बारे में है। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के दौरान जो बदलाव हुआ, उसके कारण दुर्घटना हुई। यह किसने किया और कैसे हुआ, इसके बारे में जांच चल रही है।''

अश्विनी वैष्णव के इस बयान बाद अब ये चर्चा हो रही है कि आखिर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम क्या है? आइए जानें रेलवे में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग क्या है और कैसे काम करता है...?

How Interlocking work? कैसे काम करता है इंटरलॉकिंग?

रेलवे के सिग्नल और इंटरलॉकिंग विभाग में 1975 से 2015 तक काम कर चुके राजेंद्र अग्निहोत्री के मुताबिक, '' रेल से यात्रा करते समय हम सब ने छोटे बड़े हर तरह के रेलवे यार्ड देखे हैं। इन यार्डों में कई लाइन होती हैं। उन्हें आपस में जोड़ने के लिए 'पाइंट्स' होते हैं। पॉइंट्स चलाने के लिए हर पॉइंट पर एक मोटर लगी होती है। सिग्नल की बात करें तो, सिग्नल के द्वारा लोको पायलट को अनुमति दी जाती है कि वह अपनी ट्रेन के साथ रेलवे स्टेशन के यार्ड में प्रवेश कर सकते हैं।

इन्ही दोनों पॉइंट्स और सिग्नलों के बीच में एक लॉकिंग होती है। ये लाकिंग इस प्रकार से होती है कि पाइंटस् सैट होने के बाद जिस लाइन का रूट सैट हुआ हो उसी लाइन का सिग्नल आए। इसी लाकिंग को इंटरलॉकिंग कहते हैं।

इस पूरी बात को समझाने के लिए चार लाइन के रेलवे स्टेशन का राजेंद्र अग्निहोत्री ने फोटो भी शेयर की है। आप इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के बारे में ज्यादा जानने के लिए इस लिंक पर जा सकते हैं।

Electronic Interlocking

What is Electronic Interlocking in railway: रेलवे में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग क्या है?

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम यार्ड और पैनल इनपुट पढ़ने के लिए एक माइक्रोप्रोसेसर आधारित इंटरलॉकिंग गैजेट है। यह सिस्टम पारंपरिक रिले इंटरलॉकिंग सिस्टम का विकल्प है।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नल अरेंजमेंट की एक व्यवस्था है जो लाइन और ट्रेनों के बीच एक ऐसा सिस्टम तैयार करती है, जो ट्रेन कोलिजन होने से बचाती है। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम का उद्देश्य यह है कि किसी भी ट्रेन को तब तक आगे बढ़ने का सिग्नल नहीं मिलता जब तक कि लाइन किल्यर ना हो।

आसान शब्दों में कहे तो इंटरलॉकिंग ट्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक सिस्टम है। इंटरलॉकिंग का मतलब है कि अगर लूप लाइन सेट है, तो लोको पायलट को मेन लाइन का सिग्नल नहीं दिया जाएगा। और अगर मेन लाइन सेट है, तो लूप लाइन का सिग्नल नहीं जाएगा।

Electronic Interlocking Benefits? इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के क्या फायदे हैं?

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के कई फायदे हैं। इससे सिस्टम रूट सेटिंग, रूट रिलीज, पॉइंट ऑपरेशन, ट्रैक ऑक्यूपेंसी मॉनिटरिंग, ओवरलैप प्रोटेक्शन, क्रैंक हैंडल ऑपरेशन, लेवल क्रॉसिंग गेट इंटरलॉकिंग और ब्लॉक वर्किंग के प्रावधान सहित कई सुविधाएं मिलती है।

Interlocking Type: रेलवे में इंटरलॉकिंग कितने प्रकार के होते हैं?

रेलवे में इंटरलॉकिंग मुख्यत दो प्रकार के होते हैं, पहला- मैकेनिकल इंटरलॉकिंग या इलेक्ट्रिकल इंटरलॉकिंग। दूसरा है, इलेक्ट्रॉनिक/कंप्यूटर-आधारित इंटरलॉकिंग

How Electronic Interlocking work? क्या होता है इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम?

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) एक ऐसा सिग्नलिंग अरेंजमेंट है, जिसमें इंटरलॉकिंग लॉजिक सॉफ्टवेयर बेस्ड होता है। इसमें कोई भी बदलाव यानी मोडिफिकेशन करना आसान होता है। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम एक प्रोसेसर बेस्ड सिस्टम होता है। इसके फेल होने के मामले में भी न्यूनतम सिस्टम डाउन टाइम होता है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+