Ambedkar ka nidhan: कब हुआ था बाबासाहेब का निधन, जानिए उनसे जुड़ी बातें
Bhimrao Ambedkar History: 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में जन्मे संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर का निधन 6 दिसंबर 1959 को हुआ था। ऐसे में उनकी जयंती पर जानें उनसे जुड़े कुछ रोचक तथ्य।

संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर की आज 132वीं जयंती हैं। पूरे देश में उनके अनुयायी उनको याद करते हुए श्रद्धांजलि दे रहे हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर को बाबासाहेब के नाम से भी जाना जाता है, उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महू जिले में हुआ था।
बाबासाहेब का परिवार मूलतः मराठी और महार जाति से था। धार्मिक तौर पर वह कबीर पंथी थे। उन्होंने बचपन में अछूत की तरह व्यवहार किए जाने के दर्द को झेला था, जिसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक बुराइयां (छुआछूत, जातिवाद) के खिलाफ संघर्ष में लगा दिया।
अंबेडकर जयंती को समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। आजाद भारत के बाबासाहेब पहले विधि एवं न्याय मंत्री बने थे। उनको भारतीय संविधान का जनक भी कहा जाता है। भीमराव अंबेडकर का निधन 6 दिसंबर 1959 को हुआ था।
बता दें कि 1948 से अंबेडकर मधुमेह (शुगर) से पीड़ित थे। जून से अक्टूबर 1954 तक वह काफी बीमार रहे। इस दौरान उनको काफी कम दिखाई देने लगा था। अपनी आखिरी किताब 'द बुद्ध एंड हिज धम्म' लिखने के तीन दिन बाद 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में अंबेडकर जी का निधन हो गया था। तब उनकी उम्र 64 साल और 7 महीने थी।
निधन के बाद उनकी पार्थिव देह को दिल्ली से विशेष विमान से मुंबई में उनके घर राजगृह लाया गया था, जहां 7 दिसंबर को मुंबई में उनका अंतिम संस्कार बौद्ध रीति-रिवाज के साथ हुआ। उनकी आखिरी किताब 'द बुद्ध एंड हिज धम्म' निधन के बाद 1957 में प्रकाशित हुई थी।
उनके अंतिम संस्कार में उनके लाखों समर्थकों, कार्यकर्ताओं और प्रशंसकों ने भाग लिया। साथ ही उनके पार्थिव को साक्षी मानकर उनके 10,00,000 से ज्यादा अनुयायियों ने भदंत आनन्द कौसल्यायन द्वारा बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी।
अंबेडकर जी से जुड़ी कुछ बातें
आपको अगर मालूम ना हो तो बता देंकि भारत के ध्वज में अशोक चक्र लगवाने वाले भीमराव अंबेडकर ही थे। उनको 9 भाषाओं की जानकारी थी। महज 21 साल की उम्र तक उन्होंने लगभग सभी धर्मों के बारे में पढ़ाई कर ली थी।
उनके पास लगभग 32 डिग्रियां थी। देश के पहले कानून मंत्री भी रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने दो बार लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार हार गए।












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