Babu Jagjivan Ram News: एक दलित नेता जो PM बनते-बनते रह गए, जानिए बाबू जगजीवन राम से जुड़े अनसुने किस्से
Babu Jagjivan Ram News: देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री और समाजसेवी बाबू जगजीवन राम की जयंती पर आज पूरा देश उन्हें नमन कर रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके जीवन से जुड़े कुछ ऐसे अनसुने किस्से हैं जो आपको जरूर जानना चाहिए।
पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा- देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। वंचितों और पीड़ितों के अधिकार के लिए उनका आजीवन संघर्ष सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

उन्होंने एक वीडियो शेयर किया जिसमे उन्होंने कहा बाबूजी एक मजबूत और लोकतांत्रिक भारत चाहते थे। जब देश ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया, तब वे देश के रक्षा मंत्री थे। बाबूजी आपातकाल के समय अवाज उठाने वाले पहले कांग्रेसी नेता थे। उन्होंने आपातकाल का खुलकर विरोध किया था।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा- बाबू जगजीवन राम जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन। बाबूजी ने अपना पूरा जीवन वंचितों, शोषितों और दलितों के अधिकारों के लिए समर्पित किया। उन्होंने उनके हक और भागीदारी को मजबूत कर देश के लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को मजबूती प्रदान की। उनके विचार और संघर्ष हमें हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे।
बाबू जगजीवन राम की जयंती पर हम आपको उनसे जुड़े कुछ अनसुने किस्से बताएंगे। जो बहुत कम लोगों को पता हैं। ये किस्से न सिर्फ उनके संघर्ष को दिखाते हैं, बल्कि उनके साहस, समझदारी और नेतृत्व की गहराई को भी उजागर करते हैं। आइए जानते है...
"अगर मैं अलग लोटे से पानी पीऊँगा तो पढ़ाई छोड़ दूँगा!"
जब बाबूजी स्कूल में पढ़ते थे, तब दलित होने के कारण उन्हें स्कूल में पानी पीने के लिए अलग लोटा दिया जाता था। एक दिन उन्होंने वह लोटा तोड़ दिया और कह दिया:"अगर मैं अलग लोटे से पानी पीऊँगा तो पढ़ाई छोड़ दूँगा!" इस साहसिक कदम के बाद स्कूल को मजबूर होकर सभी बच्चों को समान लोटे में पानी देना पड़ा। यही बचपन से उनके विद्रोही स्वभाव की झलक थी। कहा जाता है कि उन्होंने BHU में पढ़ाई शुरू की तो उन्हें जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ता था जिससे परेशान होकर वो वहां से कलकत्ता यूनिवर्सिटी चले गए। कलकत्ता में उन्होंने न सिर्फ पढ़ाई की, बल्कि दलित छात्रों के लिए हॉस्टल, छात्रवृत्ति और सुविधाएँ दिलाने के लिए आंदोलन भी किया।
"आत्मशुद्धि की बात करने से पहले समाज को शुद्ध करना होगा"
एक बार गांधीजी ने कहा कि मंदिर प्रवेश से ज़्यादा जरूरी आत्म-शुद्धि है। इस पर बाबू जगजीवन राम ने खुलकर कहा:"आत्मशुद्धि की बात करने से पहले समाज को शुद्ध करना होगा। जब तक हमें बराबरी का अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक शुद्धि अधूरी है।" गांधीजी ने उनकी बात मानी और उन्हें हरिजन आंदोलन में शामिल किया।
बाबूजी प्रधानमंत्री पद की रेस में थे
1977 में इमरजेंसी के बाद जब इंदिरा गांधी की सरकार गिरी, तब जनता पार्टी की सरकार बनी। बाबूजी प्रधानमंत्री पद की रेस में थे, लेकिन कुछ जातिगत और राजनीतिक समीकरणों के चलते मोरारजी देसाई को PM बना दिया गया। बाबूजी ने ये सब चुपचाप सह लिया और देश के विकास में अपना योगदान देते रहें। वे जानते थे कि यदि वे ज़िद करेंगे, तो पार्टी टूट सकती है और जो लोकतंत्र के लिए लड़ाई लड़ी गई थी, वह खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने व्यक्तिगत पद से ऊपर राष्ट्रहित को रखा और खुद ही पीछे हट गए। उन्होंने कहा था "मैं प्रधानमंत्री बन सकता था, लेकिन मैं प्रधानमंत्री बनना नहीं चाहता, जो देश को तोड़ दे।"
बाबूजी फैसलों की तारीफ़ खुद इंदिरा गांधी ने की थी
बाबूजी रक्षा मंत्री थे जब भारत ने पाकिस्तान को हराकर बांग्लादेश बनाया। वे युद्ध की रणनीति, सैनिकों की मनोबल और संसाधनों की व्यवस्था में एकदम सक्रिय थे। उनके फैसलों की तारीफ़ खुद इंदिरा गांधी ने की थी।
आजादी के बाद पहली बार किसी दलित नेता को बड़ा मंत्रालय मिला
आजादी के बाद जब जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें रेल मंत्री बनाया, तो कई सीनियर नेताओं ने इसका विरोध किया। लेकिन नेहरू ने कहा: "जगजीवन राम मेहनत और समझदारी से कहीं आगे हैं - उन्हें उनका हक मिलेगा।" आजादी के बाद पहली बार किसी दलित नेता को इतना बड़ा मंत्रालय मिला था। रेलवे के आधुनिकीकरण में बाबूजी का बहुत बड़ा योगदान दिया।












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