औरंगाबाद रेल हादसा: प्रवासी मजदूरों ने ई-पास के लिए किया था आवेदन, लेकिन नहीं मिला कोई जवाब, चली गई जान
नई दिल्ली। औरंगाबाद ट्रेन दुर्घटना में जीवित बचे लोगों में से एक ने शुक्रवार को बताया कि श्रमिकों के समूह ने एक सप्ताह पहले ई-ट्रांजिट पास के लिए आवेदन किया था, लेकिन सरकारी अधिकारियों से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद उन्होंने अपने गृह राज्य की ओर पैदल ही जाने का फैसला किया। गौरतलब है कि देशव्यापी लॉकडाउन के बीच महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रेलवे पटरियों पर आराम के लिए रुके 16 मजदूर मालगाड़ी की चपेट में आ गए। इस हादसे में प्रवासी मजदूरों के समूह के 16 लोगों की मौत हो गई जबकि 3 लोगों की जान बाल-बाल बची है।

एक हफ्ते पहले किया था आवेदन
औरंगाबाद में करमाडा के पास हुए इस रेल हादसे के बाद से देश में हंगामा मचा हुआ है। कोरोना संकट में प्रवासी मजदूरों के सामने आजीविका की समस्या है जिसके चलते वह पलायन को मजबूर हैं। हादसे के बाद से महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार विरोधियों के निशाने पर आ गई है। इसी बीच मजदूरों में से एक ने दावा किया है कि उसने सरकार के ई-ट्रांजिट पास के लिए आवेदन किया था लेकिन अधिकारियों की तरफ से कई सुनवाई नहीं की गई।

अधिकारियों की तरफ से कई सुनवाई नहीं
बचे हुए तीन लोगों में से एक धीरेंद्र सिंह ने कहा, हमने एमपी में अधिकारियों के साथ एक सप्ताह पहले ई-पास के लिए आवेदन किया था, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने कहा, हमारे पास काम नहीं है और परिवार के पास वापस जाने के अलावा कोई और चारा नहीं था। बता दें कि मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के मामन गांव के निवासी धीरेंद्र सिंह रेल दुर्घटना में बाल-बाल बच गए थे।

पटरियों पर हर तरफ बिखरे थे मृतकों के सामान
धीरेंद्र सिंह मजदूरों के उस समूह में शामिल थे जो घर की ओर पलायन कर रहे थे, हादसे के समय वह पटरी से कुछ दूर थे लेकिन उनके अन्य साथी आराम करने के लिए रेल की पटरियों पर बैठे और वहीं सो गए। सुबह 5.15 बजे एक मालगाड़ी ने 16 लोगों को कुचल दिया। मालगाड़ी के गुजरजाने के बाद रेलवे पटरी पर मृतकों के सामान बिखरे हुए थे। मजदूरों द्वारा अपनी यात्रा के दौरान साथ ले गईं रोटियां भी पटरियों पर इधर-उधर बिखरी देखी गईं।

महाराष्ट्र से पैदल मध्य प्रदेश के लिए निकले थे मजदूर
सभी प्रवासी मजदूर जलाना से शाम सात बजे चले थे । 5 मई को इन सभी मजदूरों ने जालना से अपना सफर शुरू किया, पहले ये सभी सड़क के रास्ते आ रहे थे लेकिन औरंगाबाद के पास आते हुए इन्होंने रेलवे ट्रैक के साथ चलना शुरू किया था। उन्होंने कुल 35 किमी का सफर तय किया था। मगर औरंगाबाद जिले के करमाड तक पहुंचे-पहुंचे रात गहरी हो गई। सभी मजदूरों ने सोचा कि खाना खाकर कुछ आराम कर लिया जाए। गुरुवार शाम सभी ने मिलकर रोटियां बनाईं और एक टिफिन में चटनी रखी ली।

आसपास झाड़ियां थी सभी ने ट्रैक पर सोना सुरक्षित समझा
सभी मजदूरों ने ट्रैक पर ही बैठकर खाना खाया। इसके बद कुछ लोगों ने कहा कि, सफर फिर शुरू किया जाए। लेकिन कुछ ने कहा कि थके हुए हैं, थोड़ा आराम कर लिया जाए। दरअसल आसपास झाड़ियां थी सभी ने ट्रैक पर सोना सुरक्षित समझा। सुबह करीब सवा पांच बजे के वक्त ये सभी गहरी नींद में सो रहे थे। तभी एक मालगाड़ी ने उन्हें रौंद दिया। सुबह के वक्त गहरी नींद में होने की वजह से किसी को भी संभलने का मौका नहीं मिला। हालांकि पांच मजदूरों की जान बच गई।