हिन्दू-मुसलमान अब नहीं झगड़ते अयोध्या मसले पर

नई दिल्ली। 6 दिसंबर को अयोध्या में विवादित ढांचे को गिराए जाने की बरसी परराजधानी के जवहार लाल नेहरु यूनिवर्सिटी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में कविता पाठ से लेकर सेमिनार हुए। अलीगढ़ में विश्व प्रसिद्ध इतिहासकार और एएमयू के एमरेटस प्रोफेसर इरफान हबीब ने अयोध्या विवाद पर कहा कि अयोध्या का मसला हिन्दू-मुसलमान के बीच का आपसी झगड़ा नहीं है। बल्कि, जनता और सांप्रदायिक ताकतों के बीच का मुद्दा है।

Ayodhya Issue

सांप्रदायिक ताकतें लोगों को बांटने की दिशा में इस मुद्दे को हवा दे रही हैं। अब जरूरत है कि जनता को सांप्रदायिक ताकतों का मुकाबला करने के लिए एक संयुक्त मोर्चे का गठन करना होगा। विवादित ढांचे के मुद्दे पर प्रो. इरफान हबीब ने यह भी कहा अब तक इस मामले में न्याय नहीं मिल पाया है।

उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद का निर्माण नहीं कराया गया था। सन1527 में मुगल शासक बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था। इतिहास के पन्नों में कहीं दर्ज नहीं कि उस जगह कोई मंदिर था। न ही मीर बाकी के इतिहास में उसका जिक्र है। प्रो. हबीब एएमयू के स्टाफ क्लब में अयोध्या के विवादित ढांचे को लेकर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे।

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) और डेमोक्रेटिक टीचर्स एसोसिएशन के संयुक्त सेमिनार में प्रो. इरफान हबीब ने कहा कि सांप्रदायिक ताकतें मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाए जाने का भ्रामक प्रचार कर रही हैं।

गांधी जी के बताये रास्ते पर चलने की सलाह

उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों में एक धर्म की प्रार्थना को भी असंवैधानिक करार दिया। कहा, संविधान में कहीं भी यह अधिकार नहीं दिया गया है। ऐसे मामलों में उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को आदर्श बताते हुए मिसाल पेश की कि वह सर्वधर्म समभाव में विश्वास रखते थे। हर सभा में वह सभी धर्मो की प्रार्थना कराया करते थे। जब एक धर्म की प्रार्थना पर आपत्ति हुई तो गांधी जी ने साफ कहा था कि एक धर्म की प्रार्थना सभा नहीं होगी तो किसी धर्म की प्रार्थना नहीं की जाएगी। राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को नसीहत दी कि वह गांधी जी की राह चलकर निष्पक्ष आंदोलन चलाएं।

उधर, जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी में मंगलेश डबराल, अभिषेक श्रीवास्तव समेत बहुत से कवियों ने इस अवसर पर सांप्रदायिक विरोधी अपनी कविताएं पढ़ीं। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अध्यापकों और छात्रों की उपस्थिति रही।

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