#Award Returns: पहले नाम से पहले धर्म नहीं पूछा जाता था : गुलजार
मुंबई। साहित्यकारों की ओर से अवार्ड वापस करने की बात पर अब देश के मशहूर शायर और गीतकार गुलजार ने मुंह खोला है। गुलजार ने देश की मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि पहले ऐसा माहौल नहीं था कि इंसान को नाम से पहले धर्म बताना पड़े।Video: कलाम की कहानी, गुलजार की जुबानी
गुलजार ने कहा कि दादरी और कलबुर्गी में जो भी हुआ है उसमें दोष सिर्फ और सिर्फ सरकार का है इसमें साहित्यकारों की क्या गलती है इसलिए लौटाना है तो सरकार को सम्मान लौटाया जाना चाहिए, यह तो हमारे अकादमी अवार्ड है। मैंने ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा था, कम से कम बात करने के लिए तो बेख़ौफ थे।
गुलजार ने कहा कि लेखक अपना सम्मान लौटा रहे हैं और उस पर हमारे नेतागण कर रहे हैं कि यह राजनीतिक साजिश है, अब आप ही बताइये कि लेखक क्या राजनीति करेगा, वो तो कलम का साथी है और कलमा पढ़ना जानता है, वो चिंतन कर सकते हैं, राजनीति क्या खाक करेंगे अवार्ड लौटाना एक विरोध प्रदर्शन है।
मौजूदा हालात पर टिप्पणी करते हुए गुलज़ार ने कहा मुझे तो राम राज नज़र नहीं आ रहा है। मैं उसे आदमी से मिलना चाहता हूं जिसे नज़र आ रहा है।













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