रियायत के बाद आप का बिजली कंपनियों का लेखापरीक्षा का आदेश

दिल्ली में वितरण करने वाली तीन कंपनियों बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड का लेखा परीक्षण कराना आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख चुनावी वादों में से एक था। आप का आरोप है कि बिजली कंपनियों ने घाटा दिखाकर बिजली की दरों में वृद्धि की है।
पूर्व की कांग्रेस सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए केजरीवाल ने कहा, "पूर्व की सरकार ने जो चार वर्षो में नहीं किया उसे हमने चार दिनों में कर दिखाया है।"
केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने सीएजी शशिकांत शर्मा से तीन महीनों में लेखा परीक्षण करने का आग्रह किया, लेकिन शर्मा ने कहा कि यह काम बिजली वितरण करने वाली कंपनियों के सहयोग पर निर्भर करता है।
यह फैसला प्रति माह 400 यूनिट तक खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को बिल में 50 प्रतिशत राहत देने के एक दिन बाद लिया गया है।
बिजली वितरण करने वाली कंपनियों ने आपत्ति करने के बारे में पूछे जाने पर केजरीवाल ने कहा कि खातों की लेखा परीक्षा कराने से मना करने का कोई बहाना नहीं हो सकता है।
दिल्ली सरकार ने बिजली कंपनियों को बुधवार तक का समय यह बताने के लिए दिया था कि उनके खातों की सीएजी से लेखा जांच क्यों नहीं कराई जा सकती है।
केजरीवाल ने यह उम्मीद जताई है कि लेखा परीक्षा के बाद उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने की नौबत नहीं रहेगी।
बुधवार को मुख्यमंत्री ने माना कि सब्सिडी के जरिए उपभोक्ताओं को राहत देना स्थायी समाधान नहीं है।
उन्होंने कहा, "यह स्थायी उपाय नहीं है। यही कारण है कि लेखा परीक्षण जरूरी है। यह दीर्घकालिक उपाय होने तक लोगों को थोड़ी राहत देने का जरिया है।"
केजरीवाल ने दिल्ली की बिजली कंपनियों का लेखापरीक्षण करवाने के लिए मंगलवार को सीएजी से मुलाकात की थी।
इस बीच दिल्ली की बिजली कंपनी टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) ने बुधवार को प्रति माह 400 यूनिट तक की खपत पर 50 फीसदी सब्सिडी देने के दिल्ली सरकार के फैसले का स्वागत किया।
टीपीडीडीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीर सिन्हा ने यहां संवाददाताओं से कहा, "उपभोक्ताओं की दृष्टि से यह बढ़िया कदम है। इससे उन्हें राहत मिलेगी। मैं सरकार के फैसले का स्वागत करता हूं।"
सीएजी से लेखा परीक्षा कराने के बारे में पूछे जाने पर सिन्हा ने संवाददाताओं से कहा, "यदि इसकी (सीएजी द्वारा लेखापरीक्षण) जरूरत होगी, तो हम निर्देशों का निश्चित रूप से पालन करेंगे। हम सभी संवैधानिक, और प्रशासनिक कानूनों और नियमावलियों का पालन करेंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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