अयोध्या विवाद: राजीव धवन ने फाड़े जिस किताब से लिए दस्तावेज और नक्शा, उसके लेखक क्या बोले

अयोध्या विवाद:

नई दिल्ली। अयोध्या विवादित मामले की सुनवाई के दौरान बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ने एक नक्शा और कुछ दस्तावेज फाड़ दिए। ये दस्तावेज हिन्दू महासभा के वकील विकास सिंह ने धवन को सौंपे थे। जिस किताब से ये नक्शा लिया गया था उसके लेखक पूर्व आईपीएस किशोर कुणाल हैं। किशोर कुणाल ने नक्शा फाड़े जाने पर कहा, धवन एक बुद्धिजीवी हैं, उन्होंने सोचा कि अगर यह नक्शा अदालत के सामने पेश किया जाता है तो उनका केस बहुत कमजोर हो जाता। अगर उन्हें आपत्ति थी तो उनको नक्शा ना फाड़कर अदालत के सामने अपनी बात रखनी चाहिए थी।

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कुणाल की ये किताब 'अयोध्या रीविजिटेड' 2016 में प्रकाशित की गई थी, जिससे निकालकर नक्शा वकील राजीव धवन को दिया गया था। किताब को रिकॉर्ड की तरह पेश करने की दरख्वास्त हिन्दू महासभा के वकील ने अदालत से की थी। किताब में विवादित जमीन से जुड़े तीन नक्शे हैं।

'अयोध्या रीविजिटेड' 70 साल के कुणाल किशोर बिहार के मुजफ्फरपुर से आते हैं। किशोर कुणाल 1972 के गुजरात कैडर के आईपीएस रहे हैं। साथ ही उनकी संस्कृत भाषा पर अच्छी पकड़ है। वह पटना के एक मंदिर न्यास के सचिव भी हैं।

अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले में बुधवार को सुनवाई का आखिरी दिन है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा है, आज शाम पांच बजे तक मामले की सुनवाई पूरी हो जाएगी। बुधवार को सुनवाई शुरू होने के बाद अदालत में कुछ गर्मागर्मी भी देखने को मिली। हिन्दू महासभा के वकील ने राम मंदिर से जुड़ा एक नक्शा और दस्तावेज सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन को सौंपे, जिसे उन्होंने अदालत में ही फाड़कर फेंक दिया। इस पर चीफ जस्टिस खफा हो गए और कहा कि ये होगा तो हम उठकर चले जाएंगे।

हालांकि बाद में नक्शा फाड़ने को लेकर सुनवाई के दौरान राजीव धवन ने कहा, दस्तावेज हाथ में लेकर मैंने आपसे (चीफ जस्टिस) कहा कि मैं इसे फाड़ना चाहता हूं। आपने कहा आपकी मर्जी है तो मैंने फाड़ दिया। अब मीडिया में चल रहा है कि चीफ जस्टिस के कहने पर मैंने कागज फाड़े। इस पर सीजेआई गोगोई ने कहा, स्पष्टीकरण हो गया। आप कह सकते हैं कि मेरे कहने पर ही आपने कागज फाड़े।

चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। इस मामले की सुनवाई कर रही है। बीते 40 दिन से इस मामले की रोजाना सुनवाई हो रही है। अदालत ने 16 अक्टूबर को सुनवाई का आखिरी दिन रखा है। सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि आज (16 अक्टूबर) शाम पांच बजे तक मामले की सुनवाई पूरी की जाएगी। किसी को और समय नहीं दिया जाएगा। मंगलवार को सीजेआई ने कहा था कि सभी पक्ष 16 अक्तूबर तक मामले से संबंधित दलीलें पेश कर दें। इसके बाद वो मामले पर फैसला लिखेंगे, जिसमें चार हफ्ते का समय लग सकता है।

सुप्रीम कोर्ट अयोध्या में 2.77 एकड़ जमीन के विवाद पर सुनवाई कर रहा है। जमीन पर सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला का दावा है। ये मामला काफी पुराना है। 2010 में इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमीन को तीनो पक्षों के बीच बराबर बराबर बांटने का आदेश दिया था। इससे नाखुशी जताते हुए तीनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे थे।

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