158 सालों से चल रही अयोध्‍या में सुलह की कोशिश, नतीजा आज तक नहीं निकला

अयोध्या विवाद का हल बैठकर हो सकता है, ऐसा मुश्किल लगता है। ऐसा कहने की वजह ये है कि समझौते की कोशिशें पहले ही कई बार नाकाम हो चुकी है।

नई दिल्ली। अयोध्या के राम-मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर मंगलवर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये मुद्दा बेहद संवेदनशील है। ऐसे में इस संवेदनशील मुद्दे का हल आपसी सहमति से निकाला जाए। सभी पक्ष कोर्ट से बाहर मिल-बैठकर इस मामले का हल निकालें, अगर जरुरत पड़ी तो कोर्ट इसमें मध्यस्थता के लिए तैयार है। कोर्ट के सुझाव के बावजूद इस विवाद का हल बैठकर हो सकता है, ऐसा मुश्किल मालूम लगता है। ऐसा कहने की वजह ये है कि समझौते की कोशिशें पिछले 158 साल से कई बार नाकाम हो चुकी है।

अयोध्या विवाद पर 158 सालों दर्जनों बार हुई सुलह की कोशिशें, नतीजा क्या रहा?

1859 में हुई सुलह की पहली कोशिश

1859 में हुई सुलह की पहली कोशिश

बाबरी मस्जिद और राम मंदिर को लेकर सुलह की पहली कोशिश 1859 में हुई थी। जब देश में अंग्रेजों का राज था। हिन्दू और मुसलमान के बीच दंगे के बाद अंग्रेज अफसरों ने दोनों पक्षों के जिम्मेदार लोगों को बैठाकर मामले को खत्म कराने की कोशिश की। अंग्रेजों ने एक बाड़ लगाकर विवादित जगह को दो भागों में बांट दिया। लेकिन इससे हल नहीं निकला और मामले को लेकर एक पक्ष कोर्ट में चला गया। तब से मामला कोर्ट में भी चल रहा है।

पीवी नरसिम्हा राव ने गठित किया था कमीशन

पीवी नरसिम्हा राव ने गठित किया था कमीशन

आजाद भारत में 1949 में बाबरी मस्जिद में मूर्तियां रखे जाने के बाद नमाज पढ़ाई जाना बंद हो गई। इसके बाद हालात तब बेकाबू हुए जब 1992 में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया। इसके बाद देशभर में दंगे हुए, इसमें बहुत से लोग मारे गए। इसके बाद फिर से सुलह की कोशिश हुई पीवी नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री के काल में। एक कमीशन इसके लिए गठित किया गया, दोनों पक्षों से बातचीत की कोशिशें हुईं लेकिन बातचीत नतीजे तक ना पहुंच पाई।

अटल बिहारी वाजपेयी ने भी की सुलह की कोशिश

अटल बिहारी वाजपेयी ने भी की सुलह की कोशिश

अपने कार्यकाल के दौरान कई विवादित मसलों को सुलझाने के लिए गंभीर प्रयास करने के लिए पहचान रखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कोर्ट के बाहर बाबरी मस्जिद विवाद को सुलझाने की कोशिशें की थीं। वाजपेयी ने इसको लेकर दोनों पक्षों से बात भी की लेकिन वो दोनों पक्षों को समझौतों के लिए एक मंच पर नहीं ला पाए।

हाशिम अंसारी और महंत ज्ञानदास ने भी की थी सुलह की कोशिश

हाशिम अंसारी और महंत ज्ञानदास ने भी की थी सुलह की कोशिश

इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ बैंच के 2010 में फैसला सुनाने से पहले सुप्रीम कोर्ट में फैसला रोकने और दोनों पक्षों में समझौता कराने को लेकर याचिका दायर की गई थी लेकिन समझौते की कोशिश नाकाम रही। मामले में पक्षकार मरहूम हाशिम अंसारी और अखाड़ा परिषद के महंत ज्ञानदास ने भी अपने स्तर पर 2005 में कोशिश की थी कि विवाद सुलझा लिया जाए लेकिन कामयाबी नहीं मिली। 31 मई 2016 को भी विवाद को लेकर हाशिम अंसारी और महंत नरेंद्र गिरी के बीच बैठक तय हुई थी लेकिन हाशिम अंसारी का इससे पहले की इंतकाल हो गया और ये बैठक फिर कभी ना हुई। 2015 में भी समझौते की एक नाकाम कोशिश दोनों पक्षों के बीच हुई थी।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+