बालासोर रेल हादसे की जांच कमेटी के सदस्य ने उठाया गंभीर सवाल, लिखा असहमति नोट
ओडिशा के बालासोर रेल हादसे के बाद रेलवे की ओर से प्राथमिक जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी के एक सदस्य ने जांच रिपोर्ट को लेकर असहमति नोट लिखा है।

ओडिशा के बालासोर रेल हादसे की जांच के लइए रेल मत्रायलय की ओर से प्राथमिक जांच के लिए पांच सदस्यों की कमेटी का गठन किया गया था। इस बीच पांच सदस्यीय कमेटी के एक सदस्य का इस रेल हादसे को लेकर एक असहमति पत्र सामने सामने आय़ा है।
2 जून को हुए रेल हादसे के बाद भारतीय रेलवे की ओर से इस कमेटी का गठन किया गया था, कमेटी से 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया था। प्रथामिक रिपोर्ट को 3 जून को जमा किया गया है, जिसमे सिग्नल के खराब होने को हादसे की संभावित वजह बताया गया है। इस हादसे में 278 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 1100 लोग घायल हुए थे।
पाचं सदस्यों की कमेटी में से एक सदस्य ने असहमित नोट दायर किया है। जिसपर वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर एके ममहंता का साइन है। इस नोट में इस बात की आशंका जाहिर की गई है कि यह पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड को छिपाने के लिए की गई है, जिसकी वजह से रेल हादसा हुआ है।
जो असहमति पत्र सामने आया है उसका शीर्ष है कि रेल हादसे के बाद साझा जांच रिपोर्ट से असहमति। महंता ने इस पत्र में कहा है कि मैं प्वाइंट नंबर 4 पर सहमत नहीं हूं, जिसमे कहा गया है कि 17ए लूप लाइन है। आंकड़ों को देखने के बाद यह समझ आया है कि प्वाइंट 17 सामान्य स्थिति के लिए था, लेकिन शायद रेल हादसे के बाद इसे बदल दिया गया। रेल हादसे लेवल क्रॉसिंग के गेट नंबर 94 है जोकि 17ए से पहले आता है।
रिपोर्ट के प्वाइंट नंबर 17ए जोकि ट्रेन की दिशा बदलने के लिए जिम्मेदार है, उसे लूप लाइन के लिए सेट किया गया था, जबकि कोरोमंडल एक्सप्रेस लूप लाइन 128 पर 128 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पहुंची। डेटा लॉगर के अनुसार ट्रेन का का ब्लैक बॉक्स अलग ही कहानी कह रहा है।
महंता के अनुसार यह परिवर्तन सामान्य दिशा के लिए था , यानि ट्रेन को सीधा जाना था। महंता ने दावा किया है कि ट्रेन हादसे के बाद प्वाइंट नंबर 17 को शायद बदला गया है। बता दें कि डेटा लॉगर में सभी रिकॉर्ड दर्ज होते हैं, जिसमे सिग्नल की जानकारी भी होती है, उसे जांच के लिए जब्त कर लिया गया है।












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