राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा करने वाले पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित का निधन, PM मोदी ने जताया शोक
Pandit Laxmikant Dixit Death: अयोध्या के राम मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान मुख्य पुजारी रहे पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित का निधन हो गया है। 86 वर्षीय पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित का आज शनिवार 22 जून को वाराणसी में निधन हुआ।
पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित के परिजनों के मुताबिक आज सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी, जिसके कुछ देर बाद उनका निधन हो गया। 22 जनवरी को राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा में पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित 121 वैदिक ब्राह्मणों का नेतृत्व करने वाले मुख्य पुजारी थे। पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित काशी में रहते थे।

काशी के विद्वान पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित के निधन से वाराणसी में शोक की लहर है। उनकी अंतिम यात्रा उनके निवास मंगलागौरी से निकाली जाएगी। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शोक जताया है।
पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा, ''देश के मूर्धन्य विद्वान और सांगवेद विद्यालय के यजुर्वेदाध्यापक लक्ष्मीकांत दीक्षित जी के निधन का दुखद समाचार मिला। दीक्षित जी काशी की विद्वत् परंपरा के यशपुरुष थे। काशी विश्वनाथ धाम और राम मंदिर के लोकार्पण पर्व पर मुझे उनका सान्निध्य मिला। उनका निधन समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।''
सीएम योगी आदित्यनाथ ने पोस्ट में लिखा, ''काशी के प्रकांड विद्वान एवं श्री राम जन्मभूमि प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य पुरोहित, वेदमूर्ति, आचार्य श्री लक्ष्मीकांत दीक्षित जी का गोलोकगमन अध्यात्म व साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति है। संस्कृत भाषा व भारतीय संस्कृति की सेवा हेतु वे सदैव स्मरणीय रहेंगे। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान एवं उनके शिष्यों और अनुयायियों को यह दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।''
Who was pandit laxmikant dixit: कौन थे पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित
- काशी (वाराणसी) के पंडित लक्ष्मीकांत मथुरानाथ दीक्षित, देश के मशहूर पुजारी रह चुके हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इनके यजमान थे।
- पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित के मूल रूप से महाराष्ट्र के शोलापुर जिले के जेऊर के रहने वाले थे। उनका परिवार कई पीढ़ियों पहले वाराणसी आ गया था और यहीं बस गया था।
- पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित 17वीं सदी के विद्वान गागा भट्ट के प्रत्यक्ष वंशज थे, जिन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक की अध्यक्षता की थी।
- पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित वाराणसी के मीरघाट स्थित सांगवेद महाविद्यालय के वरिष्ठ आचार्य थे। उन्हें यजुर्वेद का बड़ा विद्वान माना जाता था।
- पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित ने अपने चाचा गणेश दीक्षित भट्ट से वेद और अनुष्ठान की दीक्षा ली थी।












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