'पानी भी लगता था खून जैसा...', Balasore Accident का NDRF जवानों पर पड़ा बुरा असर
बालासोर हादसे ने NDRF जवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाला। इसके लिए उनकी काउंसलिंग करवाई जा रही।

ओडिशा के बालासोर में 2 जून को भयानक ट्रेन हादसा हुआ, जहां तीन ट्रेनें आपस में टकरा गईं। इस घटना में 288 लोगों की मौत हुई, जबकि 900 से ज्यादा लोग घायल हुए। घटना के तुरंत बाद NDRF ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया था, लेकिन वहां पर इतने भयानक हालात थे कि उसके जवानों पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
NDRF के महानिदेशक अतुल करवाल के मुताबिक बालासोर हादसे ने बचावकर्मियों पर बहुत बुरा असल डाला है। वो हाल ही में अपने जवानों से मिले थे। एक ने उनको बताया कि उसे मतिभ्रम था, वो जब पानी भी देखता, तो उसे खून नजर आता। एक अन्य कर्मचारी की तो और बुरी हालत थी। अभियान के बाद से उसको खाना खाने का मन ही नहीं हो रहा।
इस घटना में NDRF की कुल नौ टीमों को लगाया गया था। उसने 121 शव को निकाला और 44 लोगों को मौके से बचाया था।
वहीं दूसरी ओर मंगलवार को NDRF चीफ ने दिल्ली के विज्ञान भवन में एक दिवसीय 'आपदा प्रतिक्रिया के लिए क्षमता निर्माण पर वार्षिक सम्मेलन-2023' का उद्घाटन किया। उन्होंने कार्यक्रम में जवानों के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात की।
उन्होंने बताया कि ऐसे हादसे मानसिक रूप से बुरा प्रभाव डालते हैं। ऐसे में वो अपने कर्मचारियों की काउंसलिंग करवाते रहते हैं। बालासोर हादसे के बाद भी इसके सेशन करवाए जा रहे।
इससे पहले NDRF ने तुर्की में आए विनाशकारी भूकंप के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन में हिस्सा लिया था। उस घटना में तो 50 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई। अतुल करवाल के मुताबिक तुर्की से आई टीम की भी काउंसलिंग करवाई गई थी।
95 प्रतिशत कर्मचारी फिट
उन्होंने बताया कि पिछले साल तक इस तरह के कई विशेष काउंसलिंग सेशन करवाए गए थे, जिसमें कुल 18 हजार कर्मचारियों में से 95 प्रतिशत फिट पाए गए। उनका संगठन कर्मचारियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अन्य कदम भी उठाता रहता है।












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